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22 दिसंबर 2020

बॉल पेन की पहेली का समाधान

उस दौर में जबकि जीवनशैली एकदम सामान्य थी, न बहुत तामझाम, न बहुत चमक-धमक, न बहुत शोर-शराबा, उस समय कोई भी नई चीज अजूबा सी दिखाई पड़ती थी. आप लोगों से इस बारे में एक बार कायनेटिक होंडा स्कूटर के बारे में अपना मजेदार अनुभव शेयर कर ही चुके हैं. उस समय बचपना भी था जो आज के बच्चों की तरह नहीं था. उन दिनों के लोग, समाज, आसपास का परिवेश भी एकदम पारिवारिक हुआ करता था. खैर, बात इसकी नहीं, यहाँ आज बात एक अजूबे से पेन की. जी हाँ, पेन मगर फाउंटेन पेन नहीं बल्कि एक बॉल पेन की.


उन दिनों फाउंटेन पेन से ही लिखना हो रहा था. यदि बॉल पेन मिलता था तो एक शार्प का बॉल पेन आया करता था, पूरी बॉडी पारदर्शी होती थी और उस पर नीले रंग का ढक्कन लगा हुआ करता था. इसके अलावा एक और बॉल पेन का उपयोग हमें करने की याद है जो रंगीन (कोई एक रंग का) बॉडी का हुआ करता था. एक पेन कभी-कभी चाचा या पिताजी का, घर में उपयोग कर लेते थे, शायद Jotter पेन था. यह पेन ऊपर से क्लिक करके खुलता और बंद होता था. इनके अलावा बाजार में और भी अच्छे बॉल पेन हुआ करते थे मगर उन दिनों इतना जेबखर्च भी नहीं मिलता था कि हम खुद कोई पेन खरीद सकें. इसके लिए घर पर निर्भरता बनी हुई थी. ऐसे में बॉल पेन की माँग होने पर इन्हीं दो पेन की सहायता से आपूर्ति की जाती थी.




शायद कक्षा छह में होंगे, एक दिन हमारे मित्र अभिनव ने एक बॉल पेन दिखाया जो अभी तक हमारे द्वारा उपयोग किये गए पेन से एकदम अलग. खिलते हुए रंग में (था ये भी एक ही रंग का) बॉल पेन मगर उसमें कोई ढक्कन नहीं, न खींच कर खोलने के लिए, न चूड़ीदार. इसके ऊपर आमतौर पर देखी जाने वाली क्लिक बटन भी नहीं थी, जिसे चटर-पटर करके रिफिल निकाली जा सके, लिखा जा सके. इसमें ऊपर एक बटन जिसे दबाने से वह वहीं बने छेद में फँस जाती और रिफिल निकल आती. बाद में उसी को दबाने से रिफिल अन्दर चली जाती अर्थात पेन बंद हो जाता. यह बहुत अजूबा सा नहीं लगा. अजूबा इसमें रिफिल डालने-निकालने वाला सिस्टम लगा.


इस पेन में कहीं से भी ऐसी जगह नहीं दिख रही थी जिसे खोलकर उसमें से रिफिल निकाली जा सके, रिफिल डाली जा सके. यह हमारे लिए आश्चर्य की बात थी. अभिनव ने कहा कि ये बताओ कि इसमें रिफिल कहाँ से डलेगी? पेन के मामले में हम बचपन से ही नशेबाज जैसी स्थिति में रहे हैं. उससे कहा कि बस पाँच मिनट को पेन हमारे हवाले करो, अभी इसकी पूरी साइंस तुम्हारे सामने रखते हैं. ये तो मालूम था कि रिफिल इसमें डली है तो कहीं का कहीं से डाली ही गई होगी. उस समय तक हमारा सामना यूज़ एंड थ्रो पेन से नहीं पड़ा था, इसलिए ये समझते थे कि पेन फेंका नहीं जायेगा.


उस अजूबा से पेन को हमने अपने हाथ में लिया. दो-चार बार इधर-उधर पलता. दो-चार बार उसकी क्लिक बटन को दबाया. इसी में समझ आ गया कि इसमें रिफिल कहाँ से डाली जाएगी. बस एक झटके में उस क्लिक बटन के उस हिस्से को जो छेद में फँसता था, अँगूठे से दबाकर ऊपर खींच दिया. क्लिक बटन बाहर और उसी से रिफिल डालने की जगह बन गई. शायद कम्फर्ट कंपनी का बॉल पेन था वह. उस पेन के बाद उसके बहुत से पेन उसी तरह के निकले, खूब सारे पेन धीरे-धीरे करके इकट्ठे भी कर लिए गए जो समय के साथ काल-कलवित हो गए. एक बॉल पेन बचा रह गया जो बॉल पेन, फाउंटेन पेन की सफाई के दौरान मिला. उसे देखकर वे दिन फिर याद आ गए.


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वंदेमातरम्

30 अक्टूबर 2009

आप जानते हैं इस विचित्र पक्षी का नाम?

एक यात्रा के दौरान एक शहरी बाबू और एक ग्रामीण पास-पास बैठे थे। शहरी बाबू अपनी बातों से गाँव के लोगों को छोटा और कम बुद्धि वाला साबित कर रहे थे। बहुत देर से यह होता देखकर ग्रामीण से रहा नहीं गया।
उसने शहरी बाबू से कहा कि साहब हम गाँव के लोग भले ही कम पढ़े-लिखे होते हों पर अक्ल में किसी से कम नहीं होते।
शहरी बाबू को यह बात नागवार गुजरी। उन्होंने इसे साबित करने को कहा।
ग्रामीण ने कहा कि साहब आप हमारी एक पहेली का जवाब दे दो तो हम समझ जायेंगे कि शहर के लोगों से कम अक्ल वाले होते हैं गाँव वाले।
शहरी बाबू तैयार हो गये। पहेली को सुलझाने में शर्त का भी प्रावधान किया गया।
ग्रामीण ने कहा कि हम गाँव के हैं तो यदि हम पहेली का जवाब न बता सके तो हम आपको पचास रुपये देंगे और यदि आप सही जवाब न दे सके तो आप हमें सौ रुपये देंगे।
शहरी बाबू अपने घमंड के कारण तैयार हो गये और उन्होंने गाँव वाले से पहले पहेली पूछने को कहा।
गाँव वाले ने पहेली पूछी--

‘‘ऐसा कौन सा पक्षी है जो जब उड़ता है तो उसके तीन पैर होते हैं। जब जमीन में चलता है तो उसके दो पैर होते हैं और जब वह पानी में तैरता है तो उसका एक ही पैर होता है।’’

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शहरी बाबू पहेली का जवाब सोचने लगे, ऐसे विचित्र पक्षी के बारे में सोचने लगे। आप भी सोचिए और बताइये इस पहेली का सही जवाब। हारने-जीतने पर रुपये का कोई लेन-देन नहीं है।

28 अक्टूबर 2009

पहेली बूझी कितनों ने और मिला क्या..."बड़ा कौन?"

कल अपनी पोस्ट में एक पहेली पूछी थी कौन सा ब्लॉगर सबसे बड़ा है?
यह हमारी ओर से तो स्पष्ट था कि पहेली बस यूँ ही पूछी गई है। किसी सही अथवा गलत के निर्धारण की बात नहीं थी।
हाँ, कौन बड़ा है, इस बात पर हमें एक संस्मरण याद आता है जो याद नहीं कि किसी ने सुनाया था या फिर हमने कहीं पढ़ा था।
एक बार नेपोलियन अपने सेनानायकों के साथ खड़ा हुआ सेना का निराक्षण कर रहा था। बात की बात में कोई चर्चा लम्बाई (कद) को लेकर छिड़ गई। नेपोलियन के एक मुँहलगे सेनानायक ने, जो नोपोलियन के बगल में ही खड़ा था, कहा कि मैं आपसे बड़ा हूँ। (दरअसल उस सेनानायक का कद नेपोलियन से अधिक था।)
नेपोलियन ने उस सेनानायक को घूरा और धीरज के साथ जवाब दिया कि तुम मुझसे बड़े नहीं लम्बे हो।

पूछी गई पहेली के उत्तर भी मजेदार आने की सोचे थे, क्या हुआ आप ही जानें। सारी टिप्पणियाँ साथ में हैं।
हाँ, जिन महानुभावों ने इस पहेली को बूझने के लिए मेहनत की उनको प्रोत्साहन स्वरुप पुरस्कार दिया जाएगा.
सबको मिलेगा उनकी अगली पाँच पोस्टों पर हमारी और हमारे मित्रों की ओर से टिप्पणियों का शानदार इनाम।

Udan Tashtari said...
आपे हैं हुजूर!!

Dipak 'Mashal' said...
अरे चाचा जी, आपने स्पष्ट तो किया नहीं की किस केटेगरी में बड़ा ब्लॉगर ढूंढ रहे हैं? शेप में, की साइज़ में, धन में या उम्र में, पोस्टों में या कमेंट्स में, मसखरी में या गंभीरता में, जनचेतना में या मन बहलाव में, चिंतन में या दोषारोपण में, गद्य लेखन में या पद्य लेखन में, राजनैतिक रसूख में या लोगों के दिलों में पैठ में?कई और भी varieties हो सकती हैं। आप स्पष्ट कीजिये उसके बाद ही लोग सर्च कर पाएंगे....
गुस्ताखी माफ..
सादर
आपका भतीजा
जय हिंद

Neeraj Rohilla said...
तुम्हारा नाम तुम, हमारा नाम हम,
तुम बडे के हम, ;-)
बचपन में गली में ये खेल खूब खेला था बस उस समय किसी को बडे होने की चाह नहीं थी, सब पूछते थे "तुम पागल के हम", ;-)आभार,

M VERMA said...
जिसको उम्र से बडा माना
वो हकीकत में बडा नहीं निकला
जो लडखडा रहे थे वो तो
खडे पाये गये पर
जिसको मजबूती से खडा देखा
पास गया तो खडा नही निकला
अब आप ही से पूछता हूँ
आप से बडा कौन?

'अदा' said...
उम्र ,लम्बाई में, चौडाई में, ऊंचाई में.....
चिरकुट पना में...
किसमें बड़ा...तनी स्पष्ट कीजियेगा...
Vivek Rastogi said...
आज तो वही बड़ा ब्लॉगर है जो दूसरे की टांग खींचने में अभ्यस्त हो।
एक और पहेली इसके बाद ............ जवाब के लिए तैयार रहिएगा.....

27 अक्टूबर 2009

एक पहेली हमारी भी बूझो...माइक्रो पोस्ट

एक साल से ऊपर हो गया है ब्लाग पर किन्तु अभी भी ब्लाग संसार पर दूसरों की नकल कर करके स्वयं को ब्लागर सिद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं।
इसी क्रम में बहुत दिनों से देख रहे थे कि ब्लाग पर पहेली बूझने-बुझाने का भी चलन सा बढ़ता जा रहा है, लगा कि ब्लागिंग में प्रसिद्धि पाने के लिए पहेली बुझाने-बूझने वाली पोस्ट भी लिखनी पड़ती है।
बस जी, इसी बात को गाँठ बाँधकर हम भी इस पोस्ट पर एक पहेली चटका दे रहे हैं।
बूझो तो जानें? सही जवाब पर इनाम भी है, लाजवाब.....
पहेली है---


कौन सा ब्लागर सबसे बड़ा है?