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20 दिसंबर 2025

ज़िन्दगी जिन्दाबाद का घोष जल्द ही आपके साथ होगा

वर्ष 2025 भी जाने की तैयारी कर रहा है. जितने दिन इस अंतिम महीने में निकल गए हैं, अब उतने दिन भी शेष नहीं बचे हैं. समय की गति के अनुसार आना और जाना लगा ही रहना है. कल को इसी वर्ष का स्वागत किया था, अब इसी को विदा करने का समय आ गया है. कुछ ऐसा ही आने वाले वर्ष 2026 के साथ भी होगा. इन आते-जाते वर्षों के स्वागत और विदाई के बीच याद बस यही रह जाता है कि उस एक वर्ष में हम सबने क्या किया? क्या पाया, क्या खोया? क्या सुखद रहा, क्या दुखद रहा?


आप सभी सुधिजनों को याद होगा कि वर्ष 2019 में आत्मकथा ‘कुछ सच्ची कुछ झूठी आपके बीच हमारी बातों को लेकर उपस्थित हुई थी. उसी समय हमारे शुभेच्छुजनों ने प्रेरित किया था कि वर्ष 2005 में हुई दुर्घटना के बाद की अपनी जीवन-यात्रा को भी एकसूत्र में पिरोकर प्रकाशित करवाया जाये. विचार तो था कि वर्ष 2020 में इसे भी ‘ज़िन्दगी जिन्दाबाद के रूप में प्रकाशित करवाया जायेगा. अक्सर ऐसा होता है कि सोचा कुछ जाता है और हो कुछ जाता है, हमारे साथ भी यही हुआ. ज़िन्दगी जिन्दाबाद का घोष करने बैठे तो हाथों ने काँपना शुरू कर दिया, आँखों ने नम होना शुरू कर दिया, दर्द ने अपना अलग रूप दिखाना शुरू कर दिया. इन सबके बीच कुछ दुखद घटनाओं ने हिला दिया और ज़िन्दगी जिन्दाबाद को बीच में रोक देना पड़ा. यद्यपि समय के दिए गए आघातों से उबरते हुए ज़िन्दगी जिन्दाबाद को ब्लॉग पर कहानी के रूप में लिखते रहे.

 



इसी लेखन को एडिट करके, पुस्तक के रूप में संयोजित करके इस जाते हुए वर्ष 2025 में आप सबके बीच लाने का मन बना लिया है. जल्दी ही ‘ज़िन्दगी जिन्दाबाद को आप सब अपने बीच पाएँगे. ‘कुछ सच्ची कुछ झूठी की तरह आप सबका स्नेह ‘ज़िन्दगी जिन्दाबाद को भी मिलेगा, ऐसा विश्वास है.


01 मई 2025

ब्लॉग यात्रा के सत्रह वर्ष

कम्प्यूटर से परिचय होने के क्रम में ही इंटरनेट से भी परिचय हुआ था. कम्प्यूटर से परिचय बहुत पहले हो चूका था किन्तु इंटरनेट से मित्रता होने में समय लगा. वर्ष 2008 में घर पर इंटरनेट नेटवर्क के आने के बाद उससे मित्रता बढ़ी. दोनों से बहुत देर बाद मुलाकात हुई मगर उस मुलाकात ने भी प्रोत्साहित किया. लेखन को वैश्विक आयाम देने का विचार मन में आने लगा. काफी जद्दोजहद के बाद अंततः ‘मुफ्त का चन्दन, घिस मेरे नंदन’ को चरितार्थ किया. एक ब्लॉग बनाने की मंशा को पूरा करने के चक्कर में कई सारे ब्लॉग बना गए मगर हर तरफ से जाँच-परख कर, जानकारी लेने-देने के बाद एक ब्लॉग पर जुट गए. वर्ष 2008 में अप्रैल के अंतिम दिनों में ब्लॉग बनाये जाने की कवायद शुरू हुई थी. घबराहट ऐसी थी ब्लॉग बनाये जाने के बाद भी उसी दिन कुछ भी पोस्ट नहीं किया था. दो-तीन दिन निकल जाने के बाद चार मई को पहली पोस्ट इसी ब्लॉग पर लिखी गई.

 



ब्लॉगिंग की सत्रह वर्षीय यात्रा पूरी होने पर पीछे पलट कर देखते हैं तो अपनी ब्लॉग लेखन की यात्रा में अनेक ब्लॉग अलग-अलग विषयों पर बनाये जाते रहे. अनेक सामूहिक ब्लॉग से जुड़ना होता रहा. अनेक वेबसाइट पर लिखना हुआ. बहुत से दोस्तों के, परिचितों के, अपरिचितों के ब्लॉग बनाये, बनवाए जाते रहे. ब्लॉग की लोकप्रियता के दौर में बहुत से मित्रों से संपर्क हुआ. अनेक मित्रों से घनिष्ठ सम्बन्ध बने. वैचारिक आदान-प्रदान होता रहा. मिलना जुलना होता रहा. लग रहा था जैसे कि ब्लॉग संसार ने एक अलग तरह की ही दुनिया का निर्माण कर दिया है. ब्लॉग संसार के मित्रों की तरफ से सुझाव दिए गए ब्लॉग के द्वारा धनोपार्जन की. इस तरफ प्रयास किया गया मगर मन न लगा क्योंकि तकनीकी रूप से जितनी साक्षरता उसके लिए चाहिए थी, उतनी हममें दिखाई न दी. सच तो ये है कि तकनीकी से निकटता बनाये रखने के बाद भी इस मामले में हम अशिक्षित ही रह गए. बहरहाल, लेखन में एक लम्बा समय व्यतीत करने के बाद भी साहित्यिक क्षेत्र में, लेखन के क्षेत्र में किसी तरह की स्थापना न होने का एहसास होता है.

 

लेखन क्षेत्र में यह भी एक तरह की मजदूरी सी है. श्रम किये जा रहे हैं और उसका क्या परिणाम निकलेगा इसे उस लेखन का उपयोग करने वालों पर छोड़ दिया है. इन सत्रह वर्षों की यात्रा में हजारों पोस्ट लिखी गईं. इसी ब्लॉग पर 2500 से अधिक पोस्ट हो गईं हैं. अभी संख्याबल की तरफ ध्यान जाते ही गौर किया तो जानकारी हुई कि अभी कुछ दिन पहले ही इस ब्लॉग पर हमने अपनी 2500वीं पोस्ट लिखी थी.


2500वीं पोस्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें.

01 मार्च 2025

विलुप्त होती डायरी लेखन विधा

कई बार बहुत सी बातें अनायास ही निकल आती हैं, ऐसी बातें जिनका कोई चर्चा नहीं हो रहा होता है, जिनके बारे में कोई बात नहीं चल रही होती है. ये मानवीय स्वभाव है कि किसी भी बात को अन्य दूसरी बात से सम्बंधित कर ही लेते हैं. ऐसी ही किसी बात की चर्चा के दौरान अचानक से डायरी लेखन की चर्चा होने लगी. इस चर्चा के आरम्भिक बिन्दु में पहली बात यही उठी कि क्या आजकल डायरी लेखन बंद हो गया है? या फिर साहित्य की इस महत्त्वपूर्ण विधा को महत्त्व नहीं दिया जा रहा है? इन दो सवालों से इतर बात कोई और भी हो तो कहा नहीं जा सकता मगर एक बात ये तो है कि वर्तमान में डायरी लेखन की चर्चा सार्वजनिक रूप से नहीं हो रही है.

 

इधर सामान्य चर्चा के दौरान बात हो रही थी व्यक्ति के व्यवहार की, उसकी मनोदशा की और उससे बाहर निकलने की. इसी में एक बिन्दु यह भी सामने आया कि कोई व्यक्ति यदि किसी बात को लेकर परेशान है, समस्या से ग्रस्त है ऐसे में यदि उसके पास कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है जिससे वह अपनी बात को खुलकर कह सके तो यदि वह अपनी बात को लिखकर व्यक्त कर दे तो उसकी समस्या का बहुत बड़ा हिस्सा स्वतः ही वहीं समाधान में बदल जाता है. किसी के लिए यह बात कितनी महत्त्वपूर्ण है, कितनी प्रभावी है इसका तो पता नहीं पर व्यक्तिगत रूप से इस कदम से हमें बहुत लाभ हुआ है. किसी तरह की समस्या होने पर, कुछ दिक्कत होने पर अपनी बात न कह पाने की स्थिति में कागज़ पर कुछ लिख देने से, कोई कविता लिख देने से, उस विषय से सम्बंधित कोई लेख लिख देने से दिल-दिमाग को बहुत आराम मिलता है. संभवतः डायरी विधा के जन्मने का एक कारण यह भी रहा होगा.

 

आजकल देखने में आ रहा है कि कम उम्र के बच्चे भी हताशा-निराशा में आत्महत्या जैसा कदम उठा रहे हैं, मौत को गले लगा रहे हैं. दुनियादारी की भागदौड़ इस कदर तेज है कि अपने परिवार में ही रुककर किसी दूसरे सदस्य की समस्या को देखने की फुर्सत नहीं है, ऐसे में समाज से क्या उम्मीद की जाये. आज के बच्चे अपने आपमें ही नितांत एकाकी जीवन गुजार रहे हैं, ऐसे में उनके सामने अपनी बात कहने की, अपनी समस्या कहने की दिक्कत तो है ही. उनको न तो उनकी पढ़ाई के दौरान, न ही पारिवारिक क्षणों में इस तरह की किसी भी प्रक्रिया से परिचित करवाया गया है. ऐसी स्थिति में उनको डायरी लेखन की वास्तविकता से क्या ही अवगत कराया गया होगा, ये सोचा-समझा जा सकता है.

 

इधर सामान्य चर्चाओं में बहुत से लोगों द्वारा डायरी लेखन और ब्लॉग लेखन को एकसमान, एक जैसा बताने का प्रयास किया जा रहा है. देखा जाये तो ये दोनों स्थितियाँ ही अलग हैं. इन दोनों के बीच किसी भी तरह का कोई साम्य नहीं है. आज की पीढ़ी को डायरी लेखन का महत्त्व समझाना होगा. हिन्दी साहित्य के पाठ्यक्रम में इसे किसी पेपर के एक बिन्दु के रूप में रखने से इस विधा का भला नहीं हो रहा. डायरी लेखन विधा को एक स्वतंत्र विधा के रूप में विकसित करने की, स्थापित करने की आवश्यकता है.


04 मई 2023

ब्लॉगिंग के पंद्रह वर्ष

आज इस ब्लॉग के पंद्रह वर्ष हो गए. इस ब्लॉग के क्या, ब्लॉगिंग करते हुए ही पंद्रह वर्ष बीत गए. इन पंद्रह वर्षों में जीवन के उतार-चढ़ाव तो देखे ही, ब्लॉगिंग जगत के भी जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखे. बहुत से मित्रों ने माइक्रो-ब्लॉगिंग के नाम से चलने वाले मंचों पर अपनी उपस्थिति बना ली, कुछ मित्र अभी भी यहीं सक्रिय हैं. हमने भी अपनी सक्रियता यहाँ बनाये रखी, उसका कारण ये रहा कि विगत कुछ समय से माइक्रो-ब्लॉगिंग के तमाम मंचों पर संवाद की स्थिति, विमर्श की स्थिति में जबरदस्त गिरावट आई है. यदि नाम लेकर कहा जाये तो फेसबुक पर, ट्विटर पर अब उस तरह की सामग्री, उस तरह का विमर्श देखने को नहीं मिलता है, जैसा कि कभी हुआ करता था.




इंटरनेट की दुनिया में जब ऑरकुट, फेसबुक आदि का चलन बढ़ा तो इस तरफ भी हाथ आजमाए. जैसा अनुभव ब्लॉगिंग के आरंभिक दिनों में मिला था, वैसा ही अनुभव यहाँ भी हुआ. खैर अभी बात ब्लॉगिंग की, जहाँ एक तरफ हम आज भी सीखने की अवस्था में हैं, वहीं हमारी सक्रियता देखते हुए बहुत से लोग उसी आरंभिक दौर में हमसे सीखने के लिए प्रयासरत थे. जितना संभव हुआ करता, हम सीखते और उनको भी सिखाते. ये बात है सन 2008 के बाद की. उस समय ब्लॉगिंग पर बहुत सारे सामूहिक ब्लॉग हुआ करते थे. खुद को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने की लालसा में बहुत सारे सामूहिक ब्लॉग से जुड़ना भी हुआ. इसी क्रम में बहुत से अच्छे लोगों से जुड़ना हुआ तो बहुत से बुरे लोग भी जुड़े. बहुत से लोग ऐसे भी जुड़े जो किसी भी समय मदद करने को, ब्लॉग सम्बन्धी समस्या का समाधान करने को तत्पर रहते. इसी तरह कुछ लोग ऐसे जुड़े, जिनकी मानसिकता में कुछ लोगों के ब्लॉग की रेटिंग को कम करवाना, उस पर पाठकों का कम से कम पहुँचना हो, ये काम होता था. बावजूद इसके भी ब्लॉगिंग की दुनिया से बहुत कुछ सकारात्मक सीखने को मिला.


शुरू के कुछ साल ब्लॉग के माध्यम से वाकई ज्ञानार्जन के रूप में गुजरे. कालांतर में एक ऐसा राजनैतिक दौर आया जिसने बहुत कुछ बदल दिया. उसी राजनैतिक बदलाव ने लोगों की विचारधारा को सामने ला दिया. लम्बे समय से चले आ रहे राजनैतिक और ऐतिहासिक विभ्रम से पर्दा हटा तो वर्षों के ब्लॉगिंग मित्र नाराज हो गए. ब्लॉगिंग के माध्यम से माइक्रो-ब्लॉगिंग में आये ऐसे मित्रों ने ब्लॉग की जगह ब्लॉक करना शुरू कर दिया.


बहरहाल, आज पंद्रह साल बाद भी ब्लॉगिंग पहले की तरह नियमित है. न केवल हम ब्लॉगिंग कर रहे हैं बल्कि नए लोगों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं. ये दुनिया कब तक रहेगी पता नहीं मगर जब तक रहेगी हम ब्लॉगिंग करते रहेंगे, ब्लॉग-पोस्ट लिखते रहेंगे. 








 

19 मार्च 2022

कंटेंट राइटिंग Content Writing के बारे में जानकारी

इंटरनेट की दुनिया में कंटेंट राइटिंग बहुत ही प्रचलित शब्द है. बहुत से लोगों के लिए यह शब्द अत्यंत परिचित है और बहुत से लोगों के लिए अनजाना है. यहाँ पहले तो ये जान लिया जाये कि कंटेंट कहते किसे हैं? इसे हिन्दी में समझने के लिए बस इतना याद रखना है कि किसी भी तरह की सामग्री को कंटेंट कहा जाता है. यह तो एक तरह से इसका हिन्दी रूपांतरण हुआ. यदि बात लेखन की करें तो किसी विषय विशेष पर कोई लेख लिखा जा रहा है, कोई पाठ्य-सामग्री तैयार की जा रही है तो उसे कंटेंट कहा जायेगा. लेखन में कंटेंट का अर्थ है- किसी विषय पर लेखन. उदाहरण के तौर पर इसी लेख को कंटेंट कहा जा सकता है.  

 

कंटेंट राइटिंग ऑनलाइन भी होती है और ऑफलाइन. वर्तमान में ऑनलाइन कंटेंट राइटिंग का महत्त्व अधिक बढ़ गया है क्योंकि बहुतायत लोग अब ऑनलाइन पाठ्य-सामग्री को अधिक पसंद करने लगे हैं. यहाँ हम इंटरनेट पर की जाने वाली कंटेंट राइटिंग के बारे में ही चर्चा करेंगे. ऐसी स्थिति में इंटरनेट पर कंटेंट किस तरह का हो सकता है, यह जानना आवश्यक है.

 



सामान्य रूप में इंटरनेट पर कंटेंट को तीन रूपों में समझ सकते हैं- 

ऑडियो कंटेंट, यह वह कंटेंट होता है जिसे सिर्फ सुना जा सकता है. इसमें पॉडकास्ट, एफएम, ऑनलाइन रेडियो आदि शामिल होते हैं.


वीडियो कंटेंट, यह वो कंटेंट होता है जिसे देखा जा सकता है. इसमें यूट्यूब वीडियो, वेबसीरीज, फिल्मों आदि को शामिल किया जाता है.


टेक्स्ट कंटेंट, यह वह कंटेंट होता है जिसे सिर्फ पढ़ा जा सकता है. इसमें लेख, पुस्तक आदि को उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है.  

 

उक्त तीन रूपों में चूँकि यहाँ चर्चा कंटेंट राइटिंग या कहें कि कंटेंट लेखन के बारे में हो रही है, इसका सीधा सा अर्थ कंटेंट के टेक्स्ट रूप से है. कंटेंट राइटिंग के रूप में टेक्स्ट को ही समझा जाता है. यह तो सहज रूप में स्पष्ट होता है कि कंटेंट कहते किसे हैं और कंटेंट के रूप क्या-क्या हो सकते हैं. अब सवाल पुनः पैदा होते हैं कि आखिर कंटेंट राइटिंग या कंटेंट लेखन कहते किसे हैं? ये कौन सी विधा होती है? इसका अर्थ क्या है? इसके लिए सामान्य रूप में समझा जा सकता है कि किसी भी विषय पर किसी लेख लिखने को कंटेंट राइटिंग कहा जाता है.

 

ऑनलाइन पाठ्य-सामग्री की महत्ता बढ़ जाने के कारण, पाठकों की रुचियों से सम्बंधित सामग्री की माँग बढ़ने के कारण भी कंटेंट राइटिंग की माँग ज्यादा है. लोगों तक अधिक से अधिक पाठ्य-सामग्री, प्रमाणिक सामग्री को पहुँचाने के लिए कंटेंट राइटिंग की जरूरत होती है. वर्तमान में ऑनलाइन बहुत सारे ब्लॉग, बहुत सी न्यूज़ वेबसाइट सक्रिय रूप में काम कर रही हैं. इनके द्वारा जानकारी, पाठ्य-सामग्री लोगों के मध्य लोकप्रिय है. इनके नियमित सञ्चालन के लिए, लगातार सार्थक जानकारी आने के लिए बहुत सारे कंटेंट की आवश्यकता होती है. कई बार समस्या सामने आती है कि ब्लॉग लेखक अथवा समाचारों से सम्बंधित वेबसाइट पर नियमित रूप से पोस्ट का आना नहीं हो पाता है अथवा सम्बंधित ब्लॉग या वेबसाइट के लेखक खुद बहुत अधिक कंटेंट का निर्माण नहीं कर पाते हैं तो ऐसे लोगों को कंटेंट लिखवाने की आवश्यकता होती है. उस कंटेंट का लिखा जाना कंटेंट राइटिंग कहलाता है और उसे लिखने वाले लोग कंटेंट राइटर कहे जाते हैं.

 

इसके अलावा बहुत सारे लोग ऐसे भी होते हैं जो ऑनलाइन सामग्री को देना चाहते हैं मगर वे स्वयं अच्छा कंटेंट नहीं लिख पाते हैं. ऐसी स्थिति में वे लोग कंटेंट राइटर्स को भुगतान करके उनसे कंटेंट लिखवाने का काम करते हैं. उदाहरण के लिए अगर कोई व्यक्ति किसी अखबार, मैगजीन, वेबसाइट या ब्लॉग के लिए कंटेंट लिखने का काम करता है तो उसे कंटेंट राइटर कहा जा सकता है.

 

यहाँ यह समझना अब सहज है कि कंटेंट राइटिंग क्या होती है, कंटेंट राइटर कौन कहलाता है और कंटेंट राइटिंग की आवश्यकता क्यों होती है. यहाँ एक बात ध्यान में रखना जरूरी है कि सिर्फ वेबसाइट या ब्लॉग के लिए ही कंटेंट राइटिंग की या फिर कंटेंट राइटर की आवश्यकता नहीं होती है बल्कि ई-मेल राइटिंग, की-नोट स्पीच, वीडियो स्क्रिप्ट, पॉडकास्ट सामग्री, श्वेत पत्र, वेब पेज आदि के लिए भी कंटेंट राइटिंग की, कंटेंट राइटर की आवश्यकता होती है. कंटेंट राइटर विभिन्न विषयों से सम्बंधित सामग्री का निर्माण करता है. यह सामग्री सम्बंधित विषय पर प्रमाणिक हो सकती है, विषय विशेष से सम्बंधित हो सकती है, किसी बिंदु पर जानकारीपरक हो सकती है. किसी कंटेंट राइटर को सरकारी रूप में, गैर-सरकारी रूप में, स्वतंत्र रूप में अपने काम को स्थापित कर सकता है. कंटेंट राइटर सामान्य तौर पर ब्लॉग राइटर, सोशल मीडिया लेखक, ई-मेल राइटर, स्क्रिप्ट लेखक, विज्ञापन लेखक, ब्रांड पत्रकार, कॉपीराइटर, घोस्ट राइटर, तकनीकी लेखक आदि के रूप में काम कर सकते हैं. इन रूपों में एक कंटेंट राइटर वेबसाइट, ब्लॉग के लिए सामग्री का निर्माण कर सकता है. सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रतिष्ठित व्यक्तियों के पेज, व्यावसायिक/वाणिज्यिक पेजों के लिए कंटेंट का निर्माण कर सकता है. बहुत सी कंपनियों और उत्पादों के लिए वह विज्ञापन का लेखन भी कर सकता है. इसके साथ-साथ पत्रकारिता के लिए, जनसंपर्क विभाग के लिए भी कंटेंट राइटर लेखन करते हैं.

 


18 मार्च 2022

ऑनलाइन लेखन को प्रभावी बनायें

किसी कंप्यूटर, स्मार्टफ़ोन अथवा किसी भी तरह के डिजिटल डिवाइस पर पढ़ी जाने वाली किसी भी सामग्री को ऑनलाइन लेखन के रूप में परिभाषित किया जाता है. इसे सामान्य रूप में डिजिटल लेखन भी कहा जाता है. ऑनलाइन लेखन अनेक रूपों में हमारे बीच उपस्थित रहता है. किसी भी डिजिटल उपकरण के द्वारा पढ़े-लिखे-देखे जाने वाले संदेशों, टेक्स्ट मैसेज, ईमेल, ब्लॉगिंग, ट्वीट या फिर सोशल मीडिया के अन्य सहायक माध्यम जैसे फेसबुक, व्हाट्सएप आदि पर लिखना या वहाँ पर टिप्पणियाँ करना भी ऑनलाइन लेखन के रूप में जाना जाता है. किसी भी प्रकाशित सामग्री को कागज़ पर पत्रिका, पुस्तक के रूप में पढ़ना और किसी सामग्री को स्क्रीन पर पढ़ने में अंतर होता है. ऑनलाइन पाठक बहुत ज्यादा सामग्री को या कहें कि विस्तार से लिखे गए विषय को पढ़ने के कम इच्छुक रहते हैं. इसी कारण से वे पढ़ते समय जल्द से जल्द पेज को आगे बढ़ाने में विश्वास रखते हैं. ऐसी स्थिति में ऑनलाइन लेखन करने के भी अपने तरीके हैं, अपनी विधियाँ हैं, ऑनलाइन लेखन करने वाले को इसका ध्यान रखना आना चाहिए. 


ऑनलाइन लेखन किसी भी रूप में कठिन विधा नहीं है. सामान्य रूप में हम सभी किसी न किसी रूप में ऑनलाइन लेखन करते ही हैं. किसी को मेल करना, सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर किसी पोस्ट को लिखना या फिर किसी पोस्ट पर कमेंट करना भी ऑनलाइन लेखन के अंतर्गत आता है. यहाँ सामान्य रूप में कुछ बिंदु हैं, जिनका ध्यान ऑनलाइन लेखन के दौरान रखा जाना चाहिए. इन्हीं के सतत अभ्यास से ऑनलाइन लेखन को प्रभावी बनाया जा सकता है.




शीर्षक को रोचक बनाना – ऑनलाइन लेखन में एक पल को सोशल मीडिया में किसी पोस्ट पर की जाने वाली टिप्पणी को छोड़ दें तो ऑनलाइन लेखन का अपना ही महत्त्व है. ऐसे में किसी भी सामग्री के लिए पाठकों की अधिकाधिक उपस्थिति सम्बंधित पोस्ट के शीर्षक को प्रभावी बनाकर संभव है. यदि किसी सामग्री का शीर्षक प्रभावी और रोचक है तो पाठक स्वतः उस सामग्री की तरफ आकर्षित होता है.

 

सामग्री के संक्षेपण से आरम्भ – ऑनलाइन पाठन में एक बहुत बड़ी समस्या किसी भी पाठक द्वारा समय की उपलब्धता है. बहुतायत में देखने में आता है कि ऑनलाइन पाठक कम से कम समय में अधिक से अधिक सामग्री को पढ़ लेना चाहता है. ऐसे में वह किसी भी सामग्री को पूरा पढ़ने के बजाय उसके संक्षेपण या कहें कि उसके सारांश को पढ़ना पसंद करता है. यदि किसी पाठ्य-सामग्री का आरम्भ उसके सारांश से किया जाये तो संभव है कि अपनी मनपसंद सागरी देखकर पाठक उसे पूरा पढ़ने के प्रति आकर्षित हो. यहाँ यह ध्यान रखना बहुत आवश्यक है कि सारांश पूरी तरह से ऑनलाइन सामग्री से सम्बंधित-संदर्भित हो. यदि ऐसा नहीं होता है तो पाठक अपने आपको ठगा हुआ महसूस करता है. ऐसी स्थिति में सम्बंधित ऑनलाइन मंच पर पाठकों का ट्रैफिक कम होता जाता है.

 

सामग्री को उप-शीर्षकों (हेडिंग) में विभक्त करना – यदि पाठ्य-सामग्री बहुत विस्तार लिए है तो बेहतर है कि सम्पूर्ण सामग्री को कई उप-शीर्षकों में बाँट दिया जाये. इससे पढ़ने वाले व्यक्ति को अपने मनपसंद हेन्डिंग के द्वारा सामग्री को खोजना, पढ़ना सहज हो सकेगा. इस तरह से सामग्री भी अलग-अलग स्पष्ट रूप में समझ आने लगती है.

 

सामग्री सहज ग्राह्य हो – ऑनलाइन लेखन में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण तथ्य यह है कि यहाँ पर सिर्फ टेक्स्ट लिखने भर से ही काम नहीं बनता है. ऑनलाइन लेखक द्वारा बहुधा अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए, उसे और प्रमाणिक बनाने के लिए, पाठकों तक सहज पहुँच बनाने के लिए सामग्री में टेक्स्ट के साथ-साथ चित्रों का, वीडियो का उपयोग भी किया जाता है. ऐसी स्थिति में लेखक को ध्यान रखना चाहिए कि टेक्स्ट सामग्री का अन्य सामग्री के साथ इस तरह का समन्वय हो कि वह पाठकों को सहज रूप में स्वीकार हो, समझ आये. यदि टेक्स्ट में अथवा अन्य सामग्री में किसी तरह के विरोधभास की स्थिति बनती है या फिर किसी सामग्री के द्वारा भड़काने वाली, अश्लीलता जैसी स्थिति बनती है तो वह भी सार्थक ऑनलाइन लेखन नहीं कहा जाता है.

 

क्लिष्ट शब्दों के प्रयोग से बचना चाहिए - लेख को लिखते समय यह भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि उसमें प्रयुक्त शब्द सामान्य बोलचाल के हों. अनावश्यक रूप से कठिन, क्लिष्ट, भारी-भरकम शब्दों के प्रयोग से बचा जाना चाहिए. यदि लेख में सामान्य शब्द, सरल शब्द का प्रयोग किया जायेगा तो पाठकों के लिए सामग्री को और उसमें दी गई जानकारी को समझना आसान होता है. ऐसा होने से पाठकों में सम्बंधित साईट के प्रति और सामग्री के प्रति रुचि बढ़ती है.

 

की-वर्ड का उपयोग किया जाना चाहिए – ऑनलाइन लेखन, पाठन में की-वर्ड किसी भी पाठ्य-सामग्री का मुख्य तत्त्व कहा जा सकता है. ऑनलाइन सर्च इंजन में इन्हीं की-वर्ड्स के द्वारा सामग्री को खोजना सरल होता है. बहुत सारे लेखकों के साथ यह समस्या होती है कि उनके द्वारा अत्यंत महत्त्वपूर्ण सामग्री को ऑनलाइन लिखा गया होता है, उनके द्वारा सार्थक पोस्ट की गई होती है मगर वह सामग्री उपयुक्त की-वर्ड्स के अभाव में पाठकों के सामने नहीं आ पाती है. इसके लिए लेखकों को ध्यान रखना चाहिए कि वे की-वर्ड्स के रूप में सम्बंधित लेख से जुड़े शब्दों का ही चयन करें. उसमें दी गई सामग्री किन-किन बिन्दुओं पर केन्द्रित है, उसी को अपने की-वर्ड्स में शामिल किया जाना चाहिए.

 

सामग्री में विषय से सम्बंधित लिंक भी देनी चाहिए – यह एक स्वाभाविक सी स्थिति होती है कि जब कोई लेखक किसी लेख को लिखता है तो वह उसमें अनेक सन्दर्भों का उपयोग भी करता है. कई बार वह अपनी बात को प्रमाणिक बनाने के लिए भी, अपनी बात में तर्क प्रस्तुत करने के लिए भी अन्य पाठ्य-सामग्री का सहारा लेता है. ऑनलाइन लेखन में यह सुविधा रहती है कि लेखक अपनी बात को प्रमाणित करने के लिए उपयोग की जाने वाली लिंक का, सम्बंधित पाठ्य-सामग्री का हवाला दे सकता है. इसके लिए सम्बंधित बिन्दुओं पर, सम्बंधित जानकारी पर उस लिंक को लगाया जा सकता है, जहाँ से वह सामग्री ली गई है या फिर जहाँ से अपनी बात को कहने के लिए लेखक द्वारा तथ्य लिए गए हैं. इस तरह लिंक दिए जाने से पाठक सीधे तौर पर उस वेबसाइट पर अथवा सम्बंधित मंच आर जाकर विस्तृत रूप में सामग्री को देख-पढ़ सकता है. ऑनलाइन लेखन में अपने लेख में बीच-बीच में महत्त्वपूर्ण बिन्दुओं, जानकारी पर लिंक का लगाया जाना सम्बंधित लेख को और अधिक प्रभावी बनाता है.

 

देखा जाये तो ऑनलाइन लेखन ऑफलाइन लेखन के मुकाबले बहुत सहज और आसान हो गया है. इसके लिए उक्त कुछ बिन्दुओं को ध्यान में रखते हुए अभ्यास किया जाये, लेखन किया जाये तो समय के साथ ऑनलाइन लेखन में परिपक्वता आती है, सामग्री में भी गाम्भीर्य आता है.

 

 

 


16 नवंबर 2021

ब्लॉगिंग का वो सुनहरा दौर

ब्लॉगिंग करते हुए उस समय तक लगभग चार साल हो गये थे। उस समय के सक्रिय एग्रीगेटर पर हमारे ब्लॉग की उपस्थिति होने लगी थी। उन्हीं दिनों रात के लगभग 11 बजे मोबाइल पर अपरिचित नम्बर से कॉल आई। एक महिला का गम्भीर स्वर उभरा। चंद औपचारिकताओं के बाद, परिचय के बाद उन्होंने ब्लॉग बनाने में मदद करने को कहा। हमारी समझ में न आया कि ब्लाॅग जगत के तमाम नामचीन महारथियों को छोड़ वे हमसे क्यों मदद चाह रहीं हैं?


फिलहाल बाकी सोचा-विचारी बंद करके उनके इस कदम की, सोच की सराहना उनसे ही की। इसका कारण उनका लगभग 65-70 वर्ष की आयु का होना था। बहुत खुशी हुई हमें उनका ब्लॉग बनवाने पर, उस सम्बन्ध में मदद करने पर। उनको यह स्पष्ट कर दिया था कि हम खुद ब्लॉग संसार के विद्यार्थी हैं, जितना सीख सके उतनी सहायता अवश्य कर देंगे। उसके बाद उनके लगातार फोन आते रहे, घंटों के हिसाब से वे मोबाइल से ही अपनी समस्या का समाधान प्राप्त करतीं।


उनको बार-बार यह निवेदन करने के बाद कि हम देर रात जागते रहते हैं, काम करते रहते हैं वे हर बार बड़े संकोच भाव से क्षमा करने की बात करतीं।  खुशी की बात ये कि उन्होंने बहुत जल्दी ब्लॉग लेखन की तमाम समस्याओं को सुलझा लिया। ब्लॉग लेखन की तमाम बारीकियों को सीख लिया। जल्दी ही उनके कई ब्लॉग पूरी सक्रियता, गम्भीरता से पाठकों के बीच लोकप्रिय हो गये।


सुखद ये है कि वे आज भी पूरी तरह से, नियमित रूप से ब्लॉग लेखन में सक्रिय हैं। साहित्यिक रचनाओं के साथ-साथ बाल साहित्य पर उनका बहुत ही सराहनीय कार्य है। हम आज भी प्रयास करते हैं कि अधिक से अधिक लोग ब्लॉग लेखन में सक्रिय हों। इसके लिए लोगों को प्रेरित भी करते हैं, अपनी सामर्थ्य भर मदद भी करते हैं।


आप भी बनाइए अपना ब्लॉग और शुरू करिए लेखन। आखिर कुछ न कुछ तो लिख ही रहे हैं न।


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15 नवंबर 2021

हमारे लेखन के प्रति आपके विश्वास ने लगातार लिखने को प्रेरित किया है

हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ ब्लॉग की सूची आ गई है. प्रसन्नता की बात है कि आप सभी के पढ़ते रहने के कारण, लेखन हेतु प्रोत्साहित करने के कारण हमारा ब्लॉग रायटोक्रेट कुमारेन्द्र भी इस सूची में है.

कुल 107 ब्लॉग को इस सूची में सम्मिलित किया गया है. पूरी सूची आप इस लिंक से देख सकते हैं.



सर्वश्रेष्ठ ब्लॉग सूची में आये अन्य ब्लॉग-लेखकों को भी बधाई-शुभकामनाएँ.

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ब्लॉग लेखन वर्ष 2008 से नियमित रूप से चल रहा है. लेखन एक बात है, उससे बड़ी बात है कि आप सुधिजनों, शुभेच्छुओं द्वारा लगातार इसे पढ़ा भी जा रहा है. यहाँ कहें कि महज पढ़ा ही नहीं जा रहा है, उससे एक कदम आगे आकर हमें सराहा जा रहा है, प्रोत्साहित किया जा रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि आये दिन हमारे मित्र, हमारे सहयोगी, हमारे शुभचिंतक, हमारे पाठक, हमारे परिजन आदि विषय, मुद्दे बताते, सुझाते हैं लिखने के लिए. आप सभी के इस स्नेह, प्यार, हमारे लेखन के प्रति आपके विश्वास ने लगातार लिखने को प्रेरित किया है. ऐसे में ब्लॉग को मिलने वाला सम्मान आपका सम्मान है, आपका स्नेह है.

हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ ब्लॉग की सूची में आपका यह ब्लॉग विगत कई वर्षों से लगातार सम्मिलित हो रहा है. इसके लिए आप सभी की शुभकामनायें हमारी शक्ति बनी हैं. आप सभी के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने योग्य न तो हम हैं और न ही हमारे पास शब्द हैं. यही कामना है, आकांक्षा है कि आप अपना यह स्नेह, प्यार, विश्वास लगातार, सदैव हम पर, हमारे लेखन पर, हमारे ब्लॉग पर बनाये रहिएगा.

हमारे मीडिया के मित्रों ने ब्लॉग की इस उपलब्धि को अपने-अपने मंचों पर स्थान दिया है. उनके स्नेह और सहयोग की अपेक्षा सदैव के लिए है.








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05 जनवरी 2021

जीतना भी खुद से, हारना भी खुद से

आज कुछ लिखने का मन नहीं हो रहा था किन्तु कल से ही दिमाग में, दिल में ऐसी उथल-पुथल मची हुई थी, जिसका निदान सिर्फ लिखने से ही हो सकता है. असल में अब डायरी लिखना बहुत लम्बे समय से बंद कर दिया है. बचपन में बाबा जी द्वारा ये आदत डाली गई थी, जो समय के साथ परिपक्व होती रही. डायरी लिखने का महत्त्व भी समझ आता रहा सो डायरी लेखन लगातार बना रहा. बीच-बीच में ऐसे पल भी आये जबकि डायरी लेखन ने जीवन में काफी उठापटक मचा दी. भावनाओं का, संबंधों का अतिक्रमण करते हुए कुछ लोगों द्वारा डायरी का पढ़ना हो गया और उसका अनावश्यक दुष्प्रचार करके हमारी अपनी भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई. बहरहाल, समय के साथ-साथ बहुत कुछ बदलता रहा, डायरी लेखन की आदत छूट न सकी और समयांतराल के साथ-साथ यह आदत बार-बार उभरती रही. हर बार कोई न कोई कारण ऐसा बनता रहा कि इसे बीच-बीच में बंद करते रहना पड़ा. गत वर्ष दिसम्बर में भी ऐसा हुआ। डायरी लिखना शुरू किया पर नियमितता न बन सकी। इसी बीच तकनीक से परिचय हुआ, ब्लॉग का आना हुआ और डायरी लेखन की आदत कागज से हटकर डिजिटल मंच पर आने लगी. ब्लॉग कहीं न कहीं डायरी के रूप में हमारी अभिव्यक्ति का माध्यम बन गया. अब विचार है कि इसी माध्यम को डायरी की तरह प्रयोग में लाया जाए।



इधर बहुत लम्बे समय से ऐसा महसूस हो रहा है जैसे हम जीवन के विविध मंचों पर, तमाम आयामों पर असफल से होते जा रहे हैं. ऐसा नहीं कि जीवन के किसी मोड़ पर सफलता नहीं मिली हो मगर जिस तरह से असफलताओं का आना होता रहा, उसके हिसाब से सफलताएँ कम ही साथ आईं हैं. यदि एक सामान्य रूप से अपने जीवन का आकलन, विश्लेषण करने बैठ जाएँ तो असफलताओं का कैनवास बहुत बड़ा दिखाई देता है. विगत कुछ समय से अचानक ऐसी स्थितियों ने दिल-दिमाग पर जैसे कब्ज़ा सा कर लिया है. अपने आपका अपनी ही दृष्टि से मूल्यांकन किया जाता रहता है. कहाँ-कहाँ, किस-किस तरह की गलतियाँ हमारे द्वारा होती रहीं इनका विश्लेषण किया जाता रहता है. किस-किस गलती को सुधारा जा सकता है, कैसे सुधारा जा सकता है इसका भी आकलन किया जाता रहता है. भरसक प्रयास किया जाता है कि लगभग सभी गलतियों को सुधार दिया जाए. इसके बाद भी बहुत से कदम ऐसे हैं जिनको अब टाइम मशीन के द्वारा ही दोबारा पाया जा सकता है. उन कदमों के साथ हुई गलतियों को अब किसी भी रूप में सुधारा नहीं जा सकता है. ऐसे में लगता है कि उनका प्रायश्चित ही कर लिया जाए. यहाँ आकर भी सिर्फ खाली हाथ नजर आते हैं क्योंकि यह भी समय के चक्र में कहीं दूर हो चुकी स्थिति है.


फिलहाल तो आजकल अपने आपसे लड़ना हो रहा है. खुद से लड़ना, खुद से जीतना, खुद से हारना और फिर सबकुछ शून्य में विलीन होकर ज्यों का त्यों उसी अवस्था में दिखाई देने लगता है, जहाँ से लड़ना शुरू किया था. दिल-दिमाग लगाने के बाद भी हर एक स्थिति समझ से बाहर लगती नजर आती है. सबकुछ साथ होने के बाद भी साथ छूटता सा दिखाई देता है. हर गलती स्वीकारने के बाद भी, हर गलत कदम का प्रायश्चित करने के बाद भी गलतियाँ कम होने का नाम नहीं लेती हैं. तमाम सारी आदतों के बीच एक और आदत जो बाबा जी के द्वारा विकसित करवाई गई थी, रात को सोने के पहले दिन भर की गतिविधियों में से अच्छी और बुरी गतिविधियों का आकलन करना. अच्छी बातों को आगे करते रहने का संकल्प करना और बुरी बातों के लिए माफ़ी मांगते हुए आगे से न करने का वादा करना. हर रात उसी एक दिन की गतिविधियों के आकलन से शुरू होती है जो चलते-चलते अतीत तक पहुँच जाती है. अच्छी बातों के ऊपर गलत बातों का साया फैलता दिखाई देने लगता है. कब तक, कितनी बार, किस-किस से प्रायश्चित किया जाये? प्रत्यक्ष से, अप्रत्यक्ष से, चेतन से, अचेतन से, जीवित से, मृतक से न जाने किस-किस से ऐसा करना होता है, किया जा रहा है. इसके बाद भी खुद में हार जैसा, खुद में असफल होने जैसाएहसास बराबर बना रहता है. पता नहीं अन्दर से ऐसी कौन सी शक्ति विश्वास को बढाए रहती है, आत्मविश्वास को कमजोर नहीं होने देती है अन्यथा खुद के हार कर, टूट कर बिखरने में कोई कमी समझ नहीं आती है. पता नहीं कब तक ऐसा होता रहेगा?



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वंदेमातरम्

22 नवंबर 2020

बचपन के साथी से दिल की बातें कहने का मन है

बचपन के उन दिनों में समझ न थी कि डायरी लेखन क्या होता है? डायरी लिखने के नाम पर क्या लिखा जाता है? शैतानी, मस्ती, मासूमियत भरे उन दिनों में बाबा जी ने हम भाइयों को एक दिन डायरी देते हुए डायरी लेखन को प्रोत्साहित किया. पहले तो कुछ समझ ही नहीं आया कि क्या लिखना होगा इसमें. बाबा जी हम लोगों को खेल-खेल में बहुत सी जानकारियाँ देते रहते थे. घर के अलावा सुबह की सैर के समय भी बहुत सी व्यावहारिक जानकारियाँ, पढ़ाई से सम्बंधित जानकारियाँ बाबा जी हम तीनों भाइयों को देते थे. उस दिन डायरी हाथ में लिए खड़े थे और एक-दूसरे का मुँह देख रहे थे. ग्यारह-बारह वर्ष की हमारी अवस्था में डायरी लेखन जैसा नया सा शब्द सामने आ गया. पहले तो लगा कि कोई पढ़ाई जैसा काम होगा मगर जब बाबा जी द्वारा डायरी लेखन के बारे में, उसमें क्या लिखना है, कैसे लिखना है आदि समझाया गया तो बिना एक पेज, एक शब्द लिखे डायरी लेखन कलात्मक समझ आया.


नई-नई डायरी मिली थी, नया-नया काम मिला था सो पहले दिन ही रात को सोने के पहले कुछ लिखा गया. अब तो ठीक-ठीक याद भी नहीं कि उस रात लिखा क्या था डायरी में मगर दूसरी सुबह बाबा जी को दिखाकर यह पुष्टि करनी चाही थी कि जो लिखा है वो सही है या नहीं. बाबा जी की तरफ से शाबासी मिली तो डायरी लिखने की तरफ रुझान बढ़ा. समय गुजरता रहा, लेखन का शौक था ही तो डायरी लेखन भी साथ-साथ चलता रहा. आरम्भिक वर्षों में नियमितता नहीं बन सकी थी, लेखन भी उसी बालसुलभ मानसिकता से भरा हुआ था. क्या खेला, स्कूल में क्या किया, किसके साथ शरारत की, स्कूल से घर वापसी में क्या-क्या शैतानियाँ सड़क पर की गईं, किसके साथ मारपीट हुई, किसके साथ लड़ाई की आदि-आदि घटनाएँ डायरी में सजती रहीं.




स्कूल से निकल कर हम कॉलेज आ गए और डायरी लेखन का शौक भी कुछ परिपक्वता प्राप्त करने लगा था. उन्हीं दिनों हॉस्टल में किसी दिन डायरी गायब कर दी गई. नितांत व्यक्तिगत विधा होने के बाद भी डायरी पढ़ी गई, बवाल मचा और अंततः डायरी को फाड़ कर फेंक देना पड़ा. उस एक घटना ने बहुत आहत किया और कई वर्षों तक डायरी का लिखा जाना नहीं हो सका. डायरी भले न लिखी जा रही थी मगर मनोभावों को किसी न किसी रूप में लिखते रहते. कभी कविताओं के रूप में लिखते तो कभी लेख के रूप में. कभी-कभी मन करता तो किसी कागज़ पर लिख कर उसे पढ़ते और फिर फाड़कर  रद्दी में बदल देते. कुछ वर्षों बाद फिर डायरी लेखन शुरू किया मगर कुछ समय बाद उस लेखन को भी फट जाना पड़ा. मन के भाव मन में ही कैद रहने लगे.


समय के साथ तकनीक ने अपनी करवट बदली, उसके साथ-साथ बहुत कुछ बदल गया. इसी बदलाव में ब्लॉग सामने आया. मानो मन के विचारों को पंख मिल गए हों. अब खूब लिखा जाने लगा. इसके बाद भी कागज-कलम की संगत से मोह न छूटा. डायरी के रूप में न सही बल्कि अन्य रूपों में मनोभावों का लिखना होता रहा. अब फिर मन कर रहा है डायरी लिखने का. कागज़-कलम के साथ अपनी दोस्ती को और आगे ले जाने का साथ ही तकनीकी मित्र ब्लॉग को भी साथ में लेकर सफ़र करने का. डायरी लेखन से या कहें कि मन के भावों को प्रकट कर देने से बहुत शांति मिलती है. दिमागी उथलपुथल को भी बहुत आराम मिलता है. देखा जाये तो खुद में भी एक तरह की शक्ति का आभास होता है. ऐसा शायद इसलिए होता होगा क्योंकि डायरी लेखन ईमानदारी माँगती है और कोई व्यक्ति अपनी पूरी ईमानदारी से अपना सत्य लिख रहा है तो वह अपने को ही मजबूत कर रहा है.


लिखना तो बराबर होता रहा है, इसलिए लेखन का संकोच कतई नहीं है. विचारों की लहरें फिर उछाल मार रही हैं डायरी लेखन के लिए. अपने बचपन के साथी के साथ फिर से यात्रा करने की इच्छा है. उसके साथ फिर अपने दिल की, अपने मन की बातें कहने का, बाँटने का मन है.


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30 अगस्त 2020

दिन भर उमड़ते विचार रात को चले जाते सोने

पूरे दिन अनेक-अनेक विचार दिमाग में चलते रहते हैं. लगता है कि लिखने बैठा जाये तो न जाने कितना लिख जाए. दिन भर तमाम और कामों की उठापटक में बहुत ज्यादा समय नहीं मिल पाता तो लिखना कम ही हो पाता है. अब जबकि रात को लिखने बैठते हैं, फुर्सत से तो दिमाग एकदम साफ़ नजर आने लगता है. ऐसा लगता है जैसे दिन भर के उठे तमाम विचार सोने चले गए हों. ऐसा नहीं कि शारीरिक रूप से अथवा मानसिक रूप से किसी तरह की थकान हो मगर इसके बाद भी ऐसा क्यों हो जाता है, पता नहीं. 

कहीं यह भी कोरोना काल में बहुत लम्बे समय से घर में घुसे रहने का नकारात्मक असर तो नहीं? बहरहाल, इसका भी निदान करना ही पड़ेगा.  


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#हिन्दी_ब्लॉगिंग

06 जून 2020

दो खुराकें सब सही कर देंगी

आज मन कुछ उदास सा है. क्यों है ऐसा पता नहीं, बस कुछ करने का मन नहीं कर रहा. कुछ कर भी रहे हैं तो लग रहा जैसे सबकुछ यंत्रवत ही करना पड़ रहा है. इस अनमने मूड के चलते आज  कुछ विशेष भी नहीं किया जा सका. पूरा दिन बेकार ही निकला. सुरक्षात्मक कदमों के चक्कर में कदम घर के बाहर न निकाले और शाम भी ऐसी न थी कि कुछ करने को प्रेरित करती. आज पूरे दिन में न कुछ पढ़ा गया और न ही कुछ लिखा गया. इसी न लिखने, न पढ़ने, मूड सही न होने के कारण आसपास एक उदासी सी महसूस हो रही है.



इस उदासी को दूर करने के लिए गाने भी सुने जा रहे मगर वे भी इस समय रसीले समझ न आ रहे. गाने, संगीत हमारे साथ बहुत आरंभिक दिनों से रहा है. रेडिओ के साथ भी बहुत शुरुआत से बना रहा. बाद में हॉस्टल जाने पर भी इसका साथ न छूटा. आज भी सुबह आँख खुलने के बाद पहला काम रेडिओ का शुरू करना होता है. विविध भारती अपने रंग के साथ हमारे साथ रंग बिखेरती है. उसका यह रंग बिखेरना देर रात तक चलता रहता है.

पर आज कुछ समस्या है. शायद दिमाग में कोई केमिकल लोचा हो गया है. संभव है यह सुबह उठने के बाद ठीक हो. ऐसा होगा भी क्योंकि किसी भी तरह की परिचित समस्या हमें एक-दो घंटे से ज्यादा परेशान नहीं कर पाती है, यहाँ तो समस्या का नामोनिशान नहीं. बस मूड सही नहीं. सोचा इसी को लिखा जाये, शायद कुछ सही हो क्योंकि ऐसा होता है अक्सर हमारे साथ कि परेशानी को, मूड ख़राब को लिख दो तो कुछ देर बाद सब सही हो जाता है. कागज़-पेन का सहारा लेकर कुछ लिख चुके हैं. अब इस माध्यम से भी लिख दे रहे हैं. ये दो खुराकें सब सही कर देंगी.

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#हिन्दी_ब्लॉगिंग

11 मई 2020

लेखन में एक अधूरापन अभी भी है

लॉकडाउन ने अतीत में विचरण करने के लिए समय ही समय दे दिया है. यह भी एक तरह की टाइम मशीन है. इसके सहारे आज आसानी से अतीत में जाकर वर्तमान में आ जाते हैं. न किसी काम का प्रतिबन्ध, न किसी के टोके जाने की आशंका, न किसी कार्यक्रम को पूरा करने की बाध्यता. इसी टाइम मशीन के द्वारा विचरण करते-करते आज पहुँच गए अपने ही ब्लॉग में. टहलते-टहलते अपनी पाँच सौवीं पोस्ट पर जाना हुआ. 2010 की उस पोस्ट को पढ़कर लगा नहीं कि दस साल बाद आज स्थिति कुछ सुधरी है. संभव है कि आप लोगों को ऐसा कुछ महसूस न हो मगर हमें तो ऐसा ही लगा.


उस पोस्ट में भी कोशिश थी सबकुछ सही करने की, इसमें भी उसी बात का दोहराव ही है. एक कोशिश फिर से, सबकुछ सही करने की. उस 500वीं पोस्ट के मुकाबले ये 1758वीं पोस्ट है. फ़िलहाल तो आप लोग उस पोस्ट को भी पढ़िएगा.


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यह हमारी पांच सौवीं पोस्ट है। पिछले ढाई वर्ष के ब्लॉग सफर में कुछ खट्टे और कुछ मीठे पल सामने आये। कुछ ने परेशान किया और कुछ ने हैरान किया, हां सहयोग करने वाले स्वर भी दिखाई दिये। कहा जाये तो पिछले ढाई वर्षों का सफर मजेदार रहा, बहुत कुछ सीखने को मिला।

पांच सौ पोस्ट लिखने के बाद भी एक अधूरापन सा है। अभी भी लगता है कि जो लिखने अथवा जो करने की चाह में ब्लॉग संसार में आये थे वह पूरा नहीं हो सका है। अपने इस लेखन के दौरान कई बार लगा कि अब ब्लॉग लेखन को बन्द कर दिया जाये। ऐसा क्यों लगा इसके पीछे कई कारण रहे। समाज का ढांचा यहां भी अपनी पूर्ण उपस्थिति देता दिखा। समाज की कलुषित चालबाजियां, बयानबाजियां, भेदभाव, दोषारोपण आदि-आदि सब कुछ यहां भी दिखाई दिया।

इनके साथ-साथ गाली-गलौज वाली स्थितियां भी दिखाई दीं, पोस्ट चोरी करने की स्थिति भी दिखी। लोगों का आपसी तनाव इस हद तक दिखा कि यदि कम्प्यूटर के बाहर मिलना सम्भव हो पाता तो शायद मारपीट की नौबत आ जाती, या फिर इससे भी आगे जाकर जो स्थिति बन सकती थी वो बनती। इन सब घटनाओं और हालातों ने मन को उचाट कर दिया।

कुछ दिनों ब्लॉग लेखन बन्द कर दिया पर फिर हिन्दी भाषा के लिए, साहित्य के लिए कुछ करने की सोच कर वापसी भी की किन्तु हम इस तरफ भी कुछ नहीं कर पाये। आज आंकड़े के रूप में संख्याबल को 500 पर पहुंचा दिया किन्तु अभी बहुत कुछ करना बाकी है। प्रयास तो आगे यही रहेगा कि कुछ सार्थक किया जाये। रोजमर्रा के हालात तो ऐसे हैं कि इन पर कितना भी लिखो किन्तु लोगों के कान में जूं रेंगने से रही। अपने को क्यों परेशान किया जाये, बस वही लिखा जाये जो सार्थक हो और समाजोपयोगी हो।

आगे प्रयास तो यही रहेगा, बाकी तो आगे तय होगा।


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06 मई 2020

हमारी ब्लॉगिंग तीरंदाजी के बारह वर्ष

लॉकडाउन की हड़बड़ में यही भूल गए कि अभी दो-तीन दिन पहले हमारे ब्लॉग का जन्मदिन निकल गया. वो तो आज बिटिया रानी के जन्मदिन की पूर्व संध्या पर चलने वाली तैयारियों के चलते याद आ गया. हमने अपना ये ब्लॉग मई माह के आरम्भ में बनाया था किन्तु पहली पोस्ट 4 मई को लिखी थी, वर्ष 2008 में. उसी वर्ष, उसी माह 7 तारीख को हमें कन्या-रत्न प्राप्त हुआ. इसी मई में ब्लॉग और बिटिया दोनों बारह वर्ष के हो गए. तबसे से लेकर आज वर्ष 2020 तक की बारह साल की ब्लॉग-यात्रा अनेक अनुभवों से समृद्ध कर गई है. अनेक अनुभव मधुर हुए और अनेक अनुभव तो बहुत ही बुरे रहे. बुरे अनुभवों की पोटली बनाकर हमने अपने घर के पास बहते नाले में फेंक दी है. उनके द्वारा जो सीखना था, वो उसी समय सीख लिया था. अब बस अच्छा ही अच्छा अनुभव करते हैं.


इस अच्छे में एक बात हमें अपने आपमें बहुत सुकून देती है कि हमने ब्लॉगिंग का भरपूर तरीके से आनंद उठाया, आज तक उठा रहे हैं. उन दिनों जबकि हमने ब्लॉगिंग आरम्भ की तो पहले-पहल तो समझ से बाहर ही रहा कि लिखने वाली पोस्ट को लोगों तक कैसे भेजा जाये? अपना ब्लॉग सबके बीच ले जाने की तृष्णा के चलते कई-कई सामूहिक ब्लॉग से भी जुड़ना हुआ. इसमें भी कई बार खूब जूतम-पैजार हुई. ऐसी स्थिति में कई बार हमने ही ब्लॉग छोड़ दिया और कई बार हमें ही भगा दिया गया. इन सबमें भी खूब मजा आने लगा था.

इसी मजे में खुद अपना लिखा अपने अन्य परिचितों को पढ़वाने के लिए अनेक मित्रों के, परिजनों के ब्लॉग बनवाए. लोगों को खूब प्रेरित किया ब्लॉग बनाने को, लिखने को. कुछ तो गधे से घोड़े बन गए मगर कुछ गधे के गधे बने रहे. हमारे ऐसे मित्र आज भी उसी गधे की श्रेणी में पड़े हैं, हमारा ब्लॉग देख-पढ़ लेते हैं मगर खुद लिखने का कष्ट नहीं उठाते. बहरहाल, बिना किसी की सहायता के अपना ब्लॉग बना लेने के बाद, उसका सञ्चालन उचित ढंग से करने का अनुभव होने के बाद ब्लॉग बनवाने में, पोस्ट लिखवाने में खुद को तीरंदाज समझने लगे थे. सो खूब तीर मारे. आज भी मार रहे हैं. अभी इसी माह दो लोगों को ब्लॉग जगत में खींच कर लाये मगर वही ढाक के तीन पात, उन लोगों ने ब्लॉग बना लिए मगर उस पर लिखना शुरू नहीं किया. जल्द ही उनको भी इसका चस्का लगवाते हैं.


जब ब्लॉगिंग करते-करते काफी समय बीत गया, ब्लॉग एग्रीगेटर्स के चलते लोगों की पहुँच हमारे ब्लॉग तक हो गई, हमारी पहुँच दूसरों के ब्लॉग तक हो गई तो बहुत से लोगों ने ब्लॉग बनाने के लिए हमसे संपर्क किया. उसी में आज भी एक अनुभव बहुत अच्छे से याद है. एक बुजुर्ग महिला ने कई-कई दिनों तक देर रात फोन के माध्यम से ब्लॉग बनाने के बारे में, पोस्ट लिखने के बारे में जानकारी ली. हर बार वे बड़े ही स्नेह से आशीर्वाद देतीं. आज वे खूब सक्रिय हैं और कई-कई ब्लॉग के द्वारा साहित्यिक, सामाजिक लेखन में रत हैं.

इसी कई-कई ब्लॉग में याद आया, उस समय हमें ब्लॉगिंग करते कुछ महीने ही हुए होंगे. ब्लॉग बनाने, लिखने के बारे में समझ आ गया था. एक-दो सामूहिक ब्लॉग से भी जुड़ गए थे. एग्रीगेटर से भी सहारा मिल गया था. इसके बाद भी कुछ विषयों में बड़ा संशय रहता था. हमें लगता था कि विषयवार अलग-अलग ब्लॉग बनाये जाने चाहिए, जिससे लोगों को अपने मन का ही पढ़ने की सुविधा हो. हमारा मानना था कि ऐसा किये जाने से जहाँ पाठकों की संख्या बढ़ेगी और लोगों को भी अपने विषय से इतर अन्य पोस्ट देखने की जहमत नहीं उठानी पड़ेगी. इसकी चर्चा एक दिन हमने किसी पोस्ट के द्वारा करते हुए लोगों की राय माँगी. उसमें मिली कई-कई टिप्पणियों में एक टिप्पणी आजतक नहीं भूली. किसी ने कहा कि एक ब्लॉग पर ही अलग-अलग लेवल बनाकर लिखिए. अलग-अलग ब्लॉग बनायेंगे तो आप अखबार बन जायेंगे. खुद को समेटना मुश्किल हो जायेगा.

उस समय हम नए-नए ब्लॉगर बने थे सो किसी वरिष्ठ की सलाह को, राय को स्वीकारते हुए अनेक ब्लॉग बनाने का विचार त्याग दिया. इसके बाद भी हमारा मानना आज भी यही है कि यदि विषयवार अलग-अलग ब्लॉग बनाये जाएँ, उन पर सम्बंधित पोस्ट को लिखा जाये तो निश्चित ही उसका प्रसार अधिक होगा. कहते हैं न कि बारह साल बाद तो घूरे के दिन बदल जाते हैं, सो सोच रहे कि अपने विचार के दिन बदल कर देख लें. वैसे ब्लॉग पोस्ट के हिसाब से भले न अनेक ब्लॉग बनाये हों मगर अलग-अलग प्रकृति के हिसाब से अनेक ब्लॉग अवश्य बनाये.

फिलहाल तो आगे क्या करेंगे, क्या नहीं कहा नहीं जा सकता किन्तु अभी यही कह सकते हैं कि ब्लॉगिंग आज भी रोज करते हैं, आने वाले समय में भी रोज करते रहेंगे.

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आप सभी को यह बताने का लोभ संवरण नहीं हो पा रहा कि यह पोस्ट हमारे इस ब्लॉग की 1753वीं पोस्ट है. पहली ब्लॉग पोस्ट से इस ब्लॉग को बारह वर्ष 04 मई को हुए. उस दिन लिखी गई पोस्ट इस ब्लॉग की 1751वीं पोस्ट थी. (क्लिक करिए और देखिये, क्या है ब्लॉग-जन्मदिन पर)

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#हिन्दी_ब्लॉगिंग

16 अप्रैल 2020

ब्लॉगिंग पुनर्जीवन की उठती गिरती राहें

इंटरनेट पर एक समय वो था जबकि ब्लॉग की हनक दूर-दूर तक सुनाई पड़ती थी. बहुत सारे लोग अपनी पूरी सक्रियता, ऊर्जा के साथ ब्लॉग जगत का चमकता सितारा बने हुए थे. रोज ही किसी न किसी विषय पर पोस्ट. कभी गंभीर जानकारी तो कभी हास्य की फुहार. कभी कोई तकनीकी विषय का ज्ञान तो कभी कला, संस्कृति का दृश्य. खबर, जानकारी, ज्ञान, शिक्षा, चिकित्सा, कला, विज्ञान, खेल, पाककला, खेल, साहित्य आदि-आदि सहित क्या-क्या न था ब्लॉग संसार में. नियमित लिखने वाले भी थे, अनियमित लिखने वाले भी थे. नए लोगों को प्रोत्साहित करने वाले सक्रिय लोग भी थे तो बस अपने में ही सिमटे रहने वाले कुछ गुमसुम लोग भी थे. कुछ विद्रोही स्वभाव वाले ब्लॉगर थे तो कुछ अत्यंत सहज, सरल अंदाज वाले. सबके बीच एक अनाम सा रिश्ता बना हुआ था. उस समय भी समय में राजनीति होने के बाद भी आपस में राजनीति नहीं थी.


इस हँसते-खेलते ब्लॉग संसार के साए में सोशल मीडिया के अन्य दूसरे मंच सजने लगे. वे धीरे-धीरे पल्लवित, पुष्पित होने लगे. जो पौधे ब्लॉग जगत की विराट भूमि के पार्श्व में उग रहे थे वे एक दिन जबरदस्त वटवृक्ष बनकर उसी ब्लॉग जगत को डसने लगे. ब्लॉग जगत के अनियमित लोग तो जैसे गायब ही हो गए, आश्चर्य ये हुआ कि नियमित लेखन वाले ब्लॉगर भी आराम से किनारा करने लगे. इस किनारा कर चुके, लगभग समाप्त से दिखते ब्लॉग संसार में पुनः प्राण-प्रतिष्ठा करने का बीड़ा कुछ वरिष्ठ ब्लॉगर ने उठाया. ऐसा इसलिए क्योंकि ऐसे बहुत से लोग अपने भीतर की उस कसक को पूरी तरह से मिटा नहीं सके थे जो ब्लॉग संसार की चमक धूमिल करने से उपजी थी. ब्लॉग लेखन के प्रति उनकी आंतरिक चेतना लगातार काम करती रही और यही कारण रहा कि ऐसे लोग व्यस्तता के बाद भी ब्लॉग लेखन से अलग नहीं हुए. व्यस्तता के बीच वे खुद को ब्लॉग से जरा सा अलग करते हुए सोशल मीडिया के अन्य दूसरे मंचों पर दिखाई देने लगे. ब्लॉग संसार की छवि का धूमिल होते जाने और सोशल मीडिया के दूसरे मंचों के आलोकित होते जाने के अपने कारण है, वे अलग चर्चा का विषय हैं.

समय की कमी की दुहाई देते बहुत सारे वरिष्ठजनों को लॉकडाउन ने जैसे समय तो दिया ही, ब्लॉग जगत को पुनः चमकाने के लिए वरदान सा दे दिया. सोशल मीडिया के जिन मंचों ने ब्लॉग जगत की चमक को छीनने का काम किया उसी के सहारे पुनः ब्लॉग जगत को चमकाने की कोशिश की जाने लगी. पहले प्रयास में सबकी सक्रियता या कहें शाब्दिक उत्साह देखकर लगा कि ब्लॉग जगत अपनी पुरानी प्रतिष्ठा को प्राप्त कर लेगा. इस आशा के साथ-साथ जिस तरह की आशंका को महसूस किया जा रहा था, कई साथियों ने इसके बारे में चर्चा भी की, वह आशंका भी निर्मूल न रही. सबसे पहले हम, सिर्फ हम ही हम जैसी मानसिकता के चलते बौद्धिकता को सबके ऊपर हावी करने का कदम बढ़ाया गया. अनावश्यक रूप से विमर्श किया जाने लगा. जिस ब्लॉग जगत की चमक वापस लाने का संकल्प आपस में लिया गया, उसके पहले ही सब मिलकर आपसी संबंधों की चमक को मिटाने लगे.

बहरहाल, वरिष्ठजन संकल्पित हैं. हम जैसे नवांकुर सीखने की ही स्थिति में हैं. देखने की स्थिति में हैं. देखते हैं कि जो कदम उठे हैं, वे कहाँ तक जाते हैं? ब्लॉग जगत की चमक को कितना लौटा पाते हैं?

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#हिन्दी_ब्लॉगिंग

14 अप्रैल 2020

ब्लॉगर पर ब्लॉग बनाना सीखें

ब्लॉग जगत के वरिष्ठ और सक्रिय साथियों द्वारा एक बार फिर ब्लॉग जगत को उसकी पुरानी रौनक लौटाने का प्रयास किया जा रहा है. इस सम्बन्ध में बहुत से पुराने साथियों के साथ-साथ कुछ नए साथियों में भी उत्साह देखने को मिल रहा है. अपने ऐसे नए साथियों के लिए ब्लॉगर पर ब्लॉग बनाये जाने का तरीका यहाँ चित्र के माध्यम से प्रस्तुत कर रहे हैं. वैसे तो इंटरनेट पर अनेक वेबसाइट और ब्लॉग पर ब्लॉग बनाने के वीडियो, चित्र उपलब्ध हैं इसके बाद भी सहयोग भाव से यह पोस्ट उन नए साथियों के लिए जो ब्लॉग जगत से जुड़ने की अभिलाषा रखते हैं. आशा है कि आप नए साथियों को अवश्य ही मदद मिलेगी.

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#हिन्दी_ब्लॉगिंग



















यदि ब्लॉग बनाने में किसी तरह की समस्या आये तो कृपया टिप्पणी में अपनी समस्या से अवगत करा सकते हैं अथवा kumarendra.com@gmail.com पर हमें मेल कर सकते हैं. 

ब्लॉग बनाने वाले सभी साथियों से अनुरोध है कि ब्लॉग बनाने के बाद अपनी पहली पोस्ट तुरंत ही लिखें और हमें लिंक भेजकर अवश्य ही अवगत कराएँ. आपका ब्लॉग जगत में स्वागत करने को हम तत्पर हैं.

11 अप्रैल 2020

ब्लॉग जगत की प्रकृति भी निखरेगी लॉकडाउन में

चीनी वायरस कोरोना के चलते देशव्यापी लॉकडाउन ने सभी को पर्याप्त समय उपलब्ध करवाया है. बाहरी कामकाज से फुर्सत वर्षों बाद नसीब हुई है, ऐसे में बहुतायत लोग इस समय का सदुपयोग अपने शौक के साथ करने में लगे हैं. (उनमें से एक हम भी हैं.) बहुत से लोग, जिन्हें पढ़ने का शौक है और अत्यधिक काम के बोझ के चलते इस तरफ ध्यान नहीं दे पा रहे थे, वे अब अपना समय पढ़ने में बिता रहे हैं. इस समय का सभी लोग अपनी तरह से उपयोग करने में लगे हैं. अच्छा भी है क्योंकि खाली दिमाग शैतान का घर कहा जाता है. इस खाली समय में कुछ पुराने ब्लॉगर साथी पुनः सक्रिय हुए हैं ब्लॉग की उजड़ी सी दुनिया को पहले की तरह गुलजार करने के लिए. यद्यपि पहले भी इसके लिए कई प्रयास, कई साथियों द्वारा किये गए तथापि समय की कमी या कहें कि आपसी समन्वय की कमी से प्रयास फलीभूत नहीं हो सके. इस बार ब्लॉगिंग की जिस महकती दुनिया को जिस सोशल मीडिया मंच ने आकर उजाड़ने जैसा काम किया, आज उसी के बीच से रास्ता बनाकर आगे बढ़ने का विचार बनाया गया है.



सोशल मीडिया के आने के पहले ब्लॉगिंग पर ही बहुत सारा समय बीता करता था. ब्लॉग एग्रीगेटर के द्वारा तमाम सारे नए-पुराने ब्लॉग एक जगह पढ़ने को मिल जाया करते थे. इससे भी बहुत सारी मेहनत बच जाया करती थी. गुलज़ार, महकती उस दुनिया के बीच अचानक से सोशल मीडिया का आगमन हो गया. अचानक से जैसे विचाराभिव्यक्ति का एक ऐसा मंच प्रकट हुआ जहाँ सबको, सबकुछ अपनी आँखों के सामने होता नजर आया. संभवतः ब्लॉग में ऐसी सुविधा प्रत्यक्ष तौर पर नहीं थी और इसी बिंदु के कारण ब्लॉग जगत के बहुत से साथी इस दुनिया से दूसरी चकाचौंध वाली दुनिया में प्रवेश कर गए. वहाँ आपस में खूब बहस, खूब हंगामा, खूब तर्क-वितर्क होते नजर आने लगे. एक-एक पोस्ट पर अनेकानेक टिप्पणियाँ दिखाई देने लगीं. पोस्ट लेखक के अलावा कई-कई अन्य लोग भी ऐसी बहसों में हिस्सा लेने लगे. इसके बाद भी ब्लॉग जगत के सशक्त मित्रों, समर्पित साथियों के मन में कहीं न कहीं एक कसक सी बनी रही.


उसी कसक के चलते ब्लॉग जगत से उनका पूरी तरह से जाना नहीं हो सका. किसी ने अपनी नियमित उपस्थिति को साप्ताहिक बना लिया तो कोई नियमित की जगह अनियमित हो गया. बहुत से लोग ऐसे भी रहे जिन्होंने ब्लॉगिंग से मुँह ही मोड़ लिया. खैर, अब जबकि सोशल मीडिया के ही मंच का उपयोग करके अपनी ब्लॉगिंग दुनिया को फिर से महकाने की कवायद चल पड़ी है तो आशा की जा सकती है कि वो रुकेगी नहीं. लॉकडाउन के खाली समय का सभी साथी, जो ब्लॉग जगत से जुड़े हुए हैं, जो ब्लॉग जगत से जुड़ना चाहते हैं, सदुपयोग कर सकते हैं. लॉकडाउन ने देश की आर्थिक व्यवस्था को चरमरा दिया हो मगर उसके द्वारा प्रकृति को बहुत बड़ी संजीवनी मिली है. जगह-जगह से उसके खूबसूरत दृश्य पुनः देखने को मिलने लगे हैं. कामना यही कि इस लॉकडाउन में ब्लॉग जगत की प्रकृति भी निखरेगी. पुराने खूबसूरत पल पुनः देखने को मिलेंगे.

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