28 July 2014

भविष्य की भयावहता का संकेत है महिला नीलामी



महिलाओं के साथ होती लगातार वारदातों पर किसी भी तरह का अंकुश लग नहीं पा रहा है, न ही सामाजिक रूप से और न ही प्रशासनिक रूप से. प्रतिदिन ही प्रदेश में किसी न किसी क्षेत्र से महिलाओं के शारीरिक शोषण, उनके साथ दुर्व्यवहार, छेड़छाड़, बलात्कार, हत्या आदि की खबरें आना आम बात सी हो गई है. इन विचलित करती घटनाओं के बीच, शर्मसार करती वारदातों के बीच उत्तर प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र से एक महिला की नीलामी की खबर हैरान-परेशान, शर्मसार करने वाली तो है ही, उससे कहीं ज्यादा भविष्य में महिलाओं की स्थिति के लिए पैदा होने वाले खतरे आ आभास भी करवाने वाली है. आज के इस दौर में जहाँ स्त्री और पुरुष को एकसमान मंच प्रदान किये जाने के दावे किये जाते हैं; दोनों के एकसाथ कंधे से कन्धा मिलाकर काम करने को प्रोत्साहित किया जाता है; दोनों के बीच भेदभाव की स्थितियों को लगातार समाप्त करने की कवायद की जाती है वहाँ किसी महिला की नीलामी होना बहुत से सवाल उठाता है, सामाजिक स्थितियों पर प्रश्नचिन्ह लगाता है.
.
घटना के सामने आने के बाद भले ही प्रशासन द्वारा इसकी लीपापोती करने का काम किया जा रहा हो, भले ही उसके द्वारा इस नीलामी को शादी साबित किया जा रहा हो किन्तु वास्तविकता इससे कहीं अलग है. प्रशासनिक अमला जहाँ इस नीलामी को शादी बताने में जुटा है वहीं तमाम संगठन बुन्देलखण्ड की गरीबी को सामने रखकर इस घटना को रेखांकित करने में लगे हैं. समझने वाली बात ये है कि क्या मात्र गरीबी ही किसी महिला की नीलामी का कारण है? ये सोचने का विषय है गरीबी के माहौल में एक व्यक्ति द्वारा महिला की नीलामी होने पर किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा उस महिला को खरीद लेना क्या है? इसके साथ ही ये भी सवाल है कि सिर्फ गरीबी के कारण नीलम की जा रही महिला दो वृद्ध पुरुषों के साथ जाने को क्यों तैयार नहीं हुई? ये वो स्थितियाँ हैं जिन पर गौर करने का प्रयास किया ही नहीं जा रहा है. दरअसल इस महिला की नीलामी में बुन्देलखण्ड की गरीबी भले ही एक कारण हो किन्तु यही प्रमुख कारण नहीं है. इसकी तह तक जाने के लिए बुन्देलखण्ड की जनसंख्या सम्बन्धी, लिंगानुपात सम्बन्धी आंकड़ों को भी जानने-समझने की जरूरत है. बुन्देलखण्ड में महिलाओं की संख्या में जिस तरह से लगातार गिरावट देखने को मिल रही है उससे यहाँ के अधिकांश क्षेत्रों में पुरुषों के  समक्ष शादी का संकट उत्पन्न होता जा रहा है.
.
पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की कम होती संख्या समाज में असंतुलन बनाने के साथ-साथ कई तरह की विसंगतियों को जन्म देंगी. इनके बारे में लगातार विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा सचेत भी किया जाता रहा है. आज भी कई क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ पर बहुत बड़ी संख्या में पुरुष अविवाहित रह जा रहे हैं. महिलाओं की कम होती संख्या के कारण ऐसे अविवाहित प्रौढ़ पुरुष दूसरे राज्यों से महिलाओं की खरीद-फरोख्त कर उन्हें लाते हैं. इनके बीच विवाह नाम का कोई बंधन नहीं होता है. इन महिलाओं द्वारा सम्बंधित पुरुष की शारीरिक भूख को मिटाने का काम किया जाता है. चूँकि विवाह जैसी सामाजिक संस्था का अनुपालन न होने के कारण ऐसी महिलाओं को महज वस्तु की ही समझा और व्यवहार किया जाता है. मन भर जाने पर उसको खरीद कर लाने वाला पुरुष किसी दूसरे पुरुष के हाथों उस महिला को बेच देता है. यहाँ होने वाली नीलामी दर्शाती है कि कैसे एक महिला को पाने के लिए अनेक पुरुष आगे आते हैं. इनका सिर्फ और सिर्फ एक ही मकसद रहता है अपनी शारीरिक संतुष्टि हेतु किसी महिला की प्राप्ति.
.
महिलाओं की नीलामी, खरीद-फरोख्त भविष्य में न हो इसके लिए सरकार को उपाय करने के साथ-साथ कन्या भ्रूण हत्या जैसे जघन्य अपराध को रोकने की दिशा में भी और अधिक सक्रियता से काम करे. महज चंद नारों, चंद सरकारी कार्यक्रमों, गोष्ठियों, रैलियों आदि से ये नहीं रुकने वाला. ये बात सरकार से ज्यादा इंसानों को समझने की जरूरत है कि यदि इसी तरह से समाज से महिलाओं की संख्या में कमी आती रही तो महिलाओं की खरीद-फरोख्त या नीलामी तो नहीं ही रुकने वाली, हमारे-आपके घरों की महिलाओं भी असुरक्षित हो जाएँगी, यौनेच्छा पूर्ति के लिए भटकते पुरुष या तो बलात्कार जैसा जघन्य अपराध करते रहेंगे या फिर घरों से महिलाओं को उठाना शुरू कर देंगे. बलात्कारों का बढ़ता जाना इसी का द्योतक है. समझना होगा कि ये नीलामी की घटनाएँ भविष्य की भयावहता की आहट मात्र हैं और इस विभीषिका को कहीं हम सभी को न झेलना पड़े.  
.

3 comments:

HARSHVARDHAN said...

आपकी इस पोस्ट को ब्लॉग बुलेटिन की आज कि बुलेटिन ईद मुबारक और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

प्रतिभा सक्सेना said...

सतयुग में शैव्या,त्रेता में सीता ,द्वापर में द्रौपदी ,और इससे भी पहले माधवी की कथा सुनी है, जिसे उसके पिता ने उधार दे दिया था कि इससे पुत्र उत्पन्न करवाने के बदले राजाओं से घोड़े वसूलना और अपना गुरुऋण चुका लेना .उसके बाद मेरी पुत्री को मुझे वापस कर देना ,इसके माध्यम से आगे मुझे और पुण्य कमाने हैं.
अब आज के युग में जो हो रहा है वह भी आगे के इतिहास में जोड़ दिया जाएगा!

राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...
This comment has been removed by the author.