01 सितंबर 2024

बच्चों के स्वास्थ्य पर विद्यालय समय का प्रभाव

शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए आये दिन एक विचार तैरता है कि सभी कक्षाओं में, सभी विद्यालयों में NCERT की किताबें ही होनी चाहिए; महँगी किताबों को रोका जाना चाहिए; बस्ते का बोझ कम से कम रखा जाये. इसके साथ-साथ सबको एक बात के लिए और आवाज़ उठानी चाहिए. इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई के लिए विद्यालयों का समय कम किया जाये. आज लगभग सभी विद्यालयों में समय प्रातः सात-आठ बजे से दोपहर बाद दो-तीन बजे तक का है. ऐसे समय के चलते बच्चे सुबह छह-साढ़े छह बजे घर से निकलते हैं और तीन-चार बजे तक लौटते हैं.

 

कभी विचार करिए कि इन बच्चों को सुबह का नाश्ता, दोपहर का भोजन उचित तरीक़े से नहीं मिल पा रहा है. विद्यालयों में भोजनावकाश में बच्चे पेट ही भरते हैं, न तो उनको घर की तरह आराम से खाने का समय मिलता है और न ही वैसा भोजन. विद्यालय से तीन- चार बजे लौटने पर या तो भोजन किया नहीं जाता है या फिर बस काम चला लिया जाता है. इस तरह की भोजन स्थिति से बच्चों को दोपहर में खाद्य-पौष्टिकता नहीं मिल पा रही है. दिन में देर से भोजन करने पर रात को भी भोजन की स्थिति में अनियमितता आती है. इस स्थितियों को देखकर प्रयास किए जाएँ कि विद्यालयों का समय कम किया जाये, जिससे बच्चे दोपहर का भोजन आराम से कर सकें, पौष्टिकता के साथ कर सकें. उनकी सेहत के लिए ये आवश्यक है.


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