05 सितंबर 2024

गुरु और शिक्षक का अंतर

ओ फ़ेसबुक की भेड़चाल में बहकने वाले/वालियो

 

आप सबने ज़िन्दगी से सीखा, माता-पिता पहले गुरु रहे, प्रकृति से ज्ञान प्राप्त किया, इससे लिया, उससे बटोरा, कण-कण ने दिया, वक्त ने सिखाया आदि-आदि. सारी बातें सही हैं, आदर्श विचारक हैं मगर बहकते-भटकते कुछ और जानकारी भी सीख लो, सहेज लो. गुरु कोई भी हो सकता है, कोई भी से मतलब कोई भी. ज्ञान किसी से भी मिल सकता है, किसी से भी माने किसी से भी. ये लोग माता-पिता, कोई रिश्तेदार, सहयोगी, मित्र, कोई भी कामगार, किसी भी व्यवसाय का व्यक्ति, किसी भी संस्थान का सदस्य, निरक्षर, साक्षर आदि कोई भी हो सकते हैं. ये गुरु हो सकते हैं पर शिक्षक नहीं.

 

हर कोई शिक्षक नहीं बन सकता. हर किसी को शिक्षक नहीं कहा जा सकता. प्रशासनिक अधिकारी प्रशासनिक अधिकारी ही होगा. पुलिस वाला पुलिस वाला ही रहेगा. डॉक्टर को डॉक्टर ही कहा जायेगा. इंजीनियर इंजीनियर ही रहेगा. व्यापारी भी यही रहेगा. हाँ, ये गुरु हो सकते हैं. इनको गुरु माना-समझा-कहा जा सकता है. इससे इतर शिक्षक एक निश्चित प्रक्रिया के बाद शैक्षिक संस्थान में नियुक्त व्यक्ति होता है. निश्चित डिग्री, निश्चित अर्हता, निश्चित प्रक्रिया के बाद ही कोई व्यक्ति शिक्षक कहलाता है.

 

शिक्षक दिवस देश के एक शिक्षक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के सम्मान में उनके जन्मदिन पर मनाते हैं. यह दिन उनके जन्मदिन पर शिक्षकों का सम्मान करने का दिन है. इनसे इतर किसी और से ज्ञान पाने वाले को गुरु कहिए, उनका सम्मान गुरु पूर्णिमा को करिए.


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