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30 अक्टूबर 2020

शरद पूर्णिमा का आकर्षक चन्द्रमा (ब्लू मून)

हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा ने नाम से जाना जाता है. आज 30 अक्टूबर 2020 को शरद पूर्णिमा है. बहुत सी जगहों पर इसे रास पूर्णिमा भी कहते हैं. ऐसा माना जाता है कि वर्ष भर में केवल इसी दिन चन्द्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है. इस दिन हिन्दू धर्मावलम्बी व्रत भी रखते हैं, जिसे कौमुदी व्रत भी कहा जाता है. धार्मिक रूप में ऐसी भी मान्यता है इसी दिन श्रीकृष्ण ने महारास रचाया था. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस रात्रि को चन्द्रमा की किरणों से अमृत झड़ता है. इसी कारण से उत्तर भारत में खीर बनाकर रात भर चाँदनी में रखने का विधान है. इस खीर को प्रसाद रूप में ग्रहण कर ईश्वरीय आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है. 


इस माह, अक्टूबर 2020 को शरद पूर्णिमा को ब्लू मून के नाम से भी जाना जा रहा है. ब्लू मून उस पूर्णिमा को कहते हैं, जब एक ही माह में दो पूर्णिमा होती हैं. इस माह पहली अक्टूबर को भी पूर्णिमा थी और अब तीस अक्टूबर को पूर्णिमा होने के कारण यह ब्लू मून के नाम से जानी गई. इस दिन चंद्रमा कुछ बड़ा और ज्यादा चमकदार, आकर्षक नजर आता है. 


कुछ चित्र निकाले हैं, उनका आनंद लीजिये. 









(चन्द्रमा के चित्र लेखक द्वारा स्वयं खींचे गए हैं. Nikon DSLR और Cannon Power Shot कैमरे के द्वारा.)
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#हिन्दी_ब्लॉगिंग

24 अक्टूबर 2008

एक सलाम इनके नाम भी

भारत की धरती से चाँद को छूने के लिए उड़ान भरी गई और अनेक लोगों के चेहरे खुशी से चमक उठे. इस शानदार सफलता के बाद भी बहुत सारे लोगों को इस बारे में जानकारी ही नहीं है कि ये उड़ान क्यों भरी गई? इस उड़ान का मकसद क्या है? इसे किस स्टेशन से छोड़ा गया है? ये सब आपको कल्पना का हिस्सा लग रहा होगा पर ऐसा सत्य है। वैसे मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना ये है कि एक ऐसे देश में जहाँ कि एक बहुत बड़ी आबादी अभी भी बेकारी, बीमारी, भुखमरी आदि से जूझ रही हो वहाँ इस तरह के कार्यों का कोई अर्थ नहीं निकलता.
इसके बाद भी मेरा मानना ये है कि इस तरह के कार्यों को सफलता से अंजाम देते वैज्ञानिकों, इंजीनियरों आदि की योग्यता पर किसी तरह का संदेह नहीं होना चाहिए. ये लोग अपनी पूरी क्षमता का उपयोग कर देश को सारे विश्व में स्थान दिला रहे हैं. इसके बाद भी अफ़सोस इस बात का है कि ये लोग किसी भी रूप में हमारे हीरो, आदर्श आदि के रूप में सामने नहीं आ पाते हैं. मैदान पर चौके-छक्के लगाने वाले खिलाड़ियों के पीछे सारा देश पागल सा घूमता है, फिल्मों की दुनिया में कूल्हे मटका कर प्रसिद्धि हासिल करने वाले हीरो-हीरोइनों के करोड़ों-करोड़ लोग दीवाने हैं, इन लोगों को तमाम सारे पुरस्कारों, सम्मानों से लाद दिया जाता है. एक-दो मैच जीत जाने के बाद इनका स्वागत ऐसे होता है जैसे किसी देवता का पदार्पण हो रहा हो, एक फ़िल्म-स्टार को देखने के लिए भीड़ इस कदर आन पड़ती है मानो अब इन्हें न देख पाये तो ये जन्म ही व्यर्थ चला जायेगा।
परदे के पीछे रह कर काम करते इन वास्तविक हीरो लोगों को कितने लोग सम्मान देते हैं ये किसी से छिपा नहीं है। छंद की तरफ़ उड़ता जा रहा राकेट इन प्रतिभा-संपन्न लोगों की कहानी ख़ुद कहता है। हम इनके प्रति अपना आदर तब व्यक्त करते दीखते हैं जब कहीं दूर विदेश में ये सम्मानित हो जाते हैं। तब तक तो हम ठुमके लगाने वालों के पीछे, खेल के नाम पर रुपयों से खेलते लोगों के पीछे पागलपन दिखाते ही रहेंगे।
आइये एक पल को ही सही चंद्रमा को छूने जा रहे भारत को विश्व-शक्ति बनाने वाले इन वैज्ञानिकों के प्रति हम अपना सलाम, अभिवादन, सम्मान आदि तो प्रदर्शित कर ही सकते हैं।

20 अक्टूबर 2008

चाँद के पार चलो

चलो दिलदार चलो चाँद के पार चलो. ये पुरानी फ़िल्म पाकीजा का गाना हम नहीं गुनगुना रहे हैं...........ये गाना तो याद आया तब जब देश ने चंद्रयान की तैयारी कर ली. चंद्रमा पर जाने की तैयारी इस हद तक है कि अब चाँद की धरती हमारे क़दमों तले होगी. बेचारा चाँद अब घबरा रहा होगा कि अब यहाँ की शान्ति भी भंग हुई, इस देश में तो अब उपद्रव करने की कोई जगह तो बची ही नहीं है और विदेश में तमाम लोग ऐसे हैं जो उपद्रव मचा रहे हैं तो कहाँ उपद्रव किया जाए, शायद यही सोच कर चाँद पर जाने की तैयारी है.
आप लोग देख रहे हैं अपने देश की तरक्की.........अपने देश में बेघरों को घर नहीं पर जमीन तलाश रहे हैं चाँद पर.........अपने देश का पानी पूरी तरह समाप्ति पर ला दिया और अब तलाश है चाँद-मंगल पर पानी की..............देश के हालत काबू में नहीं हैं पर आतंक काबू करेंगे श्रीलंका में जाकर. आप सोच रहे होंगे कि ये श्रीलंका कहाँ से बीच में आ गया..........बात इस समय ये नहीं कि चाँद की चर्चा हो या श्रीलंका की.......चर्चा हो बस हमारी उपलब्धियों की. इस चर्चा (श्रीलंका वाली) से याद आयी एक कहावत - "अपना फटा सी न पायें, दूजे के फटे में टांग घुसाएँ."
कुछ भी हो बस हौसला न खो जाए ये ध्यान रखना होगा.......कुछ भी हो पर इंसानियत न खोये ये ध्यान रखना होगा. यदि पिछले महीने के वैज्ञानिक परीक्षण "महाप्रयोग" को याद करें तो देश का करोड़ों रुपये इसमें लगा और परिणाम क्या मिला? इसी तरह वर्तमान में देश के हालातों को ध्यान कर इस तरह के प्रयोग होने चाहिए....पर नहीं यहाँ तो शेयर कि गिरावट, मंदी, महंगाई के कारण लोगों के बाल बन रहे है. यदि सरकार न चेती तो चाँद तो दिखने ही लगेगी. तब चंद्रयान परीक्षण शत-प्रतिशत सफल सिद्ध होगा..........