कई वर्षों के बाद
संदीप का उरई आना हुआ. प्रयागराज से सरप्राइज यात्रा के साथ रात को लगभग नौ बजे
उसका उरई आना हुआ. घर पहुँचकर सामान्य हाल-चाल का आदान-प्रदान होने के बाद, चाय-जलपान के बाद दस बजे करीब
स्कूटर उठाकर अपने समय की उरई को खोजने निकला गया. दोनों मित्र रात को बहुत देर तक
उरई की सड़कों-गलियों में स्कूटर को दौड़ाते हुए पुराने दिनों में घूमते रहे, बीती बातें याद करते रहे. अबकी चमकती, रौशनी से
जगमगाती, सीसी रोड पर दौड़ती उरई में वो बात नजर नहीं आती जो
हमारे समय की उस उरई में थी.
बहरहाल, नवीनता का स्वागत करते हुए, विगत को
याद करते हुए बजाय तमाम सारी फोटोग्राफी करने के हम दोनों मित्र
घूमते-बतियाते-ठहाके लगाते उरई के रंग में रँगे रहे.
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