26 नवंबर 2018
देश तो आज भी खतरे में हैं
26 नवंबर 2009
06 अक्टूबर 2009
कंक्रीट के जंगल में कुछ सुखद क्षण
(मेरीन ड्राइव की सैर, पत्नी और बिटिया के संग)
इस बार मौका लगाया और परिवार सहित अपने मित्र सुभाष के साथ मुम्बई यात्रा पर निकल पड़े। यात्रा बड़े ही आराम से हुई। छुट्टियाँ कम होने के कारण मुम्बई का दो-तीन दिनों का कार्यक्रम था। यह भी विचार करना था कि मोहित (हमारे बहनोई) को भी अपने काम से ज्यादा छुट्टियाँ न लेनी पड़ें।
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(मित्र सुभाष, सफ़ेद शर्ट में; बहनोई मोहित, बहिन पूजा, पत्नी बच्ची को लिए गेट वे ऑफ़ इंडिया पर)
दो-चार जगह घूमे फिरे, मंदिर भी गये, समुद्र भी देखा। गेटवे आफ इंडिया को खड़ा पाया तो ताज होटल के घाव भी देखे। इसके अलावा माल संस्कृति का भी नजारा लिया। देश का सबसे बड़ा माल कहलाने वाले आरबिट में भी घूमा फिरी की। मुम्बई में भ्रमण के समय इमारतों का जंगल देखने को मिला। पुरानी भव्य इमारतें तो नई अत्याधुनिक तकनीक को दर्शातीं इमारतें। पत्थरों का कलात्मक प्रदर्शन तो काँच की सुंदर जगमगाहट।
(प्रसिद्द मॉल ऑर्बिट इसे देश का सबसे बड़ा मॉल कहते हैं)
समुद्र को बाँधते पुल, सड़कों का बोझ ढोते ओवर ब्रिज, घरों की नई परिभाषा रचतीं मल्टी स्टोरी बिल्डिंग्स, औद्योगीकरण, वैश्वीकरण का प्रदर्शन करते जगमगाते माल, दुकानें, भीड़ को अपने में समातीं लोकल ट्रेन और बसें, दौड़ते-भागते लोग, मशीनी जीवन आदि-आदि सभी कुछ यहाँ देखने को मिला। इस चकाचैंध के बीच असल जिंदगी भी दिखाई दी। झुग्गी-झोपड़ी में जीवन तलाशते लोग। भेलपूरी, पावभाजी, बड़ापाव आदि बेच कर अपना गुजारा करते लोग। लगा कि मुम्बई कंक्रीट का एक भव्य जंगल है जहाँ हर कोई अपने जीवन को गुजर-बसर के लिए ही जिये जा रहा है।
हाँ, ऐसे लोग भी हैं जो जीवन को जिन्दगी की तरह से जीते दिखे। अभावों से दूर, धन की, शानो-शौकत की जिन्दगी जीते लोग।
मुम्बई घूमना कम और अपने परिवार के एक अंग से मिलना ज्यादा था। नवी मुम्बई में बने उस निवास से भी प्रकृति का नजारा मन को बराबर लुभाता रहा। हरे-भरे पहाड़, छोटे-छोटे झरने, आसपास तैरते काले-काले बादलों ने एक पल को तो यह भी भुला दिया कि ये मुम्बई है।
(नवी मुंबई में घर के पास का प्राकृतिक दृश्य)
इसी तरह मुम्बई-पुणे एक्सप्रेस वे ने भी प्रकृति को बहुत ही पास से देखने का मौका दिया। खंडाला, लोनावला के आसपास स्थित हरे-भरे पहाड़, हाथ की पहुँच में तैरते बादल इस बात का आभास ही नहीं होने दे रहे थे कि हम मुम्बई में हैं।
27 नवंबर 2008
कहाँ छुपे हो राज ठाकरे??????
कल देर रात से एक ख़बर सभी चैनलों पर सभी के दिल की धड़कन को रोके है......................................
- मुंबई में देश का सबसे बड़ा आतंकी हमला...................
अभी तक हुए हमले में मारे गए लोगों की संख्या.............(ये संख्या बताने में हम असमर्थ हैं क्योंकि ये लगातार बदती ही जा रही है)
हमले में घायल हुए लोग ..................... (इसका भी हल मृत लोगों जैसा ही है, लगातार बढ़ रहे हैं) - आतंकवादी पाकिस्तान के हैं..................ऐसा उनके पास से मिले मोबाइल और कल बरामद हुए एक हैण्ड ग्रेनेड से ज्ञात हुआ..............
इसके अलावा और भी जो जानकारी है वो तो आपको समाचारों से पता चल ही रही होगी.................इस पोस्ट में ऐसा कुछ नहीं है जो इस आतंकी वारदात के बारे में बता सके. इत्तेफाक देखिये, आज सोचा था की कुछ बाल-साहित्य पर लिखा जायेगा क्योंकि यही एक ऐसा विषय है जिस पर कम से कम लिखा जा रहा है पर देखिये विडम्बना कि लिखना पड़ा कुछ अलग...................
फिलहाल पोस्ट पर आते हैं जैसा कि आप शीर्षक देख कर ही समझ गए होंगे कि ये अलग तरह की पोस्ट है........... वेंडरों को मारने वाले, टेक्सियों को तोड़ने और उनके चालकों को मारने वाले, निर्दोष, निरीह परीक्षार्थियों की बेरहमी से पिटाई करने वाले, उत्तर भारतीयों को अपना निशाना बनाने वाले, भैया लिखा केक काट कर अपनी नफ़रत दर्शाने वाले, आमची मुंबई का नारा बुलंद करने वाले, मुंबई हमारी है किसी के बाप की नहीं के पोस्टर लगाने वाले........................और भी बहुत कुछ मुंबई के लिए और उत्तर भारतीयों के विरोध में करने वाले राज ठाकरे और उनके कार्यकर्ता अब कहाँ हैं???????????????
- मनसे कहाँ है????????
- अब उनकी मुंबई क्या उनकी मुंबई नहीं है???????
- सैकड़ों की संख्या में मरने वालों के लिए उनकी आंखों में आंसू नहीं हैं???????
- शहीद होने वाले पुलिस और जंग करती सेना के साथ गोली खाने के लिए उनके सीने कहाँ हैं??????????
- इसी तरह वे लोग कहाँ हैं जो सोते-जागते पाकिस्तान प्रेम का राग आलापते हैं???????
- वे लोग अब क्या कहेंगे जो इस्लामिक आतंकवाद को हिन्दुओं के दिमाग की उपज बताते हैं????????
- वे लोग अब खामोश क्यों हैं जो अकारण ही कांग्रेस को शांतिप्रियता लाने वाली सरकार बताते हैं??????
- इस तरह से हुए हमले के लिए कौन जिम्मेवार है???????
- महाराष्ट्र सरकार अब खामोश क्यों है????????
- आतंकवादी कितनी आसानी से मुंबई में घुस आए और सुरक्षा एजेंसी किस अंधेरे में खोईं रहीं????
बहुत कुछ है इस पर कहे जाने को पर अभी मौका नहीं है.........................अब देखना है कि पकडे कितने आतंकवादी जाते हैं????? हमारे देशवासी किस हद तक अपने लोगों को खोते हैं?????? सरकार (केन्द्र और राज्य की) किस हद तक तत्परता दिखाती हैं??????? सवाल बहुत हैं पर अभी जवाब का इंतज़ार नहीं अभी तो ग़म के आंसू हैं, सिसकियाँ हैं, रुंदन है............


