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28 मई 2022

वीर सावरकर और सेलुलर जेल की कोठरी

घूमने का शौक बचपन से रहा है. भले ही देश में भी बहुत सारी जगहों पर घूमना न हो पाया हो मगर अपने आसपास घूम कर अपने शौक को पूरा कर लिया करते हैं. ये तो घूमने वाली एक बात हुई मगर दूसरी बात ये कि देश के बहुत सारे स्थानों को देखने की इच्छा रही है, अभी भी है. ऐसी ही जगहों में एक जगह सेलुलर जेल हुआ करती थी. बचपन से पढ़ाई के दौरान, परिवार से मिलती जानकारी के कारण से अंडमान निकोबार द्वीप समूह को काला पानी के नाम से ही पहचानते थे. उसमें भी उस काला पानी में सेलुलर जेल का नाम सुन रखा था. बचपन में तो नहीं मगर जैसे-जैसे समझ आती रही, बचपन की पकड़ से बाहर आते रहे, सेलुलर जेल को देखने की, वहाँ की मिट्टी को माथे लगाने की इच्छा बलबती होती रही. कालांतर में वीर सावरकर जी के बारे में पढ़ने को मिला तो न केवल सेलुलर जेल को बल्कि उस कोठरी को भी नमन करने का मन होने लगा जहाँ वीर सावरकर को कैद किया गया था. 


समय गुजरता रहा, मन में अंडमान निकोबार जाने की, सेलुलर जेल दर्शन की अभिलाषा और विकट रूप धारण करती रही. आखिरकार एक दिन ऐसा आ ही गया कि अंडमान निकोबार जाने का, पोर्ट ब्लेयर की धरती छूने का, सेलुलर जेल की मिट्टी को माथे लगाने का सुअवसर आ ही गया. दिल्ली से उड़े हवाई जहाज ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस एयरपोर्ट के दर्शन करवाते हुए वीर सावरकर एयरपोर्ट पर उतार दिया. हवाई जहाज से बाहर आने पर वीर सावरकर जी का नाम देखकर सिर स्वतः ही उनके प्रति श्रद्धा से झुक गया.


अपने छोटे भाई के घर पहुँचने के बाद सबसे पहले सेलुलर जेल के दर्शन किये गए. जेल की सभी जगहों को अपने हिसाब से देखा, उनका एहसास किया गया. सेलुलर जेल अपनी जिस मूल स्थिति में थी, अब वैसी नहीं है. मूल रूप में यह जेल सात शाखाओं में बनाई गई थी. बाद में इसकी चार शाखाएँ स्थानीय लोगों द्वारा ही नष्ट कर दी गईं. अब इस जेल की कुल सात शाखाओं में से केवल तीन शाखाएँ शेष बची हुई हैं.


सेलुलर जेल का मॉडल 

तीन मंजिल की इस जेल का नाम सेलुलर जेल रखने के पीछे का कारण इसका रूप-विन्यास भी है. इसमें प्रत्येक शाखा में कई-कई कोठरियाँ हैं. सभी कोठरी इस तरह से बनी हैं कि किसी कोठरी में कैद व्यक्ति दूसरी कोठरी को नहीं देख सकता था. एक सेल की तरह से बने होने के कारण इसे सेलुलर जेल कहा गया. इसी में एक मंजिल पर सीढ़ी के पास ही वीर सावरकर सेल की पट्टिका लगी हुई है. जब हम लोग यहाँ घूम रहे थे तो इस जेल में शेष बची इमारत की कोठरियों के एक जैसे दिखने के कारण वीर सावरकर सेल वाली पट्टिका देखने के बाद उस तरफ जाना हुआ. ये सुन-पढ़ रखा था कि वीर सावरकर को इसी जेल की किसी कोठरी में कैद किया गया था. 


एक सेल के किनारे पर लगी इस पट्टिका के बारे में जानकारी करने के बाद मालूम हुआ कि इसी मंजिल पर वीर सावरकर को एक कोठरी में कैद करके रखा गया था. ऐसा मालूम पड़ते ही एक सिरहन सी पूरे शरीर में दौड़ गई. पैर ऐसा महसूस होने लगे जैसे उनमें शक्ति बची न हो. जैसा पढ़ते आये थे, उसका ध्यान अचानक से आते ही आँखों के सामने अँधेरा जैसा समझ आने लगा. अपने आपको एक पल में संयत करके उस कोठरी के दर्शन करने को कदम बढ़ाये जहाँ वीर सावरकर ने अपना लम्बा जीवन व्यतीत किया था. हम लोग पूरी श्रद्धाभाव से, तन-मन में सिरहन लिए, आँखों में पानी लिए सेलुलर जेल के कोने-कोने को जैसे आत्मसात करने के लिए घूम रहे थे. ऐसी स्थिति में जब उस कोठरी के सामने पहुँचे जहाँ वीर सावरकर को कैद में रखा गया था तो आँखों से आँसू स्वतः ही बह निकले. सभी कोठरियों में सामान्य एक गेट था मगर वीर सावरकर की कोठरी को दो फाटकों से बंद किया गया था. तत्कालीन अंग्रेज अधिकारियों को इतने से भी संतोष नहीं था, उन्होंने वीर सावरकर को डराने, भयभीत करने के लिए ऐसी कोठरी में रखा था जो फाँसीघर के सबसे नजदीक थी. उन अंग्रेजों का मानना था कि फाँसी लगाए जाने के दौरान आती चीखों से घबराकर किसी दिन वीर सावरकर भी टूट जायेंगे.


सावरकर कोठरी, इसे दो फाटकों से बंद किया गया था 

इसी शाखा में सबसे अंत में है कोठरी सावरकर जी जहाँ कैद रखे गए 

वीर तो वीर ही होता है और सावरकार तो वास्तविक में वीर थे, जिन्होंने सेलुलर जेल से भाग निकलने का दुस्साहस किया. भारतीय इतिहास में वे एकमात्र व्यक्ति हैं जिनको दो बार काला पानी की, सेलुलर जेल की सजा दी गई. ये भी तथ्य बहुत कम लोगों को ज्ञात होगा कि इतिहास में वे ही एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जिनके साथ उनके भाई को भी सेलुलर जेल में सजा काटने भेजा गया था. आश्चर्य देखिये कि एक ही जेल में बंद दो भाइयों को महीनों तक इसकी जानकारी ही नहीं हुई कि दो सगे भाई एकसाथ एक ही जेल में सजा काट रहे हैं.


वीर सावरकर जी की कोठरी में कुछ समय बिताने के बाद, उनकी फोटो के सामने अपनी मनोभावनाओं को प्रकट करने के बाद भी वहाँ से जाने का मन नहीं कर रहा था. दिल में, मन में अत्यंत श्रद्धाभाव लेकर, सावरकर जी के प्रति, तमाम वीर सेनानियों के प्रति कृतज्ञता भाव लेकर, उनका आशीष लेकर हम लोग वास्तविक धाम के, क्रांतिधाम के दर्शन करके घर लौट आये. हमारा अपना व्यक्तिगत विचार ये है कि देश भर के किसी व्यक्ति को अपने जीवन में भले ही अपने धार्मिक स्थल के दर्शन का अवसर न मिले मगर एक बार सेलुलर जेल के, इस क्रांतिधाम के दर्शन अवश्य करने चाहिए.


वीर सावरकर जी को उनकी जन्मतिथि पर सादर नमन. 


सावरकर कोठरी में 

सेलुलर जेल के सामने बने पार्क में 




28 मई 2019

आज़ादी के वीर बाँकुरे को नमन


अंग्रेज़ी सत्ता के विरुद्ध भारत की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाले विनायक दामोदर सावरकर का जन्म 28 मई 1883 को नासिक के भगूर गाँव में हुआ था. वे बीसवीं शताब्दी के सबसे बड़े हिन्दूवादी थे. उन्हें हिन्दू शब्द से बेहद लगाव था. वे कहते थे कि उन्हें स्वातन्त्रय वीर की जगह हिन्दू संगठक कहा जाए. उन्होंने जीवन भर हिन्दू, हिन्दी, हिन्दुस्तान के लिए कार्य किया. उनको अखिल भारत हिन्दू महासभा का छह बार राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया.
उन्हें आजीवन काला पानी की दोहरी सज़ा मिली थी. वे सन 1911 से सन 1921 तक अंडमान की सेल्यूलर जेल में रहे. सन 1921 में स्वदेश लौटने के बाद उन्हें फिर कला पानी की सजा सुनाई गई. सन 1937 में उन्हें मुक्त कर दिया गया था. उन्होंने सन 1947 में भारत विभाजन का विरोध किया. बाद में सन 1948 में महात्मा गांधी की हत्या में उनका हाथ होने का संदेह किया गया. अपने देशप्रेम के ज़ज्बे के चलते वे किसी आरोप से घबराये नहीं और कालांतर में अदालत ने उन्हें तमाम आरोपों से बरी किया. 


उनकी मृत्यु 26 फ़रवरी 1966 में मुम्बई में हुई. उनके निधन पर तत्कालीन भारत सरकार ने उनके सम्मान में एक डाक टिकट भी जारी किया. उनके ही सम्मान में पोर्ट ब्लेयर के हवाई अड्डे का नाम वीर सावरकर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा रखा गया.

आइये इसके साथ-साथ वीर सावरकर के बारे में कुछ तथ्य जान लें, शायद आपको भी जानकारी हो.

> वे भारत के पहले व्यक्ति थे जिन्होंने लंदन में अंग्रेजों के विरुद्ध क्रांतिकारी आंदोलन संगठित किया था.
> वे भारत के पहले व्यक्ति थे जिन्होंने सन् 1905 के बंग-भंग के बाद सन् 1906 में 'स्वदेशी' का नारा देकर विदेशी कपड़ों की होली जलाई थी.
> वे भारत के पहले व्यक्ति थे जिन्हें अपने विचारों और अंग्रेजी साम्राज्य के प्रति शपथ ने लेने के कारण बैरिस्टर की डिग्री खोई.
> वे पहले भारतीय थे जिन्होंने पूर्ण स्वतंत्रता की मांग की.
> वे भारत के पहले व्यक्ति थे जिन्होंने सन् 1857 की लड़ाई को भारत का स्वाधीनता संग्राम बताया और लगभग एक हज़ार पृष्ठों का इतिहास लिखा.
> वे दुनिया के एकमात्र लेखक हैं जिनकी किताब को प्रकाशित होने के पहले ही ब्रिटिश सरकारों ने प्रतिबंधित कर दिया था.
> वे दुनिया के पहले राजनीतिक कैदी थे, जिनका मामला हेग के अंतराष्ट्रीय न्यायालय में चला था.
> वे पहले भारतीय राजनीतिक कैदी थे, जिन्होंने एक अछूत को मंदिर का पुजारी बनाया था.
> उन्होंने ही पहला भारतीय झंडा बनाया था, जिसे जर्मनी में 1907 की अंतर्राष्ट्रीय सोशलिस्ट कांग्रेस में मैडम कामा ने फहराया था.
> वे एकमात्र व्यक्ति रहे जिन्हें दो बार कालापानी की सजा हुई.
> वे पहले कवि थे, जिन्होंने काग़ज़-कलम के बिना जेल की दीवारों पर पत्थर के टुकड़ों से कवितायें लिखीं. कहा जाता है उन्होंने अपनी रची दस हज़ार से भी अधिक पंक्तियों को प्राचीन वैदिक साधना के अनुरूप वर्षों स्मृति में सुरक्षित रखा, जब तक वे देशवासियों तक नहीं पहुँची.
> वे प्रथम क्रान्तिकारी थे, जिन पर स्वतंत्र भारत की सरकार ने झूठा मुकदमा चलाया और बाद में निर्दोष साबित होने पर माफी मांगी.


26 फ़रवरी 2019

वीर सावरकर को नमन


वीर सावरकर को याद करते हुए. आज, 26 फरवरी उनकी पुण्यतिथि है. विनम्र श्रद्धांजलि उस व्यक्तित्व को जिसने पूरे इतिहास में अकेले दो बार काला पानी की सजा पाई मगर राष्ट्रपिता की उपाधि से कोई और सम्मानित किया गया. ऐसे लोग जिनके परिवार का कोई व्यक्ति सेलुलर जेल में सजा काटने नहीं गया, वह देश का सर्वोच्च राजनैतिक परिवार माना गया मगर जिन दो भाइयों ने एकसाथ सेलुलर जेल में सजा काटी, वे अज्ञातवास काट रहे हैं.  

देश सबकुछ देख रहा है, सबकुछ याद किये है.... समय आने पर सब बदलेगा... सब बदलेगा.... याद रखना.