कॉलेज टाइम में सींकिया टाइप लौंडों को रंगबाजी दिखाते समय काव्य-पंक्तियाँ
स्वतः ही उभरती थीं....
"हाथ अगरबत्ती,
पैर मोमबत्ती,
सीना संदूक,
गाँ@@ बन्दूक,
......
......"
आज ये पंक्तियाँ फिर अनायास ही उभर आईं, जब कोकरोचों के विरोध प्रदर्शन में देखने-सुनने को मिला कि
संसद को उखाड़ देंगे, देश को नेपाल बना देंगे, प्रधानमंत्री को संसद में घुस कर मारेंगे, रंडुओं को
देश कैसे दे दिया आदि-आदि. ऐसे विचार रखने वाले कथित प्रेशर ग्रुप के सामने शिक्षा
मंत्री का ही क्या, किसी छात्र-संघ के पदाधिकारी का भी
इस्तीफ़ा नहीं होना चाहिए. विपक्षी दलों की चाल एक बार फिर सरकारी दृढ़ता के सामने
विफल हुई, ये अच्छी बात है. कम से कम पढ़े-लिखे लोगों को इस
बात को समझना चाहिए.
एक तरफ इसरो जैसी सरकारी, स्थायी नौकरी को छोड़कर 35-36 वर्ष के दो युवकों ने
अन्तरिक्ष में अपनी उड़ान को सिद्ध किया, दूसरी तरफ ऐसे युवा
हैं जिनको कोकरोच बने रहने में गर्व हो रहा है; संसद उखाड़ने
के मंसूबे हैं; देश को नेपाल बनाने की मानसिकता है. ऐसे
युवाओं में पुलिस की लाठी के साथ-साथ जनमानस के जूते भी पड़ने चाहिए थे.
इन्हीं के लिए फिर कहेंगे...
"हाथ अगरबत्ती,
पैर मोमबत्ती,
सीना संदूक,
गाँ@@ बन्दूक,
......
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