24 जुलाई 2024

ये विषय आस्था का है

व्रत-उपवास-पूजन आदि की सामग्री को लेकर बहुसंख्यक हिन्दू परिवारों में सदैव से एक अलग स्थिति रही है. दुकान पर मिठाई अथवा अन्य पूजन सामग्री वाला भले ही दो दिन से न नहाया हो, मुँह में गुटखा भरे हो मगर वही सामग्री घर में आने के बाद पूज्य हो जाती है. उसे बिना नहाए छुआ नहीं जा सकता है, बिना पूजन के उसे खाया नहीं जा सकता है, जूठे मुँह उसका स्पर्श नहीं किया जा सकता है. ये सब कोई ढकोसला नहीं बल्कि एक विश्वास है, एक आस्था है. ये अलग बात है कि आधुनिक बनने के चक्कर में, वामपंथ को चचोरते रहने के कारण बहुतेरे हिन्दू इन सब बातों को सार्वजनिक रूप से नहीं मानते. (ये और बात है कि ऐसे बहुतेरे हिन्दू अंदरूनी रूप में कहीं न कहीं ऐसी बातों का पालन करते हैं.)

 

यदि कांवड़ मार्ग में हिन्दू श्रद्धालुओं के भोज्य पदार्थों के साथ शुचिता बनाये रखने के लिए कोई आदेश आया था तो मुसलमानों को उसका स्वागत करना चाहिए था. ऐसा नहीं हुआ क्योंकि इनका मूल कर्म हिन्दुओं की आस्था को चोट पहुँचाना है, हिन्दुओं के धार्मिक स्थलों, कृत्यों पर हमला बोलना है. यही कारण है कि उत्तर प्रदेश सरकार के इस आदेश पर मुसलमानों से ज्यादा वे लोग उचकने में लगे हैं जो मुस्लिम वोटों के कारण जिंदा हैं. ऐसे लोग भी जानते हैं कि हिन्दू आस्था, श्रद्धा का तात्पर्य क्या है, मगर वे अपनी मानसिकता के हाथों बंदी बने हुए हैं.

 


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें