देश में कोई पहली बार तो SIR हो नहीं रहा है. पहला विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) सन 1952 के आम चुनाव के दौरान किया गया था.
अबकी बार इतने विरोध का कारण क्या है?
यदि ज्ञानेश कुमार ने अपने दम पर भाजपा के विरोधी मतदाताओं के नाम कटवा दिए तो ऐसे व्यक्ति को विशेष सुरक्षा देकर किसी बड़े काम में लगाना चाहिए क्योंकि यह तो त्रिकालदर्शी हुआ. यह तो मतदाता सूची पढ़कर ही बता देता है कि कौन भाजपा को वोट करेगा, कौन नहीं करेगा. अरे, दिमाग से पैदल लोगो, एक बात पर गौर करो कि SIR के लिए सम्बंधित लोगों की जानकारी को क्या ज्ञानेश कुमार ने अपने घर पर भर दिया? जानकारी देते समय सभी से, तुम विरोधियों से भी, तुम्हारे बाप-अम्मा, दादा-दादी, नाना-नानी आदि-आदि की जानकारी लेकर क्या गलत किया जा रहा?
रही बात वोट चोरी की तो ज्ञानेश कुमार तो आये फरवरी 2025 में और तुम लोग चुनाव हार रहे 2014 से. अब SIR तुमको इसलिए बेकार लग रही, काहे कि अवैध वोटर कट गए, वे बाहर हो गए, जिनको अपने बाप-दादा का पता नहीं. जिन अवैध
घुसपैठियों को तुम सबने अपना बाप बना रखा था, उनके भागने की स्थिति बनते देख तुमको देश का सिस्टम
बेकार लगने लगा.
दिमाग लगाना सीखो, न कि
आरोप.
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