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15 सितंबर 2011

रानी की हाँ में हाँ, राजा की हाँ में हाँ -- माइक्रो पोस्ट


आज जैसे ही देश के सबसे बड़े परिवार की मुखिया ने देश की सबसे पुरानी पार्टी की बैठक ली...एकदम से तमाम मुर्दों से मंत्रियों में और चापलूस वक्ताओं की जुबानों में हरकत होने लगी...
सब वाह वाह कह उठे, कि अब आ गया तारणहार...

बड़े-बड़े कद्दावर नेताओं की, योग्य व्यक्तियों की इस कदर चापलूसी देखकर कुछ पंक्तियाँ याद आ गईं...गौर फरमाएँ...

"राजा ने कहा रात है,
रानी ने कहा रात है,
प्रजा ने कहा रात है,
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ये सुबह-सुबह की बात है.



चित्र गूगल छवियों से साभार

30 जुलाई 2011

लोकतान्त्रिक तानाशाही -- माइक्रो पोस्ट




लोकतान्त्रिक देश में सरकार की तानाशाही फिरसे दिखी. कई बार तानाशाही दिखाने वाली सरकार ने हाल में अपने लगभग हर कदम से खुद के तानाशाह होने का प्रमाण दिया है. बाबा रामदेव के अनशन पर हमला, भ्रष्टाचार के मामलों पर शांति, उत्तर-प्रदेश के हालातों पर मूक समर्थन...और भी बहुत कुछ है..


चित्र गूगल छवियों से साभार


इधर लोकपाल विधेयक का सरकारी प्रारूप पास करवा कर सरकार ने सिद्ध कर दिया कि वो जो चाह लेती है वो कर के ही मानती है. अन्ना के साथ बैठक करने का ड्रामा, जनता के सामने सशक्त विधेयक लाने का ढोंग..सब कुछ मात्र दिखावा ही रहा.

अब आगे देखते हैं कि सदन में लोकपाल विधेयक का क्या होता है पर अभी तो हमारी सरकार ने समूचे विश्व समुदाय के सामने जाहिर कर दिया है कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में तानाशाही सरकार बनी हुई है.



01 जुलाई 2011

भ्रष्टाचार के समर्थन और विरोध का मुद्दा --- माइक्रो पोस्ट


क्या भ्रष्टाचार का विरोध करना देश द्रोह के समान है? ऐसा लग रहा है क्योंकि पहले भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बाबा का आन्दोलन कुचला गया अब अन्ना को सबक सिखाने की धमकी दी जा रही है.

चित्र गूगल छवियों से साभार

इसके मायने हैं कि केंद्र सरकार भ्रष्टाचार का समर्थन कर रही है या फिर बाबा-अन्ना आतंकवादी सरीखे हैं या फिर देश में भ्रष्टाचार जैसा कोई मुद्दा ही नहीं है और बाबा-अन्ना बेकार का ड्रामा कर रहे हैं.

सरकार जो कर रही है वो उसका कदम है पर सरकार की बातों के साथ हाँ में हाँ मिलाते लोगों को समझना चाहिए कि बाबा-अन्ना ने जो मुद्दा उठाया है क्या वो गलत है? यदि नहीं तो भले ही इन व्यक्तियों का न करें पर मुद्दे का समर्थन तो करें ही.


07 अप्रैल 2011

अन्ना के लिए बदल दिया हमने नारा -- माइक्रो पोस्ट


"अन्ना तुम संघर्ष करो,
हम तुम्हारे साथ हैं।"

इस नारे को अन्ना के आन्दोलन के बाद हमने कुछ इस रूप में बदला है

"अन्ना तुम राह दिखाओ,
हम संघर्ष को तैयार हैं।"

10 अगस्त 2010

प्राकृतिक कहर के बाद कुछ सोचा है या नहीं? --- एक माइक्रो पोस्ट




पिछले तीन-चार दिनों की विश्वव्यापी घटनाओं पर नजर दौड़ायें तो आसानी से दिख रहा है कि प्राकृतिक प्रकोप लगभग समूचे विश्व पर छाया है। इस जगह पर घटनाओं का विस्तार और विश्लेषण मायने नहीं रखता क्योंकि सभी कुछ मीडिया के द्वारा दिखाया जा रहा है।

(चित्र गूगल छवियों से साभार)

सवाल है कि क्या मानव इस तरह के विश्वव्यापी प्राकृतिक कहर के बाद भी सँभलेगा अथवा नहीं?
क्या वह प्रकृति का इसी तरह अँधाधुंध दोहन करता रहेगा?
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पोस्ट लिखना मकसद नहीं बस थोड़ा सा जगाना चाहते हैं।

01 अगस्त 2010

अपने गुलाम होने का एहसास मरने न दीजिये --- इसे जिन्दा रखना ही चाहिए




आज कई दिनों बाद ब्लॉग संसार में या कहें कि इंटरनेट पर लौटना हुआ। कुछ बिजली के कारण और कुछ अन्य दूसरी व्यस्तताएँ।

इधर कई दिनों से समाचार-पत्रों में, इलैक्ट्रॉनिक चैनलों के द्वारा कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों की छीछालेदर की जा रही है। (एकबारगी हमें लगा कि कहीं मीडिया हमारे छीछालेदर रस को न ले उड़े)

(चित्र गूगल छवियों से साभार)


तैयारियाँ कैसी चल रहीं हैं, कैसी होनी चाहिए थीं, क्यों सही ढंग से नहीं हो रहीं, कौन जिम्मेवार है आदि-आदि विषयों को आधार बनाकर मीडिया अपने लिए मसाला खोज रही है।

इन सबके बीच आज से और अभी से नहीं बहुत पहले से मन में प्रश्न उभरते रहे हैं कि आखिर हम कॉमनवेल्थ गेम्स में भाग क्यों लेते हैं? क्यों हम इन पर अपना कीमती धन और समय बर्बाद करते हैं? क्या सिर्फ इस बात को याद रखने के लिए कि हम कभी गुलाम थे?

हम तो अभी तक इन प्रश्नों का उत्तर नहीं खोज सके यदि आप लोग हमारी मदद कर सकें और सही राय दे सकें तो हमारे लिए, हमारी छोटी सी खोपड़ी की सेहत के लिए अच्छा रहेगा।


03 जून 2010

ब्लॉग पर दंगल की शुरुआत --- माइक्रो पोस्ट




इंटरनेट पर ब्लॉगिंग की सर्वप्रथम शुरूआत करने वाले का क्या मकसद रहा होगा ये तो पता नहीं पर ये जरूर पता है कि ये तो नहीं रहा होगा जो आजकल दिख रहा है।

इन सब बातों पर ध्यान दिये बिना इसपर ध्यान दें तो आपका भी फायदा हो सकता है। चूके तो गये।


चित्र गूगल छवियों से साभार

ब्लॉग पर दंगल की शुरूआत जल्द होने जा रही है। गुटबाजी अब खुलकर दिख रही है। प्रधानी के चुनावों की तरह यहाँ भी कोई कुर्सी दिखने लगी है।

बहरहाल अब कुछ भी लिखने के पहले इस होने वाले दंगल पर ध्यान दें। आप भी शामिल हों........दंगल में शामिल होने की शर्तें और नियम जल्दी ही लेकर आपके सामने आयेंगे।

ये तो अभी सूचनार्थ है।

25 मई 2010

काश हमें भी कोई विधायक, सांसद बना दे अथवा बनवा दे




रोज-रोज की बिजली पानी की चकचक देखकर हालत खस्ता हो जाती है। अधिकारियों को फोन करो तो मोबाइल बजता ही रहता है पर कोई उठाता नहीं है। सारे अधिकारियों को आदेश हैं कि सरकारी मोबाइल बन्द किये जायें सो वे बन्द तो नहीं करते हैं पर उठाते भी नहीं हैं।

एक बिजली की समस्या का ही रोना नहीं है आम आदमी से सम्बन्धित जितने भी विषय हो सकते हैं उन सभी में समस्या ही समस्या है। आप ट्रेन ही देख लो, आम आदमी ज्यादा है सफर में तो बस दो या चार डिब्बे। बस को देख लो, हालत ऐसी कि खुद बदहाली ही शरमा जाये। सड़कों को देखो तो लगता है कि धूल में सड़क है, गड़्ढों में सड़क है।

खाने-पीने का सामान देखो तो लगता है कि यदि आमरण अनशन किया जाये तो ज्यादा अच्छा है। खाना भी बचेगा और कुछ कुछ नाम होगा। आये दिन इसी बात में सिर खपाना पड़ता है कि अब फलां दाल बनाओ इसके दाम गिर गये हैं, फलां फल खाओ, इस समय सस्ता है आदि-आदि।

इन समस्याओं से न जूझने वाला भी एक वर्ग है................जी हाँ नेताओं वाला, विधायकों-सांसदों वाला, मंत्रियों वाला।


(चित्र गूगल छवियों से साभार)

अब असली बात, मुद्दे वाली बात इस पोस्ट की कि काश हमें भी कोई विधायक, सांसद बना दे अथवा बनवा दे।

(यहाँ तो लड़ाई मुख्यमंत्री बनवाने-बनाने को लेकर मची हुई है, हमें एक जरा सा विधायक या सांसद नहीं बनवाया जा सकता है।)


13 मई 2010

फाँसी बनी गले की फाँस

कसाब को फाँसी, कोली को फाँसी....अब और कोई बचा है? नहीं बचा? चलो कोई बात नहीं...।

देशवासी फैसले आने के बाद प्रसन्न दिखे किन्तु मन में कुछ इसी तरह के विचार उभरे। अब देखिये कि कब तक फाँसी होती है? अभी तो पहले के 29 बकाया हैं, भले ही राष्ट्रपति जी के पास विचाराधीन हैं।


(चित्र गूगल छवियों से साभार)

आपको क्या लगता है कि कसाब इतना भोला है कि वह अपनी याचिका राष्ट्रपति जी के पास नहीं पहुँचायेगा? उसे मालूम है कि इस देश के लोग इतने सहिष्णु हैं कि उन पर यह कहावत बिलकुल फिट होती है कि सौ-सौ जूते खायें, तमाशा घुस के देखें। हम कसाब की अर्जी को राष्ट्रपति जी के पास भी पहुँचायेंगे और फिर इन्तजार के पलों में उसकी खातिरदारी भी करेंगे। क्यों कर नहीं रहे हैं, अफजल गुरु की?

फाँसी फाँस बनकर हम भारतीयों के गले में अटकी है, अब इंतजार है कि कब इन कसाइयों की गर्दन में फँसती है।


23 अप्रैल 2010

हंगामा ही रहता है बरपा, संसद सत्र है जब चलता...


देश की संसद में इस समय आई0पी0एल0 को लेकर हंगामा मचा हुआ है। पिछले सत्र में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर हंगामा मचा हुआ था। अब पता नहीं कि अगले सत्र में किस बात पर हंगामा हो?

देखने में आया है कि अब संसद में लगभग पूरे सत्र किसी एक ही बिन्दु, किसी एक ही विषय पर चर्चा होती रहती है। (क्षमा करें, इसे चर्चा के स्थान पर पढें कि बहस, हंगामा होता रहता है।)


(चित्र गूगल छवियों से साभार)

देश की शासन-सत्ता चलाने वाले क्या देश की जनता के खून पसीने की कीमत को पहचानना भूल गये हैं? करोड़ों रुपयों के संसद सत्र में दो टके की भी चर्चा नहीं की जाती और किसी एक के चेहरे पर भी शर्म की लकीर तक नहीं दिखाई देती है।

इसे देश का दुर्भाग्य कहने के साथ-साथ जनता के हितों के साथ किया गया मजाक नहीं तो और क्या कहा जाये?


07 अप्रैल 2010

लिव इन रिलेशनशिप और विवाहपूर्व यौन सम्बन्ध बनाने की वकालत करने वाले इन सवालों के जवाब दें


माइक्रो पोस्ट --- ज्वलंत विषय पर --- उनके लिए जो वकालत करते फिर रहे हैं सहजीवन, लिव इन रिलेशनशिप की, विवाह पूर्व यौन सम्बन्ध की सार्थकता की

कुछ सवाल हैं, कृपया सवालों के जवाब देने के लिए ही टिप्पणी करियेगा, अन्यथा हमें टिप्पणी क्षमा सहित निकालनी होगी।

क्या आपने विवाहपूर्व यौन सम्बन्ध बनाए थे?
क्या आप आज भी शादी के बाद किसी और से शारीरिक सम्बन्ध बनाए हैं?
आपके बच्चों (बेटी-बेटा) के द्वारा इस तरह के सम्बन्ध बनाए जाने पर आपको ख़ुशी महसूस होगी?

आपको ज्यादा परेशानी नहीं हो इस कारण बिना अधिकार के भी ये तीन सवाल पूछ डाले. अभी तीन के जवाब ही तो दे दीजिये...............

सवाल स्त्री-पुरुष दोनों के लिए ही हैं.............महिलायें सिर्फ अपने लिए ही न समझें.....






22 मार्च 2010

"स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है"


दृश्य देखिये इस लोकतंत्र का----------------

एक जिला ---- जालौन
विधायक ----- चार
विशेष ----- इसमें तीन राज्य सरकार दल बहुजन समाज पार्टी के हैं।

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सांसद ---- चार
लोक सभा से एक
राज्य सभा से तीन

विशेष ------ राज्यसभा से मनोनीत तीनों सांसद बहुजन समाज पार्टी के हैं

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स्थानीय निकाय से विधान परिषद् सदस्य भी बहुजन समाज पार्टी से जनपद जालौन के
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विशेष के बाद वास्तविकता
सडकों की हालत बुरी नहीं बहुत ही बुरी,
बिजली की समस्या विकट ही नहीं महाविकट और विकराल,
पानी के हाल से जनता बेहाल, कोई नहीं पुरसाहाल

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इस पर याद आता है बहुत पुराना दूरदर्शन का सन्देश....

"
रुकावट के लिए खेद है"

अथवा ये वाक्य

"स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है"


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शायद इसे माइक्रो पोस्ट कह सकते हैं????

20 फ़रवरी 2010

मिट्टी के माधौ ने शेरों को दिखाए दाँत


मिट्टी के माधौ ने मिट्टी की सहायता से शेरों को दांत दिखाए भारतीय क्रिकेट टीम की जीत आपको क्या असली दिखी? वही स्पिन का जादू, वही पिच की कारीगरी।
अरे! ये हमारे शेर (जो मीडिया के द्वारा बनाए जाते हैं कभी गीदड़ तो कभी शेर) क्या अपनी कारीगरी से जीतने का दम रखते है?
चलो जश्न मनाएं, कम से कम हम यहाँ तो नंबर एक हैं......
हिप-हिप हुर्रे, हिप-हिप हुर्रे, हिप-हिप हुर्रे......

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चित्र गूगल छवियों से साभार

23 जनवरी 2010

आइये संकल्प लें - नेताजी सुभाषचंद्र बोस कि गरिमा के विरुद्ध कोई कार्य न करेंगे



हम नेताजी सुभाषचंद्र बोस को आदर्श माने, उनके कार्यों का अनुसरण करें, उनकी जीवटता से कुछ सीखें, नई पीढ़ी को उनका सम्मान करना सिखाएं, यही उनको सच्ची श्रद्धांजलि होगी
हो ये रहा है कि ये सब कुछ भुला कर हम उनकी मौत को विवाद बना कर उनके व्यक्तित्व का अपमान कर रहे हैं
आइये संकल्प लें कि ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे जो नेताजी सुभाषचंद्र बोस के गरिमामयी व्यक्तित्व के विरुद्ध हो

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चित्र गूगल छवियों से साभार
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पूरा लेख विस्तार से यहाँ से पढ़ा जा सकता है
दस्तावेज़
शब्दकार

22 जनवरी 2010

इस SMS में गलत क्या है??? माइक्रो पोस्ट

पिछले दिनों आई पी एल में जो कुछ हुआ वह पाकिस्तान के लिए बढ़िया सबक कहा जाएगा। कोई प्रसन्न हो या न हो पर हमें इस बात की ख़ुशी है कि कारोबारियों में पाकिस्तान को लेकर क्या विचार हैं।
(आखिर IPL भी एक तरह का कारोबार ही तो है)
इधर पाकिस्तानी खिलाडियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया उधर पाकिस्तान के वास्तविक हालातों पर एक SMS तुरंत आया। गौर फरमाएं.............................

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Meaning of PAKISTAN

P = Prem

A = Aman

K = Khushhali

I = Insaaf

S = Shanti

T = Tarakki

A = Ahinsa

N = NOT Available HERE...!!!

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क्या कुछ गलत है?


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चित्र यहाँ से लिया है

17 जनवरी 2010

समझ नहीं आता लोग पढना और देखना क्या चाहते हैं? माइक्रो पोस्ट


क्या आप सब में से किसी को भी ये लघुकथा (जोर से बोलो जिन्दाबाद) और मनोरंजन के लिए लगाए ये चित्र(हम भी करते हैं योग - जय बाबा रामदेव) बिलकुल पसंद नहीं आये?
कोई एक टिप्पणी तक नहीं, क्या किसी ने इन्हें देखा तक नहीं?
समझ नहीं आता लोग पढना और देखना क्या चाहते हैं?



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चित्र गूगल छवियों से साभार