16 जुलाई 2020

इस बार तुमने रुला दिया अशीम

उस दिन बहुत से चेहरों से दो दशक से अधिक समय बाद मिलना हो रहा था. बहुत से चेहरे तो ऐसे थे जिनसे पहली बार मिलना हो रहा था. उस दिन के पहले न कभी भी, कहीं भी मुलाकात हुई थी, न कभी कोई बात हुई थी, न फोन से कोई बात हुई थी इसके बाद भी उन तमाम नए चेहरों पर सम्मान भाव झलक रहा था, आदर का भाव स्पष्ट दिखाई दे रहा था.


कॉलेज के उस कैम्पस में, जिसे छोड़े हुए चौबीस साल हो गए थे बहुत सारे जाने-अनजाने चेहरों से आत्मीयता के साथ मिलना हुआ. उन्हीं पहली बार मिलने वाले चेहरों में से एक चेहरा ऐसा सामने आया जो बस परेशान सा करता दिख रहा था. परेशान करने का अंदाज भी ऐसा जिसमें परेशानी नहीं बल्कि अपनेपन का बोध झलक रहा था. लोगों के साथ हँसी-मजाक करने का ऐसा स्वरूप जो उस चेहरे के खिलंदड़ बोध को बता रहा था.

हॉस्टल मीट के दौरान चाय-नाश्ते के इंतजाम में खुद तत्पर अशीम 

उसकी तमाम उलटी-सीधी हरकतों के बीच हमारी चाय पीने की इच्छा को वह जग भर चाय लेकर पूरी करने आ गया. अपने उस परिवार में बड़े होने के हमारे बोध ने उस चेहरे के प्रति आकर्षण नहीं जगाया मगर इतना संकेत अवश्य करवाया कि ये व्यक्ति चुपचाप बैठने वालों में से नहीं है. चाय-नाश्ता बनने के दौरान उसकी तमाम हरकतों के बीच उस नए-नवेले चेहरे का परिचय अपने पुराने साथियों से लिया तो मालूम चला कि उस चेहरे का नाम अशीम है, अशीम प्रकाश जैन. उसकी तमाम हरकतों को देखते हुए मन ही मन एक प्रतिक्रिया उभरी कि हमारे परिवार का ये भी एक बवाली सदस्य समझ आ रहा है.


चूँकि उस दिन हम सभी हॉस्टल मीट के आयोजन पर दो दशकों से अधिक समय बाद मिल रहे थे तो सभी एक-दूसरे से मिलने, पुराने दिनों को याद करने, आपस में सबकी टांग खिंचाई में लगे थे. उसी दौरान अशीम की अपनी स्वाभाविक सी हरकतों के बीच किसी ने हमारी तरफ इशारा करते हुए उसे टोका भी कि न हुए तुम इन भाईसाहब के समय में न तो भूल जाते सब नौटंकी. उसकी प्रतिक्रिया में उसकी हँसी पर हम सब मुस्कुरा कर उसकी हरकतों का आनंद लेते रहे.

कॉलेज के हॉल में बैठने के बाद आपसी संवाद, परिचय, कार्यक्रम के दौरान अशीम की गतिविधियाँ निरंतर बिना किसी गतिरोध के, बिना किसी झिझक के चलती रहीं. मंच संचालक युवक-युवती से माइक छीन कर अपनी बात कहने लगना, परिचय के दौरान अपने साथियों पर कमेंट करना आदि हास्यबोध के रूप में बराबर बना रहा. उस दौरान उसे यह कहते हुए टोका कि अशीम अब न माने तो अभी मंच पर सबके सामने तुम्हारी रैगिंग ले ली जाएगी. इसी दौरान एक बड़े भाई द्वारा उसे एक टिप्पणी पर बुरी तरह से डाँट भी पड़ी मगर अशीम जैसे किसी सीमा में बंधा ही नहीं था. उसकी बालसुलभ हरकतें लगातार ज़ारी रहीं.


वो दिन सबके हंगामा काटने का ही दिन था, सबको एक-दूसरे को देखकर उत्साहित होने के दिन था, सबको पुराने दिनों में गोते लगाने का दिन था इसलिए सब अपनी ही रौ में मगन थे. उस दिन के बाद अशीम से मुलाकात का माध्यम सोशल मीडिया के मंच बने रहे. कभी-कभी उसकी वही हास्य से भरी इक्का-दुक्का टिप्पणी पढ़ने-देखने को मिलतीं, कभी-कभी फोटो-वीडियो से मुलाकात हो जाती मगर उस दिन के बाद आमने-सामने मिलना न हो सका.

इसके बाद भी जिस बंधन में हम सभी हॉस्टल के भाई बंधे हुए हैं वह आपस में आत्मीयता बनाये रहा. उसी आत्मीय माला के एक मोती के रूप में आज अशीम के सीमामुक्त हो जाने का समाचार मिला. एकबारगी विश्वास ही न हुआ. अभी महज बारह-पंद्रह दिन पहले उसके वीडियो देखे थे. आपस में टीका-टिप्पणी भी हुई थी और आज ये खबर. विश्वास न होने के कारण इधर-उधर संपर्क साधा गया और अंततः बुरी खबर के सत्य होने की पुष्टि हुई. हॉस्टल के भाइयों की माला का एक फूल असमय सूख गया. अचानक से 8 अप्रैल 2017 का वह दिन और अशीम की तमाम हरकतें आँखों के सामने घूम गईं.

उस दिन के बाद से हॉस्टल बगिया के दो फूल असमय मुरझाकर हम सबको रुला गए. बहुत कुछ सोचते थे, बहुत कुछ बस विचारों में ही रह गया. अब न अशीम को मिलना है, न उसकी उन हास्यबोध से भरी हरकतों से सामना होना है, न उससे रैगिंग लिए जाने की बात कह पाना है. अब बस वो हम सबकी यादों में है, यादों के सहारे ही हम सबके बीच है. जहाँ भी रहो, हमेशा वैसे ही हँसते-हँसाते रहो.


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#हिन्दी_ब्लॉगिंग

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