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03 मार्च 2026

होली पर नए संकल्प

इस होलिका दहन पर अपनी
पुरानी दुश्मनी, पुराने मतभेद,
पुरानी रंजिश, पुराने विवाद,
पुरानी लड़ाई, पुराने झगड़े आदि
जला देंगे, भुला देंगे, मिटा देंगे....

+

अगले दिन से
नई दुश्मनी, नये मतभेद,
नई रंजिश, नये विवाद,
नई लड़ाई, नये झगड़े आदि
याद रखे जायेंगे, निपटाये जायेंगे....

+

#छीछालेदर_रस में भीगने वाले तैयार रहें.





25 मई 2023

मोबाइल के बिना भी ज़िन्दगी सम्भव है

कुछ दिनों तक मोबाइल बंद रखने वाले कदम पर बहुत से मित्रों, परिचितों के विचार जानने को मिले. बहुत से मित्रों ने आज के दौर में इसे बहुत कठिन कार्य बताया. हो सकता है कि बहुत से लोगों के लिए ये कठिन काम हो; बिना मोबाइल के उनका गुजारा न होता हो मगर ऐसा नहीं कि बिना मोबाइल के कोई काम नहीं हो सकता है.




बाक़ी लोगों के बारे में तो नहीं कहा जा सकता है कि उनका रुख क्या रहता है मगर अपने बारे में कुछ स्पष्ट सी बातें......

=>> मोबाइल ज़िन्दगी भर के लिए बंद नहीं किया जा रहा है. कुछ समय बस खुद के साथ रहने की कोशिश है.

=>> हम कोई मंत्री, सांसद, विधायक तो हैं नहीं... कोई प्रशासनिक अधिकारी भी नहीं हैं कि लाइसेंस, ठेके, जमानत, थाना, कोतवाली आदि मामलों में सहायक होंगे.

=>> अत्यावश्यक कार्य (वैसे तो होगा नहीं, फिर भी यदि हुआ तो) होने पर जिसे आवश्यकता होगी, वो हमारा पता करके हमसे मिल लेगा.

=>> आजकल फोन से बातचीत लोग वैसे भी न के बराबर कर रहे हैं. ज्यादातर बातचीत चैट के माध्यम से हो रही है, तो उसके लिए ये सोशल मीडिया जिन्दा रहेगा. एक-दूसरे तक खबर पहुँचती रहेगी.

=>> एक सबसे विशेष बात कि मोबाइल ज़िन्दगी नहीं है, मित्र, परिजन, सहयोगी आदि ही ज़िन्दगी हैं. मोबाइल के बिना ज़िन्दगी पहले भी थी, अभी भी बहुत से लोगों की है.

=>> पहले भी लगभग दो साल के लिए हम मोबाइल पूरी तरह से बंद किये रहे थे. अभी 2018-19 में लगभग साल भर whatsapp भी बंद रहा. ऐसा कोई काम नहीं जो आप विचार करें और वो हो न सके.

=>> मोबाइल के बिना भी हम सब जीवित रहेंगे, मिलते रहेंगे. इसलिए परेशान न हों. हमारे सहयोगी बनें और प्रयास करें मेलजोल बढ़ाने का.


26 दिसंबर 2020

समय का स्वागत कर उसे सुखद बनाने का प्रयास हो

बाजार में रोज की तरह सैर-सपाटा करने के दौरान आज एक परिचित से मुलाकात हुई. इधर-उधर की बातों, हालचाल के बाद उनके सामने एक सवाल उछाल दिया. वैसे जो सवाल हमने उनकी तरफ उछाला वो सवाल वैसे प्रतिवर्ष उनकी तरफ से उछाला जाता था. जी हाँ, यह सच है. चूँकि बाजार में उनसे लगभग रोज ही मुलाकात हो जाया करती है. इसी में दिसम्बर माह के अंतिम दिनों में उनकी तरफ से एक सवाल हर बार सामने आता है कि नए साल के लिए क्या संकल्प लिया है? नए वर्ष में क्या नया करने का विचार है? आज बहुत देर तक बातचीत करने के बाद भी उनकी तरफ से ऐसा कोई सवाल नहीं आया तो जरा आश्चर्य हुआ. आश्चर्य इस कारण हुआ कि दिसम्बर समाप्ति में अब चार-पाँच दिन शेष रह गए हैं फिर भी उनकी तरफ से शून्यता क्यों?




उनकी तरफ से किसी तरह की पहल न होते देख हमने ही इस बार उनकी जिम्मेवारी का निर्वहन करने का मन बनाया. उनकी तरफ सवाल उछाला कि आने वाले साल के लिए क्या संकल्प कर रहे हो? जवाब में बहुत बुरा सा मुँह बनाते हुए, लगभग नजरंदाज करने जैसा अंदाज दिखाते हुए बोले कुछ नहीं. अब संकल्प-बंकल्प लेना बंद. हमारा प्रश्नवाचक स्वरूप देख कर वे आगे बोले कि इस साल भी कुछ सोचा था, कुछ संकल्प लिए थे मगर इस साल की तो पूरी तरह से रगड़ लग गई. सारे के सारे संकल्प धराशाही हो गए. इसलिए अब आगे से कोई संकल्प नहीं. समय का कोई भरोसा नहीं कि कब क्या हो जाये. हमें समझ आ गया कि कोरोना के चलते वे इस वर्ष को कोसने में लगे हैं और उसी के चलते आने वाले वर्षों के लिए किसी तरह के संकल्प की नीति पर नहीं चल रहे.


हमने हँसते हुए उनको दिलासा दिलाई कि एक साल ऐसा निकल गया, इसका ये मतलब तो नहीं है कि आने वाले सभी वर्ष ऐसे ही निकलेंगे. हो सकता है कि आने वाला साल या फिर उसके बाद के आने वाले साल बहुत बेहतरीन निकलें. संभव है कि जो-जो सोचा जाये, जो भी संकल्प लिया जाये वो सब आने वाले वर्षों में पूरे हो जाएँ. उनके चेहरे पर संतुष्टि के भाव न दिखने पर उनके सामने फिर सवाल उछाला कि अच्छा चलो, यह साल ख़राब निकल गया. पिछले सालों में तुमने अपने कितने संकल्प पूरे कर लिए? पिछले वर्षों में तुम्हारे सोचे हुए कितने काम पूरे हुए? वे साल तो इस साल जैसे बुरे नहीं थे. उनमें तो इस वर्ष जैसी कोई बीमारी नहीं फैली थी. उनकी तरफ से कोई जवाब न आता देख समझाया कि समय के हाथों में बहुत कुछ है जो हमारे हाथ में नहीं मगर हमारे हाथ में इसके बाद भी इतना कुछ है जो समय को बदल सकता है. संकल्प लेना न लेना तुम्हारा अपना निजी मसला हो सकता है मगर किसी एक वर्ष के बुरे निकल जाने के कारण से आने वाले समूचे समय को बुरा समझने लगना नितांत नकारात्मक सोच है. इस नकारात्मकता से बाहर निकलने की जरूरत है.


उनके चेहरे की मुस्कराहट से लगा कि बात सही जगह पहुँच सकी है. ये हम सभी को ध्यान रखने की आवश्यकता है कि जो समय निकल गया जरूरी नहीं कि आने वाला समय भी वैसा ही निकले. निश्चित ही यह साल बहुत ही ख़राब रहा मगर इसके बाद भी इसमें बहुत कुछ अच्छी खबरें सुनने को मिलीं. देखा जाये तो प्रत्येक वर्ष अच्छे और बुरे का संयोग लेकर आता है. हम अपने ऊपर घटित होने वाली घटनाओं के अनुसार उस वर्ष का आकलन करने लगते हैं. वास्तविक रूप में तो हमें समय का स्वागत करना चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि हम सभी अपने कदमों से, अपने कार्यों से, अपने प्रयासों से उस समय को सुखद, खुशनुमा, बेहतर बना सकें.


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वंदेमातरम्

31 दिसंबर 2018

बीते साल के अधूरे काम पूरे करने हैं


कुछ पलों के बाद वर्ष 2018 हमसे दूर चला जायेगा और नया साल 2019 हमारे सामने आ जायेगा. हम सब बीते साल को भुलाते हुए नए साल के स्वागत में जुट जायेंगे. लोगों के द्वारा आतिशबाजी, पटाखे चलाया जाना शुरू होगा. एक-दूसरे को बधाई देने-लेने का, शुभकामनायें लेने-देने का काम चलता रहेगा. इस दौरान हम लोग एक पल को भी याद नहीं करते बीते साल को. जबकि हमें याद रखना चाहिए कि हम जिस पल का स्वागत कर रहे हैं वही पल अगले ही पल पुराना होने वाला है, बीत जाने वाला है. ऐसे में जबकि एक आने वाला पल अगले ही पल पुराना होने वाला हो, बीत जाने वाला हो तब हम सभी को खुशियों के बीच बीते साल में अपने गुजारे गए पलों को नहीं भूलना चाहिए. शेष लोग क्या करते हैं, क्या नहीं इसका अंदाजा तो कतई नहीं है पर हम व्यक्तिगत रूप से नित्य ही अपने पूरे दिन का आकलन रात को सोने के ठीक पहले करते हैं. एक-एक दिन का आकलन भले ही छोटा लगे मगर इसके द्वारा अपनी गलतियों, कमियों को सीखने-सुधारने का मौका मिलता है. इसके बाद भी हमारे लिए ही हम कह सकते हैं कि कई गलतियाँ, कई कमियां अभी भी हमारे भीतर हैं, बनी हुई हैं. 


एक-एक दिन के आकलन को जोड़-जोड़ कर साल भर का आकलन बताता है कि हमारे साथ अभी भी बहुत कुछ ऐसा है जो सुधारने की आवश्यकता है. अपने अन्दर की कमियों को बहुत हद तक दूर करने की कोशिश रहती है, बहुत हद तक इसमें सफल भी रहते हैं मगर फिर भी कुछ है जो अभी सुधारा नहीं जा सका है. नए बदलते कैलेण्डर के साथ बहुत से इरादे सामने होते हैं, कई सारे वादे खुद से किये जाते हैं, बहुत से संकल्प किये जाते हैं. इस जाने वाले साल में हमने अपने आपसे दो-चार वादे किये थे, दो-चार संकल्प किये थे. इनमें से पूरी तरह से सफलता तो किसी में नहीं मिली हाँ कुछ-कुछ काम अवश्य हुए हैं. ऐसे में इस नए साल में क्या संकल्प होगा, क्या वादा होगा पता नहीं. आने वाले साल में इसका भी ध्यान रखा जायेगा कि किसी की भावनाओं से खिलवाड़ न हो. जाने-अनजाने संभवतः ऐसा हो जाता है. दिल-दिमाग कभी नहीं चाहता है कि किसी का अहित किया जाये, किसी की भावना का अपमान किया जाये. इस साल अपने कुछ कार्यों से लगा कि ऐसा नहीं किया जाना था. यदि अपने आपमें अनुशासित रहते, अपने आपको संयमित रखते तो निश्चित ही बहुत कुछ नियंत्रित रखा जा सकता था. इसके बाद भी कहा जा सकता है कि किसी की भावनाओं से खिलवाड़ करना उद्देश्य कतई नहीं रहता है. आने वाले कुछ दिन अपने को विश्लेषित करने का समय है. कुछ नया करने, सोचने के पहले इस जाने वाले साल में जो अधूरा रह गया है उसे पूरा करने का काम किया जायेगा. 

ऐसा इसलिए क्योंकि यदि अपने स्तर पर इस साल का आकलन करें तो ऐसा कुछ भी नहीं पाया जिसे उपलब्धि कहा जा सके. ऐसा कुछ भी नहीं किया गया जिससे विश्वास में और वृद्धि की जा सके. ऐसा कुछ नहीं किया गया जिसके द्वारा अपने आपमें भी गर्व किया जा सके. बहुत कुछ मन में है, बहुत कुछ दिमाग में है उसे पूरा करने का हौसला जुटाना है. अपने प्रति बनती-बिगड़ती तमाम धारणाओं के बीच खुद को स्थापित करना है. विश्वास-अविश्वास के बीच की बारीक रेखा को मिटाते हुए विश्वास का माहौल खड़ा करना है. सफलता-असफलता के बीच भटकते हुए बस सफलता की मंजिल को प्राप्त करना है. हाँ, विगत अनेक वर्षों की तरह ही यह वर्ष भी जाते-जाते दुखी करके गया. ऐसा एक-दो सालों से नहीं हो रहा वरन पिछले न जाने कितने साल ऐसे बीते जिनमें साल जाते-जाते दुखी कर जाता है, कष्ट दे जाता है. इस बार भी हुआ मगर, ये जीवन है यहाँ इसी अनिश्चितता के बीच सबकुछ गुजारना होता है. यह साल तो गुजर जाने वाला है, आने वाला साल भी अपनी अवधि पूरी करके गुजर जायेगा. जाते साल में जो-जो उपलब्धियाँ आप सबको मिली उसके लिए शुभकामनायें. जो काम अधूरे रह गए, उनके आने वाले साल में पूरा होने की कामना.

31 दिसंबर 2010

आने वाले वर्ष का स्वागत करें साथ में कुछ संकल्प भी करें

आज वर्ष 2010 का आखिरी दिन है और आज की यह पोस्ट हमारी भी इस वर्ष की आखिरी पोस्ट है। काल को लेकर किसी भविष्यवाणी को निश्चित तौर पर नहीं किया जा सकता है किन्तु इस भविष्यवाणी को तो निश्चित रूप से किया ही जा सकता है। बहरहाल...

वर्ष 2010 देश के लिए अच्छा भी गुजरा और बुरा भी गुजरा। अच्छा समय जल्द निकल जाता है सो देश का भी अच्छा समय बहुत जल्द निकल गया किन्तु बुरे दिन ने अभी तक भी पीछा नहीं छोड़ा है। देश की प्रतिष्ठा में वृद्धि करने की दृष्टि से कई कार्य हुए और प्रतिष्ठा को धूमिल करने वाले कुकृत्य भी सामने आये।

ईमानदारी की मिसाल कायम की जाती रही वहीं भ्रष्टाचार ने इस बार देश में रिकॉर्ड उत्पादन किया। समझ नहीं आया कि एक के बाद एक भ्रष्टाचार से जुड़े मामले किस तरह और कैसे सामने आते रहे। हर घोटाला, हर भ्रष्टाचार दूसरे से आगे, ठीक वही हाल कि तेरा भ्रष्टाचार मेरे भ्रष्टाचार से बड़ा कैसे।

कुछ समय बाद हम नये वर्ष का स्वागत कर रहे होंगे। यही वह समय होता है जबकि हम पुरानी बातों को एकदम से भुला चुके होते हैं। हमें उल्लास में, स्वागत करने की ललक में बीते वर्ष की यादों को साथ में रखने का भी अवसर नहीं होता है। मस्ती में झूम कर एक दूसरे को बधाइयां, शुभकामनाएं देने में लग जाते हैं।

आइये, आज के दिन हम भले ही बीते वर्ष की कड़वी बातों को याद नहीं करना चाहते हैं पर इतना तो याद ही रखें कि ऐसा बहुत कुछ हुआ है जो देश को तोड़ रहा है। हम भी इस टूटन का शिकार किसी न किसी रूप में हो रहे हैं। आरक्षण की मांग पर रेलवे का जाम कर देना, सैकड़ों लीटर दूध बहा देना, मंहगाई के नाम पर बस बयानबाजी करना, स्मारकों के नाम पर जनता के धन की बर्बादी करना, जांच करवाने की फरमाइश और संसद का गतिरोध, आतंक के सफाये के स्थान पर नये आतंकवाद का नामकरण कर देना आदि-आदि बहुत कुछ ऐसा है जो कल चैन से बैठने नहीं देगा।

आज के लिए नहीं आने वाले कल के लिए आइये अब दृढ़ता के साथ संकल्प करें। क्या करें यह हम नहीं बतायेंगे, आप स्वयं तय करें, बस कुछ सकारात्मक संकल्प करें। हमने अपने लिए बहुत कुछ किया अब कुछ देश के लिए भी करें। अपने लिए धन बहुत कमाया अब देश के धन का सदुपयोग करें। कुछ ऐसा करें जो सार्थक हो और जो देशहित में भी हो।

नववर्ष की शुभकामनाओं के साथ....


ScrapU



30 दिसंबर 2009

नए वर्ष के पहले ये संकल्प कर लें

हालांकि नये वर्ष की शुभकामनाओं का आदान-प्रदान तो कल के बाद शुरू होना चाहिए, इस कारण आज किसी को शुभकामनाएँ नहीं।
हाँ, आप सभी से आग्रह है, निवेदन है
नये वर्ष में विमर्श के नाम पर किसी विवाद को जन्म न देने का।
अपने दिलों से दूसरों के प्रति नफरत का भाव न आने देने का।
सबके प्रति प्रेम, स्नेह का भाव बनाये रखने का।

शायद कठिन कार्य है......इसीलिए आज ही निवेदन है। कल का पूरा दिन और रात के बारह बजे तक का समय है विचार करने के लिए। सोचिएगा कि आज के समाज को किस बात की सबसे अधिक आवश्यकता है?
कल रात के बाद से नये संकल्प के साथ नये वर्ष की शुरुआत करिएगा। ऐसा होगा न!!!!


21 दिसंबर 2009

आत्मविश्वास और साहस की पहचान है ये खिलाड़ी..शाबास

अभी पिछले दिन ताऊजी के खुल्ला खेल फर्रुखावादी को देख रहे थे। समीर भाई के आयोजन में खेले जाने वाले खेल में एक चित्र देखा जिसको एक दूसरे चित्र ने ढाँक रखा था। सवाल जिस चित्र के बारे में पूछा गया था उस चित्र का जितना हिस्सा दिख रहा था उससे साफ जाहिर था कि ये किसी खिलाड़ी का चित्र है और ऐसा खिलाड़ी जो पैर से विकलांग होने के बाद भी लम्बी कूद में भाग ले रहा है। इसके बाद भी कृत्रिम पैर का हिस्सा जिस तरह से दिख रहा था उससे एक प्रकार की शंका भी उत्पन्न हो रही थी। कभी भ्रम होता कि कहीं ऐसा तो नहीं कि लम्बी कूद में भाग लेने वाले खिलाड़ी की आड़ में कुछ और दिख रहा हो?





वैसे शायद आम चित्र होता या आम सवाल होता तो इसके जवाब के लिए हमें कोई कौतूहल न होता किन्तु चित्र में छिपी महिला खिलाड़ी को देखकर उसके जवाब को बिना देखे नहीं रहा गया। (कृपया महिला शब्द पर ध्यान न दें, हमारा कौतूहल उस खिलाड़ी को लेकर था जो पैर से विकलांग-जैसा सोच रखा था-होने के बाद भी लम्बी कूद में हिस्सा ले रहा था।)

जवाब देखा तो आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। महिला खिलाड़ी पैर से विकलांग थी और इसके बाद भी लम्बी कूद में हिस्सा ले रही थी। चित्र के जवाब के साथ उस खिलाड़ी का पूरा परिचय बताने सम्बन्धी लिंक भी दी गई थी। समीर जी को उनके सहयोगी डाक्टर झटका सहित इस कार्य के लिए बधाई।



उस खिलाड़ी का नाम है Annette Roozen, जिसका जन्म 11 मार्च 1976 को हुआ था। लगभग सोलह वर्ष की होने पर उसका एक पैर हड्डी के कैंसर के कारण घुटने के ऊपर से काटना पड़ा। बाद में कृत्रिम पैर के साथ उन्होंने एथलैटिक्स की तैयारी शुरू की और परिणाम आपके सामने है। (लिंक पर क्लिक कर विस्तार से पढ़ें)




ज्यादा कुछ न कहते हुए उनके आत्मविश्वास और साहस को नमन। आप भी साथ में दी गई लिंक के द्वारा उनके बारे में देख-पढ़ सकते हैं। (एक लिंक यहाँ भी है, इसे भी देख सकते हैं)

साथ में दिया गया वीडियो उनके वीजिंग में हुई प्रतियोगिता में भाग लेने का है। (यह लिंक वीडियो के लिए है)

कृपया देखें अवश्य। ऐसे लोगों को देखकर प्रेरणा मिलती है।


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चित्र गूगल छवियों से साभार लिए हैं। इसके अलावा अन्य सभी लिंक का उपयोग करने का भी आभार व्यक्त करते हैं।

19 नवंबर 2008

ये बच्चे हिंदुस्तान के हैं.......

"मैं नहीं जानता कि दिन क्या है?
मैं नहीं जानता कि रात क्या है?
मैं ये भी नहीं जानता कि क्या सुबह, क्या शाम?
मैं नहीं जानता रात के तारे-चांदनी?
मैंने नहीं देखी सुबह की ओस?
मैं नहीं जान सका कब उगा सूरज गुलाबी रंग में
और कब ढल गया फ़िर वो गुलाबी रंग में?
मैं नहीं जानता......??????????"
नहीं जनाब ये कोई कविता नहीं..........न ही किसी कवि की कल्पना है. ये हकीकत है आज के भारत देश में टहलते उन बच्चों की जो अपने बचपन को भुला कर किसी न किसी रूप में स्वयं को मजदूर की श्रेणी में शामिल कर दे रहे हैं. सुबह की टहल के बाद किसी जगह पर चाय पीने के लिए रुके आपके कदमों की आहात के नीचे किसी बालक का बचपन दबा होता है. शाम को दिन भर की थकान मिटाने के लिए किसी फास्ट-फ़ूड की दूकान पर खड़े होकर चटपटी जायकेदार चीजों के जूठे बर्तनों के नीचे किसी का बचपन सिसक रहा होता है.
क्या यही भारत का भविष्य है????? क्या यही हमारे भावी-भाग्य-विधाता हैं?????? सोचिये. बाल मजदूरों की बढ़ती संख्या से समाज को चिंतित होना चाहिए पर ऐसा नहीं हो रहा है. सबको स्वार्थ-पूर्ति में रत देखकर लगता है कि सरकार के क़ानून बनाने से पहले हमें ख़ुद एक तरह के क़ानून को अमल में लाना होगा. हमें अपने कामों के लिए बच्चों को मजदूर के रूप में तलाश करने की आदत को त्यागना होगा. घर के किसी भी काम के लिए काम वाली बाई के साथ उसके बच्चों से काम लेने की प्रवृत्ति को छोड़ना होगा. और भी बहुत है जो हम आसानी से कर सकते हैं और वो भी बिना किसी परेशानी के.
चलिए हम सब समाज सेवा का बीडा न उठाएं, किसी गरीब के बच्चों को पढ़ने-लिखाने या उनको जिम्मेवार नागरिक बनाने की कसम न खाएं, किसी बाल-मजदूर को मुक्त करने का जोखिम न लें पर क्या इतना भी करना हमारे लिए मुश्किल है कि हम ख़ुद किसी बच्चे से काम न लें?
ये तो मुश्किल नहीं बस मन में संकल्प लें और जुट जाएँ कि आज नहीं तो कल हमारा देश, समाज बाल-मजदूर के अभिशाप से मुक्त होगा। तब हम बड़ी ही शान से कह सकेंगे.............."ये बच्चे हिन्दुस्तान के हैं, ये बच्चे अपनी शान के हैं..................................."

28 अक्टूबर 2008

इस दीपावली पर करें एक संकल्प

आज दीपावली है, घरों में रंग-बिरंगी रोशनी है, बच्चे खुशी से चहक रहे हैं, बड़े घर में होने वाली पूजा आदि के लिए सामानों की खरीददारी में लगे हैं, घर की महिलायें दीपावली को सुखद, पावन बनाने के लिए प्रयासरत हैं. कुल मिला कर सभी लोग किसी न किसी रूप में व्यस्त हैं. आप-हम भी व्यस्त हैं पर क्या इस व्यस्तता के बीच एक-दो पल को समय निकल कर दीपावली की सार्थकता के बारे में विचार करेंगे?
विचार बस इतना है कि इस दीवाली पर भी हजारों-हजार रुपये के पटाखे फोड़ दिए जायेंगे, अन्य दूसरे तरह की आतिशवाजी में भी पैसे को खर्च किया जायेगा, लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के नाम पर कुछ लोग जुए में हजारों रुपये की हारा-जीती करेंगे. आपको क्या लगता है ये सब होना चाहिए?........अरे साहब होना ही चाहिए, आख़िर वर्ष-वर्ष का त्यौहार है.......पार्टी, मस्ती, हंगामा, धमाल सब कुछ जो भी हो सकता है वो होना चाहिए।
बिल्कुल सही, आख़िर खुशी का त्यौहार है, खुशी मनाई भी जानी चाहिए पर आतिशबाजी को फोड़ते हुए एक पल को रुक कर सोचिये कि क्या उसको इस समय खुशी मिल रही होगी जिसने अपने बेटे को किसी जातिवाद, क्षेत्रवाद के जहर के कारण खोया है?
  • क्या उस व्यक्ति को खुशी मिल रही होगी जिसके घर में पिछले तीन-चार वर्षों से खाने को कुछ भी हुआ नही है?
  • क्या वे लोग इस त्यौहार को खुशी से मना सकते हैं जिन्हों ने आतंकवाद के धमाके में अपने परिवारीजनों को खोया है?
  • क्या वे लोग खुशी का अनुभव कर सकते है जिन्हों ने किसी न किसी दूषित वातावरण के कारण अपने आपको या अपने ख़ास को बीमार बना दिया है?
  • क्या वो इस समय खुशी मनायेगा जिसका कोई अपना किसी की लापरवाही के कारण मौत का शिकार हो गया है?
ज़रा सोचिये............अरे....अरे.......अरे.......आप तो वाकई इतना सोचने लगे? इतना भी सोचने की जरूरत नहीं क्योंकि इतना सोचने के बाद भी कुछ नहीं होता...........सिवाय सोचने के. यदि वाकई आप इन लोगों के लिए कुछ (कुछ भी) करना चाहते हैं, अपनी खुशियों का सही आनंद उठाना चाहते हैं तो इस दीपावली पर एक छोटा सा संकल्प कर लीजिये और उसको हर वर्ष निभाइए। फ़िर देखिये आपके त्यौहार, आपके उमंग, आपकी खुशी की मात्रा और कितनी अधिक बढ़ जाती है.
  • बस करिए ये कि आप संकल्प करिए हर वर्ष दीपावली के दिन एक पौधा लगाने का।
  • आप तमाम तरह की मिठाई खाते-खिलाते हैं, अनेक व्यंजन आप और आपके महमान खाते हैं प्रतिवर्ष किसी भी भूखे को भरपेट भोजन कराइए.
  • हजारों रुपये की आतिशबाजी को फोड़ने के साथ-साथ कुछ थोड़ी सी आतिशबाजी उस बच्चे-बच्ची को भी दे दे जिसका कोई नहीं है तो आपको अपनी आतिशबाजी में और भी रंग नजर आयेंगे।
  • देवी-देवता किसी भी तरह से जुआ खेलने से प्रसन्न नहीं होते, आप भी जुआ न खेलें, भले ही आप हमेशा जीतते हों बस ये करें कि जितना भी जीतने कि गुंजाईश हो उतने रुपये से किसी गरीब छात्र-छात्रा की स्कूल फीस भर दे, उनको पुस्तक आदि खरीदवा दे, आप पर वाकई लक्ष्मी जी मेहरबान हो जायेंगी।
और भी बहुत कुछ है जो आप कर सकते हैं बस थोड़ा सा इस तरफ़ भी सोचिये. अपनी खुशी को कम न करिए, अपनी आतिशबाजी को कम न करिए, अपने दीयों की रोशनी को कम न करिए पर साथ में उनका भी ख्याल रखिये जो ये सब नहीं कर सकते. करके देखिये ऐसा, वाकई बहुत आनद आएगा.
आप सबको आपके परिवार सहित दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें
ऊपर अपने मन की बात कुछ बस यूँ ही लिख दी है आपको अच्छा लगे तो अवश्य संकल्प करिए अन्यथा आप पटाखे तो फोड़ ही रहे हैं, लोग उनकी धमक और रोशनी तो देख ही रहे हैं................