20 अगस्त 2023

बायोमैट्रिक उपस्थिति का समर्थन

शिक्षा निदेशक (उच्च शिक्षा) की ओर से एक पत्र जारी किया गया, बायोमैट्रिक उपस्थिति की अनिवार्यता के सम्बन्ध में. इसमें महाविद्यालयों में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए बायोमैट्रिक उपस्थिति का प्रावधान किये जाने की बात कही गई है. हम तो व्यक्तिगत रूप से इसके पक्ष में हैं मगर प्रदेश स्तर पर शिक्षक संगठन ने इसका विरोध शुरू कर दिया है. काली पट्टी बाँध कर काम करने का आदेश सा पारित कर दिया गया है.

 

बायोमैट्रिक उपस्थिति का समर्थन हम इसलिए कर रहे हैं क्योंकि इसके लगने से महाविद्यालय में प्राचार्य और प्रबंध समिति की मनमानी, तानाशाही समाप्त हो जाएगी. कहते हैं न कि 'अँधा बाँटे रेवड़ी, चीन्ह-चीन्ह के दे' ठीक यही हाल उपस्थिति को लेकर होता है. जो इनके अपने हैं वे कभी भी आकर उपस्थिति दर्ज करवाएँ, उन पर कोई कार्यवाही नहीं होती और जो इनके पक्ष के नहीं हैं वे नोटिस पा जाते हैं, कार्यवाही के शिकार हो जाते हैं. बायोमैट्रिक उपस्थिति अकेले शिक्षकों के लिए नहीं है, वह विद्यार्थियों के लिए भी है. इसका होना अनिवार्य होना ही चाहिए ताकि विद्यार्थी महाविद्यालय में आना शुरू करें. अभी प्राचार्य की तरफ से दबाव होता है विद्यार्थियों की झूठी उपस्थिति दिखाने का. आखिर परीक्षा फॉर्म में, छात्र-वृत्ति में इनको खेल जो करना होता है.

 

हमारा तो व्यक्तिगत अनुभव रहा है प्राचार्य और प्रबंध समिति की मनमानी, तानाशाही का. उपस्थिति को लेकर; विद्यार्थियों की फर्जी उपस्थिति को लेकर, छात्र-वृत्ति और परीक्षा फॉर्म को लेकर. स्थानीय स्तर पर सक्षम होने के कारण इस मामले में हम संघर्ष कर ले रहे हैं मगर सभी शिक्षक इस तरह से खुलकर विरोधी स्वर नहीं अपना पाते. उन सभी शिक्षकों के हितार्थ बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रक्रिया सर्वोत्तम है, उचित है. हम व्यक्तिगत रूप से प्रदेश के, विश्वविद्यालय के, महाविद्यालय के शिक्षक संगठन द्वारा चलाये जा रहे विरोध में शामिल नहीं हैं.

 


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