12 February 2018

भारत विश्व-गुरु की और मोदी वैश्विक नेता की छवि में

"ध्यान देने की बात है, 
मोदी जी
यात्रा फिलस्तीन की कर रहे हैं
वाहन जॉर्डन ने दिया है
और सुरक्षा इजरायल संभाले हुए है.
इसे ऐसे भी देखिये
एक ऐसा व्यक्ति जिसकी छवि कट्टर हिन्दू की गढ़ी गयी है,
वो एक दूसरे कट्टर देश की यात्रा पर है
और सुरक्षा उन्हें वो तीसरा कट्टर देश दे रहा है, 
जिसकी दूसरे कट्टर देश से नहीं बनती.
इसे ऐसे भी देखिये
फिलस्तीनी आकाश में इजरायली वायु सेना उड़ान भर रही है 
मोदी जी को सुरक्षा देने के लिये.
है न आश्चर्यजनक!
मुस्कुराइये कि हमारे पास ऐसा नेतृत्व है."

ये सामान्य रूप में एक सामान्य सा संदेश कहा जा सकता है जो सोशल मीडिया पर अपने को लगातार वायरल करवाने में लगा है. इस संदेश को आगे भेजते रहने वालों को एकबारगी मोदी-भक्त कहकर मोदी-विरोधियों द्वारा दुत्कारने जैसा महसूस करवाया जा सकता है. बहुत सम्भव है कि ऐसा करवाया भी जा रहा हो क्योंकि मोदी जी के केंद्र में आने से लेकर अब तक उनके विरोधियों द्वारा इस तरह की हरकतें लगातार की जा रही हैं. बहरहाल, मोदी-भक्त इस संदेश को लगातार प्रसारित करने में लगे हैं और मोदी-विरोधी इसका प्रत्युत्तर देने में लगे हैं. इन सबके बीच मूल बिंदु ये है कि ये संदेश भले ही सोशल मीडिया की शान बन रहा हो पर सच्चाई यही है कि हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की वर्तमान यात्रा को वैश्विक संदर्भों में बहुत अलग तरह से देखा जा रहा है. 

जॉर्डन, इसरायल, फ़िलिस्तीन का आपसी रिश्ता किस स्तर का है, ये वैश्विक पटल पर किसी से छिपा नहीं है. ऐसे में हमारे देश के प्रधानमंत्री की यात्रा पर इन तीनों देशों का समवेत रूप में सहगामी बनना भले ही देश में मोदी-विरोधियों को पसंद न आ रहा हो पर इस यात्रा ने वैश्विक पटल पर देश की, यहाँ के प्रधानमंत्री को एक ताक़त के रूप में उभारा है. इस यात्रा पर होने वाले समझौतों के अलावा फ़िलिस्तीन और इसरायल के सम्बन्धों में सुधार की आशा भी यहाँ के लोगों द्वारा व्यक्त की गई है. किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली फ़िलिस्तीन यात्रा है. इसमें अहम बात ये है कि इस यात्रा के लिए जॉर्डन होते हुए रूट को वहाँ से अनुमति मिलना मोदी जी की वैश्विक छवि का ही प्रभाव और विकास है. इससे पूर्व भारत द्वारा येरुशलम को राजधानी सम्बंधी अपने निर्णय पर अडिग क़दम उठाए रखना और उसके ठीक पहले इसरायल के साथ दोस्ताना सम्बन्धों का विकास मोदी जी की वैश्विक कूटनीति को ही दर्शाता है. 


विगत वर्षों में मोदी जी की वैश्विक यात्राओं को लेकर उनके विरोधियों द्वारा लगातार उपहास किया जाता रहा है. इन यात्राओं के संदर्भ में आलोचना करने वालों को विचार करना चाहिए कि क्या उनकी यात्राएँ विशुद्ध भ्रमण ही हैं? क्या वे अपनी  यात्राओं में अपने परिजनों को भी सैर करवा रहे हैं? क्या इन यात्राओं के बाद देश की छवि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सुधरी नहीं है? मोदी जी का वैश्विक नेताओं के साथ लगातार सम्पर्क का परिणाम है  अमेरिका का राष्ट्रपति मालदीव समस्या पर मोदी जी  चर्चा करता है. जिस अमेरिका द्वारा नरेन्द्र मोदी को किसी समय मुख्यमंत्री होने के बाद भी वीज़ा नहीं दिया गया था, उसी अमेरिका ने प्रधानमंत्री के रूप में उनकी कूटनीति को देखकर हाथों-हाथ लिया. आज के समय में वैश्विक राजनीति में देशों को  अपने साथ कूटनीतिक दोस्तों की आवश्यकता है. यदि हमारे देश  अपनी आवश्यकताएँ हैं तो विश्व स्तर पर भी बहुतेरे देशों  हमारे देश का साथ अपेक्षित है. इस नीति  अलावा  बहुत कुछ ऐसा है जो मोदी  वैश्विक स्तर पर खड़ा करता है. ऐसा  लोगों को हास्यास्पद लगेगा जो राजनीति को गंदगी, राजनीति को माफ़ियागीरी, कूटनीति को हत्या, नीतियों को मुफ़्तखोरी से जोड़कर देखते हैं. एक ऐसे समय में जबकि उपरोक्त संदेश सत्यता के साथ सबके सामने है, सिर्फ़ मोदी-भक्त ही नही वरन फ़िलिस्तीन, इसरायल, जॉर्डन जैसे कट्टर विरोधी देश भी मोदी जी की छवि, कूटनीति का सम्मान करते हुए उनकी यात्रा में अपना सौहार्द्र, भाईचारे का वातावरण निर्मित होता देख रहे हैं. यही विश्वास भारत देश को विश्व-गुरु की ओर ले जाता है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वैश्विक नेतृत्वधारी की ओर.

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