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09 मई 2026

महापुरुषों का सम्मान या फोटो खिंचवाने की चाहत?

यदि महाराणा प्रताप के चरणों में पुष्प अर्पित कर दिए जाते तो क्या ये उनके प्रति सम्मान न होता?

 

आजकल सम्मान का अर्थ महापुरुषों के बराबर खड़े होने से है, उनको माल्यार्पण करने से है. इसी सनक ने मूर्तियों/प्रतिमाओं की भव्यता को समाप्त कर दिया है. उरई शहर की लगभग सभी प्रतिमाओं/मूर्तियों में इस तरह की सीढ़ियाँ लगवा दी गई हैं. इससे नेताओं के, जनप्रतिनिधियों के कथित अहं को संतुष्टि भी मिल जाती है. जिला प्रशासन को, जिला जनप्रतिनिधियों को लगातार लिखित, मौखिक निवेदन करने के बाद भी किसी पर कोई असर नहीं हो रहा है. दिखावे का सम्मान महापुरुषों की दिव्यता-भव्यता पर हावी है.