जिस तरह से अश्लीलता, सेक्स, नंगपन, कामुकता आदि को
ग्लोरिफाई करके मोबाइल के माध्यम से रील्स बनाकर, लाइव शो के
रूप में, गीत-संगीत-कार्यक्रम के द्वारा लोगों के दिमाग में
घुसाया जा रहा है, उस पर रोक लगाने की आवश्यकता है. चौबीस
घंटे नग्न/अर्धनग्न देह, यौन-सम्बन्धों में लिपटे दृश्य,
अश्लीलता में रचे संवाद, कामुकता में रचे
हाव-भाव के निर्बाध प्रदर्शन, प्रसारण के दुष्परिणाम की को
अभी हम लोग गम्भीरता से समझ नहीं रहे हैं. फुटकर-फुटकर में सामने आती कुछ घटनाओं
पर रोना रो लेते हैं, कुछ विरोध प्रदर्शन कर लेते हैं,
कुछ अपराधियों की ठुकाई कर लेते हैं और अपने कर्तव्य की इतिश्री कर
लेते हैं.
समाज में फैलता जा रहा लिजलिजापन धीरे-धीरे हमारे परिवारों में, हमारे दिल-दिमाग में भी फैलता जा
रहा है. किसी बेटी, महिला के साथ होने वाली किसी अमानुषिक
घटना पर अपना रोष प्रकट कर लेते हैं, कुछ कठोर
विचाराभिव्यक्ति कर लेते हैं और फिर वापस उसी लिजलिजेपन में लोट लगाने लगते हैं. लगभग
मुफ्त के भाव से मिलते इंटरनेट से मुफ्त में मिलती कामुकता, नग्न
देह, सेक्स को रोके जाने के लिए हम सबको जागना होगा. यदि आज
ऐसा करने को न उठे तो कल को दरिंदगी वाली घटना का शिकार.......?????????
समझे??
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