20 जुलाई 2024

एक पौधा माँ के नाम

एक पौधा ‘माँ’ के नाम लगाकर, फ़ोटो-वीडियो बनवा कर, सोशल मीडिया में लाइव चलवा कर, हाथ-पैर फटकार कर महाशय जैसे ही आगे बढ़े वैसे ही हल्की-हल्की हवा चलने लगी. महाशय मुस्कुराए कि माँ ने पौधा स्वीकार लिया.


तभी कहीं से उड़ती हुई एक चप्पल उनकी पीठ पर पड़ी. हल्की हवा आँधी में बदलती सी लगी. आसमान में गड़गड़ाहट सी समझ आई. पलट कर अभी तुरंत लगाये पौधे की तरफ़ देखा.


पीठ पर पड़ी चप्पल की जलन, हवा की तेज़ी, बादलों की गड़गड़ाहट में जैसे ‘माँ’ की तेज आवाज़ सुनाई दी- “पौधा तो लगा दिया, पानी क्या तेरा ‘बाप’ डालेगा?”


पीठ को सहलाते हुए लपक कर पौधे में पानी डालते हुए महाशय अपने बचपन को याद करने लगे. साथ ही अग़ल-बग़ल देखते जा रहे थे कि कहीं से झाड़ू, डंडा तो आकर उन पर न चिपक जाए.

😄

#छीछालेदर_रस भरा मात्र व्यंग्य ही.

 


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