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21 जून 2020

संयोग भरा दिन है इस वर्ष 21 जून

सुनते हैं कि आज संयोग बना है नौ सौ साल बाद कि पाँच ग्रह एक समान रेखा में हैं. यह संयोग सूर्य ग्रहण के समय बन रहा है. यह भी अपने आपमें एक अचरज कहा जायेगा कि इस वर्ष सबसे अधिक समय तक रहने वाला सूर्य ग्रहण होने जा रहा है. लगभग छह घंटे तक रहने वाले इस सूर्य ग्रहण ने सबसे बड़ा दिन भी चुना है. इस खगोलीय घटना को देखने का कौतूहल सभी में होगा, होना भी चाहिए क्योंकि ऐसे पल बहुत कम देखने को मिलते हैं. हमारे समय की पीढ़ी इस तरह के अनेक सुखद संयोग देख चुकी है. ये दुखद भी है कि हमारी पीढ़ी ने दुखद घटनाओं, संयोगों को भी देखा-सहा है. इसमें कोरोना वायरस जैसी आपदा, चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदा को गिना जा सकता है. 


इस सुखद खगोलीय घटना के साथ-साथ इस दिन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस भी है. यह योग दिवस पूरे विश्व में मनाया जाता है. संयुक्त राष्ट्र संघ में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रस्ताव के बाद इसे मनाया जाना आरम्भ किया गया. योग की महत्ता को न केवल इस देश ने पहचाना बल्कि उसका अनुसरण सम्पूर्ण विश्व ने किया. आज कोरोना काल में योग के द्वारा और आयुर्वेद के द्वारा बहुत से लोगों को जीवन मिला है. निश्चित ही ये कदम भारत देश को विश्व गुरु बनने के रास्ते पर ले जाने वाले हैं.

चलिए, सुबह सूर्य ग्रहण का दर्शन किया जायेगा इसके साथ ही नियमित रूप से किये जाने वाले व्यायाम और योगाभ्यास से भी संपर्क बनाये रखा जायेगा. सभी को सुखद संयोग देखने का अवसर मिले, ऐसी कामना है. ऐसा इसलिए क्योंकि बहुत सी जगहों पर बादलों के होने के कारण इसमें अवरोध आने की आशंका जताई जा रही है.

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#हिन्दी_ब्लॉगिंग

21 जून 2019

एक दिनी योग की औपचारिकता से क्या लाभ


बड़े ही जोर-शोर से योग दिवस मनाया गया. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की ये व्यक्तिगत सफलता कही जाएगी कि उन्होंने अपने प्रयासों से भारतीय योग को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करवा दिया. संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से इस सम्बन्ध में प्रतिवर्ष 21 जून को योग दिवस मनाये जाने सम्बन्धी प्रस्ताव पारित किया गया. इसके बाद देश में सरकारी, गैर-सरकारी रूप से योग दिवस मनाये जाने के कदम जोर-शोर से उठाये जाने लगे. ऐसे लोग योग दिवस के लिए तत्पर रहने लगे जो पूरे साल एक पल को भी योग से अपना सम्बन्ध नहीं रखते रहे हैं. ऐसे योग से क्या फायदा? 


इस वर्ष भी सरकारी स्तर पर आदेश जारी किये गए जिसमें सभी को योग के लिए अपने-अपने संस्थानों में एकत्र होना था. क्या एक जगह एकत्र होने के बाद किये गए योग से वाकई योग को प्रोत्साहन मिलेगा? जिस व्यक्ति का पूरे साल योग से कोई लेना-देना न रहता हो वो एक दिन योग की कोई गतिविधि करके योग का क्या लाभ ले सकेगा? बेहतर हो कि योग से सम्बंधित नौटंकी करने के उन्हीं को योग के लिए आमंत्रित किया जाया करे जो वाकई योग के प्रति सचेत रहते हैं.

22 जून 2016

योग और राजनीति

भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा संयुक्त राष्ट्र संघ में 27 सितम्बर 2014 को अपने भाषण के दौरान 21 जून को विश्व योग दिवस के रूप में मनाने की अपील की गई थी. संयुक्त राष्ट्र संघ ने उनकी अपील को गंभीरता से लेते हुए अपने इतिहास के सबसे कम समय (90 दिन) में प्रस्ताव को पूर्ण बहुमत से पारित करके 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाये जाने की अनुमति प्रदान की. सैकड़ों देशों के द्वारा इस प्रस्ताव का समर्थन करने वाले देशों में 40 से अधिक मुस्लिम देशों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था. इनमेंअफगानिस्तान, ईरान, ईराक, बांग्लादेश, यमन, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, सीरिया आदि जैसे देश शामिल थे. संयुक्त राष्ट्र संघ में प्रस्ताव पास हो जाने के बाद 21 जून 2015 को प्रथम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया. इस अवसर पर 192 देशों और 47 मुस्लिम देशों में योग दिवस का आयोजन किया गया. दिल्ली में एक साथ 35985 लोगों ने योग का प्रदर्शन किया, इसमें 84 देशों के प्रतिनिधि मौजूद थे. इस अवसर पर भारत ने दो विश्व रिकॉर्ड बना 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में अपना नाम दर्ज करा लिया. पहला रिकॉर्ड एक जगह पर सबसे अधिक लोगों के योग करने का बना, तो दूसरा एक साथ सबसे अधिक देशों के लोगों के योग करने का. अनुमान तो नहीं था मगर देश में कई जगह इसका विरोध किया गया. कई मुस्लिम संगठनों द्वारा विरोध किया गया तो कई भाजपा-विरोधियों, मोदी-विरोधियों द्वारा इस दिवस का विरोध किया गया था. विरोध के बाद भी देशभर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को लेकर जबरदस्त उत्साह दिखा था. विरोध और समर्थन के बीच दूसरा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस इस वर्ष भी मनाया गया. 



योग का विरोध करने वालों को जानना-समझना होगा कि योग किसी धर्म विशेष का धार्मिक क्रियाकलाप नहीं है जिसे जबरन किसी दूसरे धर्म, सम्प्रदाय आदि पर थोपा जा रहा हो. योग तो अनादिकाल से भारतीय संस्कृति का हिस्सा रहा है, जिसके द्वारा शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने की  प्रवृत्तियों का पालन किया जाता रहा है. योग शब्द युज समाधौआत्मनेपदी दिवादिगणीय धातु में घञ्प्रत्यय लगाने से निष्पन्न होता है. इस प्रकार योग शब्द का अर्थ हुआ समाधि अर्थात् चित्त वृत्तियों का निरोध. वैसे योग शब्द युजिर योगतथा युज संयमनेधातु से भी निष्पन्न होता है किन्तु तब इस स्थिति में योग शब्द का अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ तथा नियमन होगा. योग को विभिन्न दर्शनों में अलग-अलग रूप में परिभाषित किया गया है.

(1) पातंजल योग दर्शन के अनुसार योगश्चित्तवृत्त निरोधः अर्थात् चित्त की वृत्तियों का निरोध ही योग है.
(2) सांख्य दर्शन के अनुसार पुरुषप्रकृत्योर्वियोगेपि योगइत्यमिधीयते अर्थात् पुरुष एवं प्रकृति के पार्थक्य को स्थापित कर पुरुष का स्व स्वरूप में अवस्थित होना ही योग है.
(3) विष्णु पुराण के अनुसार योगः संयोग इत्युक्तः जीवात्म परमात्मने अर्थात् जीवात्मा तथा परमात्मा का पूर्णतया मिलन ही योग है.
(4) भगवदगीता के अनुसार सिद्दध्यसिद्दध्यो समोभूत्वा समत्वंयोग उच्चते अर्थात् दुःख-सुख, लाभ-अलाभ, शत्रु-मित्र, शीत और उष्ण आदि द्वन्दों में सर्वत्र समभाव रखना योग है.
(5) भगवदगीता में ऐसा भी कहा गया है कि तस्माद्दयोगाययुज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम् अर्थात् कर्त्तव्य कर्म बन्धक न हो, इसलिए निष्काम भावना से अनुप्रेरित होकर कर्त्तव्य करने का कौशल योग है.
(6) बौद्ध धर्म के अनुसार कुशल चितैकग्गता योगः अर्थात् कुशल चित्त की एकाग्रता योग है.

स्पष्ट है कि योग आधुनिक समाज की संकल्पना नहीं है वरन भारतीय संस्कृति में अनादिकाल से इसका अंग बना हुआ है. इसके बाद भी जिस तरह से इसका विरोध किया जा रहा है उससे ऐसा लगता है जैसे योग केंद्र सरकार अथवा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का एजेंडा है और वे इसे जबरन लागू करवाना चाह रहे हैं. अनेक राजनैतिक संगठनों और अनेक मुस्लिम संगठनों द्वारा मोदी के नाम पर मुस्लिम समाज में एक तरह का भय पैदा किया जा रहा है. वे इस बात को स्थापित करना चाहते हैं कि योग के द्वारा भाजपा अथवा मोदी सम्पूर्ण राष्ट्र को भगवामय कर देना चाहते हैं. ये समझने का विषय है कि यदि योग के द्वारा भगवाकरण का प्रचार-प्रसार किया जाता तो फिर उसको संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा अनुमति कैसे मिलती? कैसे मुस्लिम राष्ट्रों की तरफ से प्रस्ताव को समर्थन मिलता? समझना होगा कि योग एक तरह का विज्ञान है जो वर्तमान समय में व्यस्तजीवन शैली में संतोष प्रदान करता है. योग से न केवल व्यक्ति का तनाव दूर होता है बल्कि मन और मस्तिष्क को भी शांति मिलती है. योग दिमाग, मस्‍तिष्‍क को ताकत पहुँचाने के साथ-साथ आत्‍मा को भी शुद्ध करता है. 



यहाँ हास्यास्पद स्थिति ये है कि देश में वेलेंटाइन डे के नाम पर अथवा अन्य पश्चिमी दिवसों पर भव्य आयोजन बिना किसी विवाद के सहजता से संपन्न कर लिए जाते हैं. लाखों-करोड़ों रुपयों का अपव्यय कर दिया जाता है. आयोजन-संस्कृति के नाम पर शराब, शबाब, कबाब आदि का खेल हो जाता है. ऐसे-ऐसे आयोजनों के बाद भी न तो स्वास्थ्य की चिंता जैसी स्थिति सामने आती है न ही ऐसे आयोजनों में मजहबी भावनाओं का आहत होना दिखाई देता है. ये सबकुछ विगत वर्ष से योग के नाम पर ही सामने आने लगा है. विरोध करने वालों को इस तथ्य पर ध्यान देना होगा कि संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा विविध तरीकों से लगभग 180 से अधिक दिवसों का आयोजन वैश्विक स्तर पर किया जाता है. इनमें से कितने दिवसों का विरोध देश में होता है. सोचने वाली बात ये है कि कहीं विरोध का कारण ये तो नहीं कि भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहे योग के वैश्विक आयोजन करवाने का सेहरा भाजपानीत केंद्र सरकार अथवा देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सिर बंध गया? यदि ऐसा है तो विरोध करने वाले किसी भी रूप में देशहित जैसी संकल्पना के पक्षधर नहीं.