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01 मार्च 2019

अभिनन्दन की सकुशल घर वापसी पर पाक का चरित्र उजागर


अंततः लम्बे इंतजार के बाद भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनन्दन ने अपने देश की धरती पर कदम रखा. दुश्मन के कब्जे में लगभग साठ घंटे बिताने के बाद उनकी स्वदेश वापसी बहुत ही संदेहास्पद स्थिति में रही. पाकिस्तान द्वारा दो बार उनके भेजे जाने सम्बन्धी समय में बदलाव किया गया. विंग कमांडर को भारत भेजे जाने से ठीक पहले पाकिस्तान द्वारा उनका एक वीडियो बनाया गया. न केवल बनाया गया बल्कि पाकिस्तान द्वारा उस वीडियो को अनेक कट लगाते हुए एडिट कर अपने मन-मुताबिक बनाया गया. इसे पाकिस्तान का तमाशा ही कहा जायेगा कि विंग कमांडर के वाघा बॉर्डर पहुँचने से पहले ही उस एडिट वीडियो को पाकिस्तानी मीडिया में ज़ारी भी कर दिया गया. इस वीडियो में विंग कमांडर पाकिस्तानी फ़ौज की तारीफ करते और भारतीय मीडिया की बुराई करते दिखाए गए हैं. सोचने वाली बात है कि जो व्यक्ति दुश्मन देश में पकड़े जाने पर, उसकी गिरफ्त में बैठे होने के बाद भी हर बात पर  am not supposed to tell you that कह रहा हो वो व्यक्ति अपने देश लौटने के ठीक पहले ऐसा क्यों बोलेगा? स्पष्ट है कि इस वीडियो को पाकिस्तान ने अपने लिए बनाया है. भले ही पाकिस्तान इस वीडियो का अंतर्राष्ट्रीय मंच पर कहीं भी प्रयोग करे मगर यह सभी स्पष्ट रूप से जानते-समझते हैं कि ऐसे वीडियो किस मनोदशा में बनाये जाते हैं. जिस तरह के कट उस पूरे वीडियो में दिखाई देते हैं वह भी पाकिस्तान की मानसिकता को उजागर करता है. 


इस वीडियो के सन्दर्भ में दो बातें बहुत स्पष्ट दिख रही हैं. एक तो इसमें बहुत से कट हैं. जिससे लग रहा है कि विंग कमांडर के कहे गए कई-कई वाक्यों को काट-काट कर, जोड़-जोड़ कर वाक्य बनाये गए हैं. दूसरा, अभिनन्दन के पाकिस्तान द्वारा पकड़े जाने के बाद जो दो वीडियो बने उसमें ज्यादातर बातचीत अंग्रेजी में है, जबकि ये अंतिम वीडियो में लगभग सारी बात हिन्दी में है. साफ़ है कि एडिट करने की सहजता के कारण ऐसा करवाया गया होगा. पाकिस्तान विंग कमांडर को भारत भेजने से लेकर इस वीडियो तक की कहानी को वैश्विक समुदाय के सामने अपने हिसाब से प्रस्तुत करेगा. देश में तो इमरान को शांतिदूत घोषित किया ही जाने लगा है. मानवतावादी भी बताया जाने लगा है. युद्ध न करने जैसी मानसिकता रखने वाला बताया जाने लगा है. ऐसे में इस वीडियो के द्वारा पाकिस्तान यही सिद्ध करने की कोशिश करेगा कि पाकिस्तानी फ़ौज सही है और भारत में उसकी मीडिया द्वारा पाकिस्तानी आतंकवाद की खबरें प्रसारित की जाती हैं. वैसे यह भी तय है कि इस वीडियो का बहुत व्यापक प्रभाव अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान के पक्ष में नहीं होने वाला है क्योंकि अभिनन्दन की भारत भेजने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी ने पाकिस्तान के चाल-चरित्र पर सवालिया निशान लगा ही दिए हैं.

28 फ़रवरी 2019

आतंकवाद विरोधी कार्यवाही को युद्ध नहीं कहा जाता


सूरज की पहली किरण निकलने के पहले भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तानी सीमा में सोये आतंकियों को जागने का मौका नहीं दिया. पूरी तैयारी और निश्चय के साथ महज बीस-बाईस मिनट में तीन प्रमुख जगहों पर बने आतंकी कैम्पों को नष्ट करके वायुसेना के विमान सुरक्षित अपने देश लौट आये. पुलवामा हमले के बाद भारतीय नागरिकों में जो उदासी का, आक्रोश का माहौल बना हुआ था वह दूर हुआ. देश के उस पार क्या स्थिति रही होगी यह किसी से छिपा नहीं मगर अपने देश में पाकिस्तानी समर्थकों के चेहरे का रंग उड़ा हुआ था. पाकिस्तान के साथ हमेशा शांति, वार्ता का राग अलापने वालों की जुबान से वायुसेना के लिए दो शब्द भी न निकले. बहुत से लोगों ने यदि कुछ कहा भी तो वे इसे उन्माद पैदा करना बताते रहे. कुछ लोगों के लिए यह चुनावी कदम रहा, जिसके द्वारा वर्तमान केंद्र सरकार सत्ता वापसी करना चाहती है. ऐसे लोगों का मानना है कि यह कार्यवाही पाकिस्तान पर की गई है. पाकिस्तानी हुक्मरानों की तरफ से भी बौखलाहट भरे बयानों का आना साबित करता है कि वे इस कार्यवाही को अपने खिलाफ मान बैठे हैं.


इस खबर के सार्वजनिक होते ही पाकिस्तान की तरफ से अलग-अलग तरह के बयान आने शुरू हो गए. किसी की तरफ से कहा जाने लगा कि सही समय पर इसका जवाब दिया जायेगा. किसी के द्वारा इसे अनावश्यक घुसपैठ बताया गया. किसी के द्वारा इसकी शिकायत अंतर्राष्ट्रीय फोरम में किये जाने सम्बन्धी बयान दिए गए. किसी ने बयान दिया कि बम खाली क्षेत्र में गिरे, कोई नुकसान नहीं हुआ. पाकिस्तान की तरफ से इन सारे बयानों के साथ-साथ वहाँ के निवासियों की जुबानी सारे घटनाक्रम को बताते हुए वीडियो भी सामने आये, जो कुछ न्यूज़ चैनल्स ने दिखाए. सभी को यदि इस कार्यवाही की दृष्टि से देखा जाये तो बहुत सी बातें स्पष्ट रूप से सामने आती हैं कि भारतीय वायुसेना द्वारा की गई इस कार्यवाही में पाकिस्तान के किसी भी नागरिक क्षेत्र को निशाना नहीं बनाया गया था. एक भी बम से किसी भी निर्दोष नागरिक की जान-माल को नुकसान नहीं हुआ है. इसके अलावा भारतीय प्रधानमन्त्री और हमारी सेना इसे भली-भांति जानती-समझती थी कि यह कार्यवाही किसी भी तरह से पाकिस्तानी सेना के खिलाफ नहीं की जा रही. ऐसे में उसके द्वारा किसी भी पाकिस्तानी सैन्य क्षेत्र को निशाना नहीं बनाया गया. किसी भी पाकिस्तानी सैनिक को नहीं मारा गया. यह कार्यवाही पूरी तरह से पुलवामा हमले में वीरगति को प्राप्त हुए हमारे सैनिकों का बदला लेने के लिए की गई थी. ऐसे में हमारी सेना का उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ पाकिस्तानी सीमा में चल रहे आतंकी प्रशिक्षण कैम्पों को नष्ट करना रहा था. इसी कारण भारतीय वायुसेना द्वारा आतंकी कैम्पों को निशाना बनाते हुए आतंकियों का खात्मा किया गया.

इस कार्यवाही को एक तरह से अंतर्राष्ट्रीय सहमति भी प्राप्त हुई, यह भी भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की कूटनीतिज्ञ सफलता कही जाएगी. सम्पूर्ण विश्व आज किसी न किसी रूप में आतंकवाद से पीड़ित है. ऐसे में सभी देश चाहते हैं कि आतंकवाद का सफाया हो. आज के दौर में लगभग सभी देश आतंकवाद के खिलाफ जीरो टोलरेंस वाली नीति का पालन करने की बात करते हैं. आपसी सहयोग के साथ आतंकवाद का सफाया करने की बात करते हैं. ऐसे में यदि भारतीय सेना ने पाकिस्तान में चल रहे आतंकी कैम्पों को समाप्त करने सम्बन्धी कदम उठाया भी है तो इसे वैश्विक स्तर पर पाकिस्तानी सेना के या पाकिस्तान के खिलाफ उठाया गया कदम नहीं स्वीकारा गया है. आतंकवाद की समाप्ति के लिए ऐसी कार्यवाही पूर्व में भी अनेक देशों द्वारा की जाती रही है.

यह सही है कि देश में, समाज में, परिवार में यदि शांति का, अमन का वातावरण बना हुआ है तो वह किसी के भी विकास के द्वार सहजता से खोलता है. विकास के इस द्वार के लिए शांति आवश्यक है और वह तब तक संभव नहीं जब तक कि कुछ अराजक तत्त्व सक्रिय हैं. सीमा-पार से होते आ रहे आतंकी हमलों के बारे में न केवल अपने देश को वरन सम्पूर्ण विश्व को जानकारी है. इसके अलावा बच्चे-बच्चे को जानकारी है कि देश के भीतर भी उन आतंकियों का समर्थन करने वाले, आतंक की पनाहगार बन चुके पाकिस्तान का समर्थन करने वाले भी बहुत से लोग हैं. ऐसे समर्थकों में बहुत से खुलकर सामने आते हैं और बहुत से ऐसे हैं जो स्लीपर सेल की तरह काम करते हैं. अब जबकि यह स्पष्ट हो चुका है कि भारतीय वायुसेना ने किसी भी तरह से युद्ध करने के लिए नहीं, पाकिस्तानी सेना से बदला लेने के लिए नहीं, पाकिस्तान से युद्ध के लिए नहीं वरन आतंकियों के सफाए के लिए यह कार्यवाही की है तब देश के भीतर बैठे पाकिस्तानी समर्थकों को खामोश रहने की आवश्यकता है. उनके द्वारा की जाने वाली किसी भी तरह की बयानबाजी देश के भीतर पनप रहे आतंकियों को आक्सीजन देने का काम करेगी. भारतीय प्रधानमंत्री और भारतीय वायुसेना इसके लिए बधाई की पात्र है कि उसने बहुत हद तक आतंकवाद की कमर तोड़ने का काम किया है. कम से कम इस कार्यवाही को पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध से न जोड़ते हुए विशुद्ध आतंकवाद विरोधी कार्यवाही माना-समझा-बताया जाये, यही दोनों देशों के बीच शांति, अमन के लिए बेहतर रहेगा. यही मानसिकता भारत को वैश्विक स्तर पर आतंकवाद से लड़ने में सहयोगी बनाएगी, उसे ताकत प्रदान करेगी.

27 फ़रवरी 2019

युद्ध या पूर्ण बहिष्कार ही पाकिस्तान को सुधारने का उपाय है

पाकिस्तान के रवैये के खिलाफ कूटनीति भरे कदम लगातार बढ़ाये जा रहे हैं. सरकार के द्वारा वैश्विक समुदाय को स्पष्ट सन्देश देते हुए बताया गया कि किस तरह पाकिस्तान की तरफ से कश्मीर के साथ-साथ देश के बाकी हिस्सों में आतंकी गतिविधियाँ अंजाम दी जारी हैं. इससे वैश्विक समर्थन का मिलना एक बड़ी कूटनीतिज्ञ विजय कही जाएगी. इसके अलावा पाकिस्तान से व्यापारिक गतिविधियों का बंद किया जाना, आयात शुल्क का बढ़ाया जाना भी पाकिस्तान को हालिया सबक सिखाने के लिए पर्याप्त है. इसके साथ-साथ जल समझौते पर विचार करने की, पाकिस्तान को जाने वाले पानी को रोकने सम्बन्धी बयानों ने भी पाकिस्तान को कई कदम पीछे धकेला होगा. जिस तरह की स्थितियाँ अभी देश के भीतर हैंउन्हें देखते हुए सीधा युद्ध देश के हित में नहीं होगा किन्तु जवानों पर धोखे से किया गया हमला देश भर में पाकिस्तान के खिलाफ आक्रोश पैदा किये हुए है.  ऐसे में ये कदम हाल-फ़िलहाल इसलिए भी सही माने जा सकते हैं क्योंकि उसकी तरफ से प्रायोजित आतंकवाद का खुला खेल सीमा पार से तो चल ही रहा है, देश के भीतर उसके पक्ष में बैठे लोग भी किसी आतंकी से कम नहीं. कुछ विशुद्ध आतंकी ही हैं और कुछ अपने बयानों, हरकतों से आतंकी काण्ड जैसे कदम उठा लेते हैं. इन तमाम सारे राजनैतिक, कूटनीतिज्ञ कदमों के साथ सांस्कृतिक जगत से, खेल जगत से भी पाकिस्तान का बहिष्कार सा किया जाना देश के मनोबल को बढ़ाएगा.


जैसी की खबरें आई हैं कि कलाकारों का आना-जाना नहीं होगा, क्रिकेट में पाकिस्तान के साथ विश्व कप का मैच नहीं होगा. इन दो खबरों के आने पर प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं जो कम से कम वर्तमान परिस्थितियों में सुखद नहीं कही जा सकती हैं. कलाकारों के आने-जाने पर भी फिल्म संसार के कुछ लोगों ने आपत्ति जताई है. उनके विचार से ऐसा किया जाना अलोकतांत्रिक है, कला का अपमान है. यहाँ उन कलाकरों को समझना चाहिए कि यदि पाकिस्तान सरकार वाकई कला को, संस्कृति को महत्त्व देती है तो वह इन्हीं कलाकारों के सम्मान के लिए अपनी तरफ से चलने वाले आतंकी कदमों को रोकें. कुछ विरोधी विचार क्रिकेट को लेकर भी सामने आये हैं. क्रिकेट के वरिष्ठ सदस्य सुनील गावस्कर सहित भगवान का दर्ज़ा पाए सचिन तेंदुलकर के मुख से देश के निर्णय का विरोध समझ से परे है. ये सच है कि विश्व कप में भारत का प्रदर्शन हमेशा पाकिस्तान से बेहतर ही रहा है. अतीत के बेहतर प्रदर्शन के हिसाब से आने वाले किसी भी मैच का परिणाम तय नहीं किया जा सकता है. खेल में कब किसकी स्थिति सही हो, कब कौन कमजोर हो जाये कहा नहीं जा सकता है. यदि ऐसी किसी स्थिति के बाद भारतीय टीम पाकिस्तानी टीम से हार जाती है तो खिलाड़ियों, नागरिकों के मनोबल को समझा जा सकता है. यहाँ समझना चाहिए कि खेल भावना में सम्मान तब तक है जब तक कि सामने की तरफ से भी सम्मान मिल रहा हो. समझ से परे है कि एक तरफ उस देश से आतंक को समर्थन मिल रहा है और उसी देश के साथ खेल खेला जाये. 

क्रिकेट के द्वारा सम्बन्ध सुधारने की कवायद वर्षों से होती आ रही है. इसी के चलते दोनों देशों के बीच टूर्नामेंट दोनों देशों से बाहर किसी तीसरे देश में भी आयोजित किये जाते रहे हैं. लगातार कई सालों तक ये प्रक्रिया चलती रही है, इसके बाद भी दोनों देशों के मध्य संबंधों में मधुरता नहीं आ सकी है. अब जबकि हालिया आतंकी हमला बहुत बड़ा हमला है और इसे लेकर देश में जबरदस्त आक्रोश है, गुस्सा है तब पाकिस्तान से किसी भी तरह के मैत्री सम्बन्ध शहीद जवानों का अपमान करने जैसा ही होगा. एकबारगी भले इसे स्वीकार कर लिया जाये कि वर्तमान स्थितियाँ पाकिस्तान से सीधे युद्ध या बदला लेने लायक नहीं हैं किन्तु ऐसे किसी भी कदम को अवश्य ही रोका जा सकता है जिनसे वैश्विक समुदाय को, पाकिस्तान को एक स्पष्ट सन्देश दिया जा सके. स्पष्ट रूप से बताया जा सके कि देश उसकी नापाक हरकतों के कारण उसका बहिष्कार कर रहा है. ऐसे में न केवल राजनयिक संबंधों को समाप्त किया जाना चाहिए बल्कि तमाम सारे उन कदमों को भी रोक लेना चाहिए जो दोनों देशों के मध्य सीधे-सीधे संचालित होते हों. अभी भले ही सीधे युद्ध के द्वारा न सही मगर ऐसे कदमों के द्वारा पाकिस्तान को सबक सिखाया जा सकता है.

अब जबकि पुलवामा हमले का बदला पाकिस्तानी आतंकियों से ले लिया गया है, तब जनाक्रोश में कमी आई होगी मगर पाकिस्तान की हरकतें उसका बहिष्कार किये बिना सही नहीं होनी हैं. आतंकी कैम्पों के ध्वस्त होने से बौखलाया पाकिस्तान आतंकियों की मौत का बदला लेने के लिए आज सुबह भारतीय सीमा में वायुमार्ग से घुसा. उसका मकसद किसी न किसी रूप में भारतीय सैन्य क्षेत्र में या फिर नागरिक क्षेत्र में बमबारी करना ही रहा होगा. भारतीय सेना पहले से ही मुस्तैद थी और उसने पाकिस्तान के एक विमान को मार गिराया. हालाँकि इस प्रयास में भारतीय सेना का भी एक मिग दुर्घटनाग्रस्त हो गया. आधिकारिक सूत्रों द्वारा एक पायलट लापता बताया गया है. उधर पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसके कब्जे में एक भारतीय पायलट है. यदि उसकी बात को सही माना जाये तो अबकी गेंद उसके पाले में है कि वह पायलट को सुरक्षित लौटाते हुए वैश्विक समुदाय के सामने अपनी साख को कुछ हद तक सही कर सकता है. अन्यथा की स्थिति में वह एक दिन पूर्व ही देख चुका है कि भारतीय प्रधानमंत्री और भारतीय सेना किस कदर ठोस मगर सटीक निर्णय, कदम उठाने में पारंगत हैं. यदि अबकी भी पाकिस्तान सुधरने का प्रयास नहीं करता तो या तो उसे युद्ध के द्वारा समझाया जाये या फिर उसका सम्पूर्ण बहिष्कार किया जाये. इसके अलावा और कोई रास्ता नहीं है. 

26 फ़रवरी 2019

उत्साह बना रहे, जोश बना रहे, दुश्मन जिन्दा न रहे, आतंकी जिंदा न रहे


सुबह आँख खुले और खबर ऐसी मिले तो निश्चय ही सीना 56 इंच से कहीं अधिक बड़ा समझ आने लगता है. समाचार-पत्रों की अपनी बाध्यताएं होने के कारण यह खुशखबरी उनके द्वारा तो नहीं मिली मगर नियमित रूप से सुबह-सुबह ताजा खबरों के लिए जैसे ही नेट की खिड़की को खोला तो गौरवपूर्ण एक झोंका अन्दर उतरता चला गया. अपनी तसल्ली के लिए कई-कई जगहों पर घूम-फिर कर देखा तो सभी जगह उसी तरह की आनंदित, गौरवशाली बयार चल रही थी. सभी उसकी शीतलता में, उसके जोश में उत्साहित नजर आ रहे थे. सब भारत माता की जय, जय हिन्द, जय हिन्द की सेना के जयघोष के साथ उल्लासित दिखाई दे रहे थे. आखिर खबर ही ऐसी थी. इंटरनेट पर सबसे तेजी से प्रसारित होने वाली खबर में आज कि यही सबसे बड़ी और जोश भरने वाली खबर रही. पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई की खबर. भारत के 12 मिराज 2000 जेट ने पाकिस्तान में 1000 किलो के बम गिराए. भारतीय वायुसेना के इस एयरस्ट्राइक में 200-300 आतंकवादी मारे जाने की खबर.


ऐसी खबरें सुनकर किसी भी उस भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो ही जायेगा जो पुलवामा में आतंकी हमले में  जवानों की मौत का बदला लेना चाहता होगा. यद्यपि पुलवामा हमले के कुछ घंटों के भीतर ही उस हमले के मास्टरमाइंड को सेना ने मार गिराया था किन्तु कुछ बड़ा होने वाला है की सोच के साथ भारतीय नागरिक उससे संतुष्ट नहीं थे. ऐसे में भारतीय वायुसेना के 12 मिराज 2000 एयरक्राफ्ट ने बालाकोट, चकोटी और मुजफ्फराबाद में बम गिराए जाने, कई आतंकी लॉन्च पैड ध्वस्त होने की खबर ने कुछ राहत दी है. खबर यह भी है कि इस हमले में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का कंट्रोल रूम अल्फा-3 भी पूरी तरह ध्वस्त हो गया है. पुलवामा हमले के बाद ऐसी एक प्रतिक्रिया की आवश्यकता भी महसूस हो रही थी. इससे न केवल पाकिस्तान को सबक मिलेगा वरन भारतीय सेना का, सैनिकों का हौसला भी बढ़ेगा.

इस कार्यवाही का तिथिवार भी अपना महत्त्व है. पुलवामा में हमारे सैनिकों पर हमला हुआ था 14 फरवरी को. 26 फरवरी उन शहीदों की त्रयोदशी संस्कार पर भारतीय वायुसेना ने सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की है जवानों को.


भारतीय सेना, सैनिकों के हौसले के साथ-साथ आज इस खबर के आने के बाद सोशल मीडिया में भी जोश हाई बना हुआ दिख रहा है. उत्साहित नागरिकों के विचार उनकी पोस्ट, कमेन्ट में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं. एक नजर उन पर भी डाल ली जाये.
=> भारतीय वायुसेना - हम जब आएंगे, गर्मी थोड़ा बढ़ जाएगी.
=> सूत्रों के मुताबिक भारतीय वायुसेना ने पहले करीब 5 किलो टमाटर फेंके और जैसे ही कंगले बाहर टमाटर लूटने निकले, बम मार दिए.
=> इस बार हमला पीओके में नही बल्कि पाकिस्तान में हुआ है.
=> साथियो! How Is The Josh?
=> 1971 के बाद पहली बार भारतीय वायुसेना ने सीमा पार किया है। इस नाते यह ऐतिहासिक घटना है.
=> 26 फरवरी के दिन 26 जनवरी जैसा माहौल बनाने वाले मोदी जी देश के पहले प्रधानमंत्री बने.  
=> वो शांति पुरस्कार भी लेगा.. और पाकिस्तान की ओखली में धनिया भी कूट देगा...
=> वीर सावरकर की पुण्य तिथि के दिन आप सर्जिकल स्ट्राइक करते हैं और फिर गाँधी शांति पुरस्कार का वितरण करने राष्ट्रपति भवन पहुँच जाते हैं... अपने मोदीजी भी ग़ज़ब हैं!
=> आज दिल से पीएम @narendramodi को सलाम करता हूँ.आतंकियों को उनके घर में घुसकर यूँ मारने का फैसला बड़े जिगर वाला ही ले सकता है.
=> अभी तो फाइटर प्लेन्स के इंजिन की कार्बन ही चेक की गई है.  
=> ये तो Try boll था। #वन्देमातरम्.
=> उरी के बाद अगली सुपरहिट मूवी होगी पुलवामा, और अगर फिर भी न सुधरे, तो फ़ाइनल फ़िल्म होगी "एक था पाकिस्तान"
=> पाकिस्तान के खिलाफ अभी तो शुरुआत है, हमको तो जमीन पूरा समतल चाहिए... अपने यहाँ के लड़के उधर जाकर क्रिकेट प्रैक्टिस करेंगे!
=> पाकिस्तान के तशरीफ पर भारतीय वायु सेना ने 1000किलो के पैलेट के निशान बनाए.
=> हम हिंदुस्तानी है 12 दिनों तक शोक रखते है.13 वे दिन काम पर लग जाते हैं.
=> अभी तो ये अंगड़ाई है, आगे बहुत ठुकाई है. मोदी जी दिल खोल कर हमला करो, देश आपके साथ है.
=> जैसे राम इधर शबरी के जूठे बेर खा रहे थे -उधर रावण की लंका ढहा रहे थे, तैसे मोदी इधर चरण धो रहे थे, उधर पाकिस्तान की धुनाई.
=> आज तो बस #जय_छप्पन_इन्चेश्वर.
=> नया हिंदुस्तान है, घर में घुस के मारेगा, जय हिंद जय भारत.
=> उधर 72 हूरों के मैनेजर ने भारत को कड़ी आपत्ति जताई है।। उसका कहना है कि भारत ने बिना ऑर्डर दिए ज्यादा माल डिलीवर कर दिया गया अब इत्ती जल्दी इत्ती हूरों का इंतजाम हम कैसे करें।।
=> जय हिंद की सेना हमें तुम पर नाज़ है...देश को इसी का इंतज़ार था...भारतीय वायुसेना ने पहला कदम उठाया.  
=> भारत सरकार ने अपने रुख में बदलाव करते हुए डोजियर देने की जगह डोज देने की परंपरा शुरू कर दी है. 

पोस्ट लगातार आ रही हैं लोगों की. उत्साह बना रहे, जोश बना रहे, बस दुश्मन जिन्दा न रहे. आतंकी जिंदा न रहे. जय हिन्द. जय हिन्द की सेना.