27 दिसंबर 2024

काश! जीवित रहते तारीफ कर देते

मनमोहन सिंह की जितनी तारीफें, उपलब्धियाँ अब उनके निधन के बाद सुनाई जा रहीं हैं, काश! उनको जीवित रहते सुना दी गईं होतीं.

 

=>> कम से कम उनको एहसास होता कि वे ही परमाणु सम्बन्धी मामले के अगुआ थे.

=>> कम से कम उनको एहसास तो होता कि उनके कारण ही भारत आर्थिक रूप से सक्षम हुआ है.

=>> कम से कम उनको एहसास होता कि मौन रहने के बाद भी वही भारतीय राजनीति की रीढ़ थे.

=>> कम से कम उनको एहसास तो होता कि वे ही एकमात्र विद्वान थे जिन्होंने आर्थिक नीतियों को सही से देश में लागू करवाया.




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