कुम्भ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
कुम्भ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

06 मार्च 2019

कुम्भ पश्चात् का प्रयागराज करेंगे कैद


महाशिवरात्रि के स्नान पश्चात् कुम्भ 2019 संपन्न हो गया. अनेकानेक वर्षों से चले आ रहे कुम्भ स्नान, पर्व की इस परम्परा में इस बार कई-कई तरह के नए आयाम जुड़े. देश के प्रधानमंत्री द्वारा और प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा इस सम्बन्ध में विशेष रुचि दिखाई गई. इसके कारण भी प्रशासनिक अधिकारियों में एक तरह की मुस्तैदी साफ़ तौर पर बनी रही. समूचे कुम्भ के दौरान स्वच्छता, सुरक्षा, अनुशासन आदि का संगम भी बखूबी बना रहा. स्वच्छता के सम्बन्ध में स्वयं प्रधानमंत्री ने प्रशंसा की तथा सफाई कर्मियों के प्रतिनिधियों के रूप में पांच व्यक्तियों के पैर भी पखारे. इस बार सांस्कृतिक झांकियों का बनाया जाना, प्रयागराज में सड़कों के किनारे बने मकानों अथवा अन्य इमारतों में भारतीय संस्कृति सम्बन्धी चित्रकारी ने आने वालों का मन मोह लिया. कुम्भ मेला परिसर में की गई लाइटिंग और सजावट आदि ने भी कुम्भ की रंगत को बढ़ा दिया था. यहाँ उद्देश्य कुम्भ के बारे में बताना नहीं वरन यह बताना भर है कि कई बार चाहने के बाद भी कुम्भ में न जा सके.  


यह हमारी अपनी दृष्टि से इसलिए दुखद है क्योंकि हम समूचे कुम्भ मेले को अपने कैमरे की निगाह से कैद करना चाह रहे थे. कुम्भ का अपना जो भी धार्मिक महत्त्व है वह अपना है ही मगर कहीं, किसी भी आयोजन में उससे सम्बंधित प्रदर्शनी, सजावट, उसकी व्यवस्था आदि से भी उस आयोजन के बारे में बहुत कुछ देखने-समझने को मिलता है. देश भर के हिस्सों से आये हुए लोगों के साथ-साथ विदेशों से आये हुए पर्यटकों से मिलना जानकारी में वृद्धि करता है, खुद अपने नजरिये को बढ़ाता है. ऐसा नहीं कि इस बार प्रयागराज कुम्भ में जाने का प्रयास नहीं किया, किया और वो भी एक बार नहीं तीन बार मगर कुम्भ को कैद करना हो ही नहीं पाया. हर बार किसी न किसी काम के चक्कर में यही सोचकर आगे के लिए कार्यक्रम बढ़ाते रहे कि अगले किसी दिन चले जायेंगे. ऐसा करते-करते दिन आगे निकलते रहे और बाद में ऐसी स्थिति बन गई कि फिर कुम्भ जाने का प्रोग्राम टालना ही पड़ा. 


हमारा उद्देश्य संगम में स्नान करना नहीं था क्योंकि प्रयागराज आना-जाना करते हुए दशकों बीत गए मगर कभी संगम स्नान का सुख नहीं लिया. ये और बात है कि अपनी प्रयागराज यात्रा में शायद ही किसी बार ऐसा हुआ हो जबकि संगम जाना न हुआ हो अथवा माँ गंगा का आशीष न लिया हो. इस बार भी कुम्भ स्नान से अधिक मन इस समूचे आयोजन को अपनी आँखों से देख हमेशा-हमेशा के लिए अपनी धरोहर बना लेना था. बहरहाल, जानकारी मिली है कि बहुत सी झांकियां, प्रदर्शनी अभी कुछ समय तक ज्यों की त्यों बनी रहेंगी. ऐसा भी ज्ञात हुआ है कि सजावट, लाइटिंग आदि भी लम्बे समय तक बनाये रखी जाएगी. ऐसे में जल्द ही कुम्भ समापन पश्चात् एक यात्रा प्रयागराज की तरफ की जाएगी. अबकी हमारा कैमरा कुम्भ आयोजन बाद के कुम्भ मेला परिसर को अपनी कैद में लेगा. देखा जाये तो यह भी संग्रहणीय होगा क्योंकि कई दिनों के अनुशासन, व्यवस्थित, सांस्कृतिक, रंगारंग स्वरूप के बाद संगम तट का रूप-रंग किस तरह से मन-मष्तिष्क को आकर्षित करता होगा.

24 फ़रवरी 2019

सफाईकर्मियों के पैर धोकर प्रधानसेवक ने किया वंदन


संभव है कि बहुतों के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कुम्भ सफाई कर्मियों के पैरों का धोना एक नाटकीय उपक्रम बताया जाये. ऐसा इसलिए क्योंकि विगत लगभग पाँच वर्षों में उन्होंने कोई भी ऐसा कदम उठाया, जिससे उनके विरोधियों को मुँह की खानी पड़ी हो तो उसको नौटंकी, घटिया राजनीति, चुनावी कदम बताया जाने लगा है. ऐसा उनके संसद में पहुँचने के ठीक पहले दिन से हो रहा है, जिस दिन उन्होंने संसद में प्रवेश के पहले अपना शीश झुकाया था. इसके पश्चात् अपने दल के सांसदों के बीच अपने पहले संबोधन में किसी बात को याद करते हुए उनकी आँखों के छलकने, आँसू आ जाने को भी सिर्फ नौटंकी बताया गया था. बाद में तो उनके ऐसे बहुत से कामों को विशुद्ध राजनीतिक कदम साबित करने की कोशिश की गई. स्वच्छ भारत अभियान, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान योजना, अटल पेंशन योजना, नमामि गंगे आदि को इसी से जोड़कर देखा जा सकता है. बहरहाल, इससे अलग हटते हुए मोदी जी के आज के कदम की प्रशंसा करनी चाहिए. इसके पीछे वर्तमान कुम्भ में चल रहे सफाई प्रयासों की चारों तरफ तारीफ़ हो रही है.


ऐसा नहीं है कि इससे पहले प्रयागराज में कुम्भ आयोजन के समय सफाई से सम्बंधित कार्य नहीं होते थे मगर इस बार जिस तरह से सम्पूर्ण क्षेत्र को स्वच्छता अभियान के दायरे में लाते हुए न केवल मैदानी हिस्से को वरन जलीय भागों, घाटों को जिस तरह से साफ़ रखा जा रहा है उससे स्नान करने वाले श्रद्धालुओं में ख़ुशी की लहर दिखाई दे रही है. नदी में स्नान करने के दौरान श्रद्धा-भक्ति से परिपूर्ण श्रद्धालुओं द्वारा पुष्प सहित अन्य सामग्री प्रवाहित की जाती है. कुम्भ अधिकारियों द्वारा किसी भी श्रद्धालु को इससे रोका या वंचित नहीं किया जा रहा है वरन अपने स्तर से उसकी सफाई की योजना बना रखी है. श्रद्धालुओं के ऐसी कोई भी सामग्री प्रवाहित करने के तुरंत बाद वहाँ तैनात सफाईकर्मी जाल डाल कर उस सामग्री को बाहर निकाल लेते हैं. यह कदम जहाँ एक तरह श्रद्धालुओं को उनके भक्ति-भाव से वंचित नहीं कर रहा है वहीं दूसरी तरफ संगम सहित दोनों नदियों की सफाई के प्रति भी सम्बंधित पक्ष की जिम्मेवारी दर्शा रहा है. इसके अलावा शौचालयों की सफाई, कुम्भ परिसर की सफाई, स्नान के बाद घाटों के किनारे पर पड़ी पुआल आदि सहित महिलाओं के वस्त्र बदलने सम्बन्धी स्थलों की सफाई के प्रति भी सजगता स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है. 

देश के प्रधानमंत्री द्वारा कुम्भ के सफाईकर्मियों के पैरों की सफाई एक सांकेतिक कार्य है जो स्पष्ट सन्देश देता है कि समाज में जिन सफाईकर्मियों को देखते ही लोग नाक-भौं सिकोड़ने लगते हैं, खुद को उनसे बचाने का काम करने लगते हैं उनको यह समझने की आवश्यकता है कि वे भी एक इन्सान हैं जो हमारे द्वारा फैलाई गन्दगी को साफ़ करने का कार्य करते हैं. यकीनन मोदी जी का यह कदम उन सभी सफाईकर्मियों को प्रोत्साहित करेगा जो कुम्भ में कार्य कर रहे हैं. इसके अलावा उन सफाईकर्मियों में भी गौरव की अनुभूति पैदा करेगा जो देश के किसी भी हिस्से में समाज के लिए सफाई लाने का काम कर रहे हैं. भव्य कुम्भ, दिव्य कुम्भ की परिकल्पना सिर्फ शब्दों में ही नहीं दिखाई दे रही है. किसी समय भगवान श्रीराम के द्वारा शबरी के जूठे बेर खाए जाने की अवधारणा कोई कल्पना नहीं है, यह भी इससे स्पष्ट हुआ. प्रधानमंत्री के इस कदम से समाज से भेदभाव दूर होने में मदद मिले, ऐसी कामना की जा सकती है.