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19 मार्च 2018

बड़े संभलकर गुजरे... (इतने बरस यूँ ही नहीं गुजरे)

कागजातों में भी हो गए आज चवालीस के. जी हाँ, चवालीस साल के असल में तो कुछ माह पहले हो गए थे मगर यहाँ बहुत से लोगों को कागजात ही सही समझ आते हैं, तो लो यहाँ भी चवालीस पूरे. इतने बरस ऐसे ही गुजर गए और ऐसा लगता है जैसे कल की ही बात हो. पलट कर न भी देखें, बस अपने हाथों को ही देख लें तो एक हाथ खाली है, एक हाथ भरा है. बहुत कुछ हाथ आया है, बहुत कुछ इन हाथों ने गँवाया है.


बहरहाल, आज के दिन कोई फिलोसोफी नहीं. स्व-रचित एक कविता आपके लिए...


ख्वाब में मिलते हुए भी,
बड़े संभलकर गुजरे
रुकते-रुकते हुए भी,
बड़े संभलकर गुजरे।

बरसों बाद आज,
वो करीब से गुज़रे,
न संभलते हुए भी,
बड़े संभलकर गुजरे।

चाहत गुजरने की,
तेरी रहगुजर से,
कभी गुजरते हुए भी
बड़े संभलकर गुजरे।

उस एक लम्हे के बाद,
न जाने कितने पल,
उसे देखते हुए भी
बड़े संभलकर गुजरे।

अदा से बहती हवा,
लगता है मानो वो,
न चाहते हुए भी,
बड़े संभलकर गुजरे।

25 नवंबर 2010

आज डॉ0 आदित्य कुमार जी का जन्मदिन है -- शुभकामनायें


आज डॉ0 आदित्य कुमार जी का जन्मदिन है।


आपको बताते चलें कि वर्तमान में डॉ0 आदित्य जी ब्लाग पर सक्रियता के साथ कार्य कर रहे हैं। अपने निजी ब्लॉग PEARLS OF THOGHT के अलावा बुन्देलखण्ड की साहित्यिक धरोहर को सुरक्षित रखने के प्रयास में साहित्यिक धरोहर नामक ब्लॉग का भी संचालन कर रहे हैं।

जैसा कि आप सभी को ज्ञात है कि डॉ0 आदित्य जी गत वर्ष उत्तर प्रदेश राजनीति विज्ञान परिषद के प्रदेश अध्यक्ष भी निर्वाचित हुए थे। उत्तर प्रदेश राजनीति विज्ञान परिषद को विश्व पटल पर लाने के लिए उन्होंने इंटरनेट पर ब्लॉग UP Political Science Association के माध्यम से परिषद का कार्य शुरू किया।

डॉ0 आदित्य कुमार जी वर्तमान में दयानन्द वैदिक स्नातकोत्तर महाविद्यालय, उरई में राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष एवं एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं।


आज 25 नवम्बर को उनके जन्मदिन पर उनके स्वस्थ और दीर्घायु होने की कामना हम सभी लोग करते हैं। आशा है कि ब्लॉग जगत उनके विचारों से सदा ही लाभान्वित होता रहेगा।




10 मई 2010

बेटी और ब्लॉग हुए दो वर्ष के...


समय कितनी तेजी से बीतता है, इसका आभास उस समय होता है जब हम किसी विशेष दिन को याद करते हैं। दो साल पहले की बात है जब हमारे घर पुत्री का जन्म हुआ था। परिवार के सभी लोग इस बात को लेकर संशय में थे कि आज के दौर की तरह ही डॉक्टर कहीं आपरेशन के लिए न कह दे। हालांकि पड़ोस की चाची जो चिकित्सा विभाग में ही हैं, अपनी नियमित देखरेख से इस बात का भरोसा दिलवाये थीं कि आपरेशन नहीं होगा।

शाम के समय घर से चिकित्सालय पहुँचे और लगभग 20 मिनट के बाद ही बेटी होने की खुशखबरी हम सभी को मिल गई। दो साल का यह समय ऐसे गुजर गया जैसे कल की ही बात हो और देखिये इसी 7 मई को हम सभी ने मिलकर उसकी सालगिरह मनाई।

(चित्र अपने कैमरे से)

(चित्र अपने कैमरे से)

हमारी पुत्री के दो साल होने की खुशी में घर में पार्टी की तैयारियाँ जोरों पर थीं। सभी अपनी-अपनी राय दे रहे थे और हम चुपचाप उन तमाम रायों पर अपनी हाँ में हाँ मिला रहे थे। कारण यह था कि अपनी दादी और अपने चाचा की लाड़ली बिटिया के वर्षगाँठ की तैयारी में ये दोनों लोग कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहते थे। हमें सूचना भर दी जाती थी और वह भी जानकारी के लिए।

घर की इस भड़भड़ में हम यह भी भूल गये कि इसी मई माह की 04 तारीख को हमने अपनी पहली पोस्ट लिखी थी। इस 4 मई 2010 को हमारे ब्लॉग को भी पूरे दो वर्ष हो गये हैं। हालांकि ब्लॉग अप्रैल के अन्तिम सप्ताह में ही बना लिया था किन्तु ज्ञान न होने के कारण बहुत डरते-डरते 4 मई को पहली पोस्ट लिखी थी।

(चित्र गूगल छवियों से साभार)

मई माह में अपनी बेटी के दो वर्ष के होने की तो पार्टी कर ली गई किन्तु बेचारा ब्लॉग तन्हा सा खड़ा रहा। इंटरनेट के युग में हमारी एक अलग पहचान स्थापित करने वाले ब्लॉग के दो वर्ष पूरे होने पर जल्द ही कोई जश्न किया जायेगा जो खालिस ब्लॉगिंग स्टाइल का होगा। जल्द ही ऐसा होगा क्योंकि समय जिस तेजी से निकल रहा है उससे कहीं ऐसा न हो कि दो की बजाय तीन वर्ष का जश्न मनाना पड़े।

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बेटी 'अक्षयांशी' हुई दो वर्ष की 07 मई को =====
आप उससे मिल सकते हैं उसके ब्लॉग "अक्षयांशी" तथा "नटखट परी" पर