11 जुलाई 2026

मूड फ्रेश करने वाली सीरीज

आम तौर पर फिल्म/वेब सीरीज देखना न के बराबर होता है. महीनों के हिसाब से देखना होता है. इधर कई महीने बाद मित्रों के कहने पर और मोबाइल पर आती रील्स को देखकर एक वेब सीरीज 'प्रीतम एंड पेड्रो' देखने का मौका निकाला. मित्रों ने इस सीरीज के केन्द्र में रखी गई 'साइबर एक्टिविटी' को देखने के कारण ही हमसे भी इसे देखने को कहा. चूँकि फिल्मों/वेब सीरीज का देखना न के बराबर होता है, इसीलिए इन पर लिखना भी न के बराबर होता है. साइबर के नाम पर बनी इस सीरीज को देखने के बाद लगा कि बच्चे के अपहरण की घटना को आड़ बनाकर साइबर एक्टिविटी को जबरिया ठूँसा सा गया है. 


असल बात जो हमें बतानी है वो ये कि सीरीज तो मंत्री के बेटे 'बिन्नी' के अपहरण  के दस मिनट बाद ही निपट जाती मगर दो-तीन बड़ी-बड़ी कमियों/गलतियों के कारण छह भागों तक भागती रही.




==>> सबसे बड़ी ग़लती ये है कि साइबर एक्सपर्ट लगातार मोबाइल के सहारे ही अपराधी को पकड़ने की कोशिश करता है; संदिग्ध लोगों के मोबाइल के सहारे आगे बढ़ता है; बिन्नी का लैपटॉप खँगालता है; उसके एक गेम खेलने की बात पकड़ता है मगर उसके माता-पिता से उसके मोबाइल के बारे में नहीं पूछता है. यदि पूछ लेता तो तुरंत ही वह बिन्नी को खोज निकालता. ऐसा इसलिए क्योंकि अंत में जब बिन्नी को खोज लिया जाता है तो वह घर में ही मोबाइल ही चला रहा होता है.


==>> दूसरी ग़लती ये पकड़ में आई कि बिन्नी के अपहरण के बाद के दृश्य में घर में पुलिस के साथ खोजी कुत्ते भी टहलते दिख रहे हैं मगर वे बिन्नी को सूँघ कर खोज नहीं पाते हैं.


==>> तीसरी एक और गलती कि अपहरण करने वाले व्यक्ति की बातें सुनी जाती हैं, उससे बात की जाती है, बिन्नी की ऊँगली कटी हाथ की फोटो देखी जाती है मगर कोई भी उससे नहीं कहता कि बिन्नी से बात करवाओ.


ये गलतियाँ मुख्य इसलिए लगीं क्योंकि बिन्नी को खोजने में एक साइबर एक्सपर्ट लगा होता है और एक क्राइम ब्रांच का एक्सपर्ट, इसके बाद भी ये जरा-जरा सी बातें उनके दिमाग में क्यों नहीं आती? कह नहीं सकते कि इन गलतियों पर जानबूझकर ध्यान नहीं दिया गया या फिर सीरीज को साइबर एक्टिव दिखाने के लिए गलतियाँ देखी ही नहीं.


सीरीज को मजे के लिए देखा जाये तो ठीक है. ये सोचकर तो बिलकुल न देखा जाये कि साइबर क्राइम, साइबर सिक्योरिटी, साइबर एक्टिविटी के रूप में कुछ नया देखने को मिलेगा. हलकी-फुलकी, कहीं हँसी-मजाक, कहीं संवेदना के साथ यह सीरीज मूड फ्रेश कर सकती है.


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