15 मई 2026

प्रतियोगी परीक्षाएँ और सुरक्षा जाँच का झमेला

प्रतियोगी परीक्षाएँ और पहनावे को लेकर बहुत सी पोस्ट सामने आती हैं. प्रशासन के द्वारा परीक्षा शुचिता के नाम पर अपनाये जाने वाले बहुत से कदमों का विरोध हम भी करते हैं. परीक्षा केन्द्र पर कलावा कटवाना, विवाहित महिलाओं का मंगलसूत्र उतरवाना, चेन लगी पैंटों में से चेन काटना आदि-आदि ऐसे कृत्य हैं जिनका लगातार विरोध होता है. इसके बाद भी एक बात को सहज रूप में स्वीकारते भी हैं कि परीक्षा के समय के पहनावे, साथ में लायी जाने वाली सामग्री, प्रतियोगी द्वारा क्या-क्या करना है, क्या-क्या नहीं करना है आदि-आदि के बारे में दिशा-निर्देश प्रवेश-पत्र पर स्पष्ट रूप से दिए जाते हैं. शासन-प्रशासन की तरफ से जारी किये गए प्रवेश-पत्र पर स्पष्ट रूप से दिए गए निर्देशों को या तो पढ़ा नहीं जाता है अथवा पढ़कर भी अनदेखा कर दिया जाता है. स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए होने के बाद भी यदि प्रतियोगी विद्यार्थी गलती करता है तो भले ही ऐसा अनजाने में हुआ हो मगर इसके लिए स्वयं विद्यार्थी को और अभिभावक को ध्यान रखना चाहिए. उनको इस बात का स्मरण होना चाहिए कि वे किसी प्रतियोगी परीक्षा के लिए जा रहे हैं, जिसके लिए साल भर मेहनत की गई है. ऐसी स्थिति में भी यदि लापरवाही विद्यार्थी की तरफ से हो रही है तो इसका साफ़ सा अर्थ है कि विद्यार्थी परीक्षा के लिए न तो ईमानदार है और न ही सजग.  

 

ये मान लिया जाये कि सारे दिशा-निर्देश दिए होने के बाद भी यदि विद्यार्थी उन पर ध्यान नहीं दे रहा है तो यहाँ एक बात प्रशासन को भी ध्यान रखनी चाहिए कि तमाम सारी कवायद के बाद भी पेपर लीक होने की घटनाएँ हो जाती हैं. ये घटनाएँ उस समय तो हो नहीं रही होती हैं जबकि विद्यार्थी परीक्षा केन्द्र के मुख्य द्वार पर खड़ा होता है. ऐसा भी नहीं है की वह कलावा में, मंगलसूत्र में, बड़े बालों में किसी तरह की अदृश्य तकनीक को छिपाकर ले जा रहा होगा. इसलिए ऐसे में उनके द्वारा सुरक्षा के नाम पर, जाँच के नाम पर अनावश्यक कदमों को उठाकर परीक्षार्थियों को परेशान नहीं करना चाहिए. उनको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि पेपर लीक करवाने वाला न तो कलावा पहने होगा, न चेन वाली पेंट पहने होगा, न मंगलसूत्र पहने होगा, न फुल बाँह की शर्ट पहने होगा. जिसे पेपर लीक करने का खेल करना होता है, परीक्षार्थी को पास करवाने का ठेका लिया होता है वे शासन-प्रशासन के इंतजामों से कहीं आगे का इंतजाम किये होते हैं. ऐसे अपराधियों की धरपकड़ होती भी है, होनी ही चाहिए ताकि उन विद्यार्थियों के साथ गलत न हो सके जो मेहनत के साथ तैयारी करके अपना भविष्य बनाने के लिए परीक्षा में बैठते हैं. बावजूद इसके शासन-प्रशासन द्वारा अनावश्यक रूप से उठाये जाने वाले कदमों पर रोक लगनी चाहिए, उनको नियंत्रित होना चाहिए.

 

क्या चाहता है शासन-प्रशासन कि कल को परीक्षार्थी सिर्फ चड्डी-बनियान में परीक्षा-केन्द्र पर उपस्थित हो?


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