आज शोले फिल्म का गब्बर का वो फेमस डायलॉग याद आ रहा है- ठाकुर ने हिजड़ों की
फ़ौज पाल रखी है.
पिछले तीन-चार सालों में हमारे साथ व्यक्तिगत रूप से ऐसी घटनाएँ हुईं जबकि न
सरकार के प्रतिनिधियों ने, न संघ के पदाधिकारियों ने हमारा काम करवा पाया, ठीक उसी समय में वही काम
दूसरे दलों के नेताओं से मिलने के बाद हो गया, ये बात समझ से परे है. यदि संघ के
पदाधिकारी, पार्टी के पदाधिकारी, सरकार
के प्रतिनिधि के द्वारा जो काम नहीं करवाया जा सका, वो किसी
दूसरे दल के नेता ने कैसे करवा दिया?
संगठन के, पार्टी के,
सरकार के कितने बड़े चेहरे बने होने की घोषणा आप करें, आपके चाटुकार करें, आपके नौकर करें मगर एक बार फिर
आपकी औकात सामने आ गई है. एक बार फिर एक नितांत छोटा सा काम, जो किसी वार्ड का सभासद भी करवा देता. संघ के, सरकार
के बड़े-बड़े स्व-घोषित प्रांत-धारियों से, प्रदेश-धारियों से,
वरिष्ट की खाल लपेटे लोगों से न हो सका. दोष उनका नहीं, हमारा ही है
जो बार-बार धोखा खाने के बाद उन पर विश्वास किया.
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