ऐसा लगता है जैसे कोई चीज मुफ्त में या फिर लगभग मुफ्त जैसी कीमत में मिलती है
तो उसका दुरुपयोग पूरी ताकत से किया जाने लगता है. इस मामले में अनेकानेक उदाहरण
हम सबके सामने हैं. ऐसे ही उदाहरणों में से एक ताजातरीन उदाहरण कृत्रिम बुद्धिमत्ता
(एआई) का लिया जा सकता है. हम भारतीयों ने जिस तरह से डीपफेक सहित एआई का दुरुपयोग
किया है, वैसा हाल एआई को सामने लाने वालों ने भी नहीं सोचा होगा. न जाने कितनी
कृत्रिम सामग्री, बनावटी
फोटो, नकली वीडियो आदि के माध्यम से सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म
को इतनी बुरी तरह से भर दिया गया है कि कई बार असली और नकली का अंतर ही समझ नहीं
आता है.
सवाल अकेले नकली सामग्री बनाये जाने का नहीं बल्कि इसके माध्यम से धोखाधड़ी, अश्लीलता आदि को बढ़ावा मिलने लगा
था. लगातार आती शिकायतों को दृष्टिगत रखते हुए केन्द्र सरकार ने डीपफेक सहित एआई से
तैयार सामग्री के सम्बन्ध में ऑनलाइन मंचों के लिए सख्त नियम बना दिए हैं. ये नियम
इसी माह की बीस तारीख से लागू हो जाएँगे. इसके तहत सोशल मीडिया के विविध मंचों से
डीपफेक वाली सामग्री को तीन घंटे के भीतर ही हटाना होगा. पहले इस सम्बन्ध में
समय-सीमा 36 घंटे की थी. इसके अलावा एआई के माध्यम से निर्मित सामग्री, चाहे वो फोटो हो या फिर वीडियो, उसमें एआई कंटेंट
होने का लेबल स्पष्ट रूप से लगाना होगा, जिससे दर्शकों को आसानी से असली और नकली
का अंतर समझ आ सके.
सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता)
नियम 2021 में संशोधन करके इसके
माध्यम से एआई से निर्मित बनावटी कटेंट को परिभाषित किया गया है. इन संशोधनों में
‘ध्वनि, दृश्य या ध्वनि-दृश्य जानकारी'
और ‘बनावटी रूप से तैयार की गई जानकारी'
को परिभाषित किया गया है, जिसमें एआई द्वारा निर्मित या परिवर्तित ऐसी
सामग्री शामिल है जो वास्तविक या प्रामाणिक प्रतीत होती है. इस तरह के संशोधनों से
निश्चित रूप से एआई का दुरुपयोग रोकने में मदद मिल सकेगी.

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