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23 अप्रैल 2021

एक निवेदन मददगार साथियों से

इधर कोरोना वायरस की दूसरी लहर, जैसा कि ऐसा कहा जा रहा, के आने के बाद से लोगों पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है. ऐसे में बहुत से लोगों को आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाएँ नहीं मिल पा रही हैं. लोग मदद के लिए परेशान हैं. कोई दवाओं के लिए परेशान है तो कोई ऑक्सीजन के लिए. ऐसी स्थिति में हमारे बहुत से मित्र सोशल मीडिया की सहायता से जरूरतमंद लोगों की भरपूर सहायता, सहयोग कर रहे हैं. सभी साधुवाद के पात्र हैं.  


एक निवेदन है सभी से, जो पोस्ट किसी की सहायता के लिए लगाई गई है, यदि उसके द्वारा मदद हो चुकी है अथवा बहुत दिन हो चुके हों तो उस पोस्ट को डिलीट कर दिया करें. पोस्ट बने रहने से वह किसी नये सदस्य के सामने से गुजरती है तो वह संवेदना के साथ सम्बन्धित पोस्ट पर मदद, सहयोग की अपील/प्रयास करने लगता है, जबकि उस पोस्ट के द्वारा मदद पहले ही हो चुकी है. ऐसी स्थिति में कई लोगों को अनावश्यक परेशानी होती है साथ ही ऐसी स्थिति किसी के साथ दो-तीन बार होने पर वह सहायता के लिए आगे आना बंद कर देता है.


मदद के लिए लिखी ऐसी पोस्ट का कोई दीर्घकालिक लाभ भी नहीं. ऐसी स्थिति में वे भविष्य में अन्य लोगों के लिए संशय तो पैदा कर ही सकतीं हैं साथ ही अनावश्यक रूप से इंटरनेट स्पेक्ट्रम की जगह को घेरे रहेंगीं.


एक निवेदन और कि जिस पोस्ट के द्वारा मदद मिल जाए तो उस पोस्ट के स्क्रीनशॉट के साथ इस बारे में अवश्य सूचित कर दिया जाए ताकि सहयोग में लगे सुधिजन उस ओर से निश्चिंत हो सकें.


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वंदेमातरम्

06 फ़रवरी 2012

मौसमी पाण्डेय को जिताने में आपके सहयोग की अपेक्षा है


फेसबुक पर अत्यधिक सक्रिय और गायन में प्रतिभाशाली आवाज़ और हुनर की धनी मौसमी पाण्डेय को जिताने के लिए आप सभी से निवेदन है+++++++++++++



http://www.inextlive.com/iktara/videos/Mousmi-Pandey-_-iktara-super-16-finalist-Week-1

इस लिंक पर जाकर लाइक करें और साथ ही साथ SMS के द्वारा भी अधिक से अधिक वोट करके उसको जिताने में अपना सहयोग करें.....

अपने मोबाईल में सन्देश लिखें icontest LKO2661 और भेज दें 57272 पर

19 जुलाई 2010

एक निवेदन --- इस ब्लॉग का नाम भी सुझाएँ और रचनाएं भी पढने का समय निकालें




इधर एक ब्लॉग बनाया है, अपनी साहित्यिक रचनाओं के लिए इसमें कहानी, कविताएँ, लघुकथाएं, ग़ज़ल आदिसाहित्यिक रचनाएं आपको पढने को मिलेंगी


(चित्र साभार गूगल छवियों से)


पिछले दिनों कुछ रचनाएं पोस्ट की थीं, उनको पसंद भी किया गया। इस समय उस ब्लॉग पर अपनी कहानी "कतरा-कतरा ज़िन्दगी" को क्रमिक रूप में पोस्ट किया जा रहा है।

आप सभी की उस ब्लॉग पर भी आमद चाहते हैं साथ ही एक अनुरोध भी है

अभी ब्लॉग का कुछ नाम नहीं सूझ रहा था सो उस ब्लॉग का नाम रख दिया है "कुछ मेरी कलम से" यह नाम हमें खुद पसंद नहीं आ रहा है। (एक तो शब्द मेरी के कारण और दूसरा मन को भा नहीं रहा है यह नाम)। आप लोगों से निवेदन इसी सन्दर्भ में है कि इस ब्लॉग का नाम भी सुझा दें तो अच्छा रहेगा

आशा है कि आप सभी लोग मदद करेंगे और उस साहित्यिक ब्लॉग (जो हमारी रचनाओं के साथ है) को भी देखने का अवसर निकालेंगे?


07 मार्च 2010

भारतीय हाकी मैदान पर तो हारी किन्तु दर्शकों का स्नेह, विश्वास जीती

हाकी में भारत की पाकिस्तान पर विजय के बाद लगातार तीसरी हार हुई। हम हारे और सेमीफाइनल में पहुँचने के रास्ते भी बन्द करवा बैठे। इंग्लैण्ड के हाथों मिली हार के बाद निराश हुआ जा सकता है किन्तु यदि इस पूरे आयोजन को गहराई से देखें तो हमें बहुत वर्षों बाद भारतीय हाकी की विजय दिखाई देगी।


जी हाँ, यह सही है कि टूर्नामेंट के स्कोर-बोर्ड पर हम अवश्य ही हार चुके हैं किन्तु राष्ट्रीय खेल को स्थापित करने की भावना में हम विजयी अवश्य और अवश्य ही हुए हैं। अरसे बाद देश की जनता को क्रिकेट के बाद पहली कार किसी अन्य खेल के लिए स्टेडियम में इकट्ठा होते और चिल्लाते देखा है। इस तरह की खेल भावना को देखकर लगा कि शायद राष्ट्रीय खेल हाकी पुनः जीवन पा सके?

हमारी याददाश्त में यह पहला मौका है जब कि खिलाड़ियों के अलावा फिल्मी हस्तियों, नामचीन व्यक्तित्वों ने हाकी मैच को देखने और भारतीय हाकी टीम का समर्थन करने की अपील की है। इस कारण से या फिर कोई अन्य दूसरे कारण रहे हों किन्तु दर्शक टी0वी0 पर भी जुटे और स्टेडियम पर भी धमाल मचाने पहुँचे। यह वाकई बहुत बड़ी विजय है।

मैदान पर हम हारे हैं, इसका गम तो है किन्तु दर्शकों के स्नेह और उत्साह को बरकारार रखना होगा ताकि हमारा राष्ट्रीय खेल हमें बापस मिल सके।

एक निवेदन उन सभी से जो गला फाड़-फाड़ कर बाघ बचाने की, कागज बचाने की, पानी बचाने की अपील कर रहे हैं, कि वे अब देश के राष्ट्रीय खेल के लिए उठी जनता के विश्वास और स्नेह को बचाने के लिए भी अपना आन्दोलन चलाने लगें। हो सकता है कि उनको इस आन्दोलन मे मुनाफा न हो किन्तु देश हित में कभी कोई काम बिना मुनाफे की आशा के भी करना चाहिए।

बाघ बचाने वालों ने तमाम सारी अपीलों के बाद लेख पर लेख लिखकर एक दो बाघ तो बचा ही लिये होंगे? तो फिर आइये, अब हम जैसे छोटे से ब्लागर और एक आम भारतीय की छोटी सी बिना मुनाफे वाली अपील पर भारतीय हाकी को, उसकी खोई हुई इज्जत को बचाने के लिए छोटा सा, थोड़ा सा प्रयास करना शुरू कर दें। हो सकता है कि आप सभी के प्रयासों से हम पुनः हाकी ओलम्पिक स्वर्ण पदक विजेता हो सकें, विश्व कप विजेता बन सकें?

क्या हम आशा करें कि आप सब हाकी को बचाने के लिए प्रयास करेंगे?

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चित्र गूगल छवियों से साभार

30 दिसंबर 2009

नए वर्ष के पहले ये संकल्प कर लें

हालांकि नये वर्ष की शुभकामनाओं का आदान-प्रदान तो कल के बाद शुरू होना चाहिए, इस कारण आज किसी को शुभकामनाएँ नहीं।
हाँ, आप सभी से आग्रह है, निवेदन है
नये वर्ष में विमर्श के नाम पर किसी विवाद को जन्म न देने का।
अपने दिलों से दूसरों के प्रति नफरत का भाव न आने देने का।
सबके प्रति प्रेम, स्नेह का भाव बनाये रखने का।

शायद कठिन कार्य है......इसीलिए आज ही निवेदन है। कल का पूरा दिन और रात के बारह बजे तक का समय है विचार करने के लिए। सोचिएगा कि आज के समाज को किस बात की सबसे अधिक आवश्यकता है?
कल रात के बाद से नये संकल्प के साथ नये वर्ष की शुरुआत करिएगा। ऐसा होगा न!!!!


07 अप्रैल 2009

सवाल-जवाब करना है तो वोट करें

हम तो इस चुनाव में वोट नहीं डालेंगे। क्या करेंगे वोट डाल कर? किसे दें सब तो एक जैसे हैं? डल गया वोट, कोई एक हमारे वोट से ही तो कोई मंत्री या सरकार तो बननी नहीं है? ये जुमले आजकल चुनावों में आम हों गये हैं। चुनाव की सरगर्मियाँ पूरे जोरों पर हैं और लोगों में मतदान को लेकर अभी से विभिन्न प्रकार के विचार बन-बिगड़ रहे हैं।
यह बात तो सत्य है कि वर्तमान परिदृश्य में राजनीति का माहौल बद से बदतर होता जा रहा है। आम आदमी और भला आदमी तो चुनावों से कोसों दूर होता जा रहा है। इसी राजनैतिक दूरी का परिणाम है कि बुरे लोगों का राजनीति में पदार्पण हो रहा है। यह तो सीधा सा सिद्धान्त है कि किसी भी खाली कुर्सी को कोई न कोई भरेगा, यदि भले लोग नहीं भरेंगे तो उस कुर्सी पर बुरे लोगों का कब्जा हो जायेगा।
एक बात तो सौ फीसदी सत्य है कि संसद हो या विधानसभा (यदि कार्यकाल सही ढंग से चलता रहे तो प्रति पाँच वर्ष में इनकी सभी सीटों को भरा जायेगा) अपनी सीटों को भरने के लिए विवश है। अब भले लोगों का इस ओर रुझाान नहीं है तो ये सदन किससे अपनी सीटों को भरें?
इस बार हर ओर मतदान करने को लेकर जागरूकता कार्यक्रम और अन्य फुटकर साधन अपनाये जा रहे हैं। यह सही भी है कि यदि किसी तरह की अनिवार्यता नहीं सामने आ रही है तो मतदान अवश्य ही करना चाहिए। यह भी सत्य है कि ‘एक नागनाथ, एक साँपनाथ, डसेंगे दोनों ही’ की तर्ज पर आज प्रत्याशी सामने दिखायी देते हैं। इस अनिश्चय वाली भीड़ में शायद एक चेहरा तो ऐसा होता ही होगा जो अपने व्यक्तित्व से प्रभावी रहता होगा? चलिए उसी को दे डालिए वोट।
वोट डालना इस कारण भी आवश्यक है क्योंकि हम बिना वोट किये कैसे अपने प्रतिनिधि या सरकार से सवाल-जवाब कर सकते हैं? जब हमने वोट ही नहीं दिया तो क्यों हम उनकी कार्यप्रणाली पर, उनके कुकृत्यों पर उँगली उठाते हैं। वोट इसलिए भी डालना है क्योंकि हमारे देश में औसत मतदान 46 से 48 प्रतिशत के बीच रह रहा है। अब एक पल को विचार करिए कि यदि मतदान पूरे पचास प्रतिशत हो जाये और पचास प्रतिशत लोग मत न दें तब क्या स्थिति बनेगी?
वोट देने वाले पचास प्रतिशत और उनमें भी माना कि दो ही प्रत्याशियों के बीच मुकाबला हो जाये। पचास प्रतिशत मत में से जीतने वाले को 26 प्रतिशत और हारने वाले को 24 प्रतिशत वोट मिलें। अब कुछ समझ में आया? जो व्यक्ति सत्ता पायेगा यानि की जीतेगा, उसे मिले केवल 26 प्रतिशत वोट और जो लोग मतदान से बाहर रहे वे थे 50 प्रतिशत। इसमें हारे वाले के 24 प्रतिशत भी मिला दें तो आँकड़ा क्या निकलेगा? 26 प्रतिशत वाला व्यक्ति शेष 74 प्रतिशत के ऊपर राज कर रहा है।
यह बात भी सत्य है कि लोकतन्त्र उस एक पल को ही आता है जब हम मतदान करने के लिए बूथ में खड़े होते हैं। मतदान करने के बाद किसकी सरकार बनवानी है, हमारा प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री कौन होगा, गठबंधन में कौन-कौन दल शामिल रहेंगे आदि तथ्य हमारी पहुच से दूर हो जाते हैं। लगातार अधिक से अधिक मतदान कर हम लोकतन्त्र को एक पल से भी अधिक देर के लिए बचा कर रख सकते हैं। गठबंधन की राजनीति, कम से कमतर होता मतदान प्रतिशत, भले लोगों का राजनीति से लगातार दूर होते जाना ही राजनैतिक हास का कारण है। यही कारण है कि इस देश में चालीस सांसदों का नेता प्रधानमंत्री बन जाता है, एक निर्दलीय विधायक मुख्यमंत्री बन जाता है, राज्यसभा सदस्य प्रधानमंत्री बनकर पाँच साल शासन करता है। क्या यह राजनैतिक विद्रूपता नहीं?
इसलिए कम प्रतिशत वाले को राज करने से रोकने के लिए, भले लोगों को पुनः राजनीति में स्थापित करने के लिए, अपना वोट देकर राजनेताओं से सवाल-जवाब करने के लिए मतदान अवश्य करें। अपने आपको प्रोत्साहित करिए तथा अन्य लोगों को भी प्रोत्साहित करिए।


चुनावी चकल्लस-

उनको गुमान है कि वो जीत लेंगे हमें,
हम लें शपथ कि सबक उन्हें सिखा देंगे,
धोखा कब तक खायेंगे हम, सोचो तो,
वोट की एक चोट से ताकत हम दर्शा देंगे।

19 फ़रवरी 2009

सहयोग का निवेदन - नए ब्लॉग के लिए

जबसे अपना ब्लाग बनाया है एस दिन से कुछ न कुछ नया करने का मन होता रहता है। ऐसा क्यों है पता नहीं? अपने कुछ मित्रों के कारण भी इस दिशा में कार्य करते रहने का मन करता है। हमारे पारिवारिक सदस्यों, शहर और शहर से बाहर के मित्रों के द्वारा और ब्लाग के साथियों द्वारा मिलते प्रोत्साहन द्वारा ब्लाग के क्षेत्र में कुछ नया करने का विचार आता रहता है। (अपने किसी साथी का नाम यहाँ नहीं दे रहे हैं क्योंकि सूची बहुत लम्बी है और...........चलिए)
ब्लाग संसार में अपना विचरण होता रहता है और साथ में एक प्रकार का प्रयोग भी होता रहता है। इसी प्रयोग और कुछ नया करने की श्रंखला में एक काम किया है जो समय आने पर आपके सामने होगा। एक काम जरूर आपके सामने रख रहे हैं, जिसके प्रेरणास्त्रोत निश्चय ही (यह हम बिना संकोच और झिझक के कह सकते हैं) श्री रविशंकर श्रीवास्तव ‘रविरतलामी’ हैं। उनके ब्लाग ‘रचनाकार’ को जबसे देखा है तबसे उसी तरह का कोई काम करने का विचार था। हालांकि पढ़े-लिखों की दुनिया में इसको नकल करना कहते हैं पर किसी भी अच्छे काम की नकल करना हमारी दृष्टि में बुरा काम नहीं है।
रचनाकार ब्लाग की तरह ही अपने कुछ मित्रों के साथ मिलकर एक ब्लाग ‘शब्दकार’ बनाया है। विचार तो यह है कि यह ब्लाग बिना किसी विवाद के और बिना किसी पूर्वाग्रह के आप सबके सहयोग से चलता रहे। यह इस कारण कहा जा रहा है क्योंकि ब्लाग पर आने की छोटी सी अवधि के दौरान ये समझ में आया कि यहाँ भी एक प्रकार की लामबन्दी है। हो सकता हो कि किसी को यह अच्छा न लगे पर हमारा शुरू सक यही विचार रहा है कि कम से कम प्रबुद्ध कहे जाने वालों को तो किसी प्रकार की लामबन्दी से बचना चाहिए। ब्लाग जहाँ हम सब किसी न किसी रूप में सबसे एक मशीन के द्वारा परिचित रहते हैं और फिर भी अपने अपने खांचे में बंधे रहने को विवश रहते हैं, क्यों?
बहरहाल, ब्लाग बना दिया है और आप सब सुधीजनों के सहयोग का इन्तजार है। अपनी और अपने मित्रों की रचनायें भेज कर इस ब्लाग के संचालन में मदद करें और हिन्दी भाषा के विश्वव्यापी स्वरूप को आगे लाने में सहायक बनें। यही हमारा आप सबसे आग्रह है...........धन्यवाद।

जिनका सहयोग टिप्पणियों के रूप में आज भी मिलता है, मिल रहा है। इस सबके प्रति आभार और शब्दकार के लिए सहयोग की उम्मीद। जिन सदस्यों ने एक-दो बार ही टिप्पणी की है उनके प्रति भी आभार और सहयोग की उम्मीद उनसे भी है।

Udan Tashtari
Anil Pusadkar
dr. ashok priyaranjan
संगीता पुरी
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
दिनेशराय द्विवेदी
mahashakti
makrand
शोभा