25 जुलाई 2022

खुश रहना जहाँ भी रहना

विगत कई वर्षों की भांति चिर-परिचित तरीके से श्वेता की उपस्थिति का एहसास अपने बीच किया गया. इसे याद करना नहीं कहा जायेगा क्योंकि याद हम सभी उसे करते हैं जिसे भूल जाएँ. कुछ लोग ऐसे होते हैं जो कभी भी, किसी भी रूप में भुलाए नहीं जा सकते. ऐसे ही व्यक्तित्वों में श्वेता को सहज ही शामिल किया जा सकता है. जो लोग भी उससे मिले होंगे वे निश्चित ही इससे अपनी सहमति देंगे कि वो भुलाने योग्य व्यक्तित्व नहीं है.

 

दस जून ऐसी तारीख बन गई है, जिसे चाह कर भी अपनी स्मृति से मिटाया नहीं जा सकता. उस तारीख के साथ चल कर आई दुखद स्मृति को विस्मृत करने का अत्यंत नायाब तरीका श्वेता के जीवनसाथी अंकुर ने खोज निकाला. दस जून को उनके द्वारा मुस्कान हॉस्पिटल में रक्तदान शिविर का आयोजन विशुद्ध पारिवारिक रूप में किया जाने लगा है. सामाजिक रूप में अंकुर की जो छवि बनी हुई है, उसके अक्स में रूप में श्वेता की झलक उन दिनों में दिखाई पड़ जाती थी. अब जबकि श्वेता की आत्मिक उपस्थिति हम सबके बीच है, ऐसे समय में रक्तदान जैसा पावन कर्म उसकी उपस्थिति को और भी गहरे से महसूस करवाता है.

 



इस बार भी दस जून को रक्तदान शिविर का आयोजन हुआ. किसी से आग्रह नहीं, किसी से जोर-जबरदस्ती नहीं, किसी की मनुहार नहीं, किसी पर दवाब नहीं इसके बाद भी श्वेता और अंकुर के हार्दिक व्यवहार के चलते लोगों की स्नेहिल उपस्थिति पूरे समय बनी रही. इस बार विशेष बात यह रही कि मुस्कान सेंटर के बच्चों ने अत्यंत उत्साह दिखाया.

 

मुस्कान हॉस्पिटल के रक्तदान शिविर में अपनी सकारात्मक उपस्थिति के बाद लगातार लिखने का मन करता रहा परन्तु हर बार आज की तारीख भी याद आती. दोनों तारीखों को जब भी हम व्यक्तिगत रूप से अपने भावनात्मक तराजू में तौलते तो हमें आज की तारीख ज्यादा वजनदार महसूस होती. इस 25 जुलाई वाली तारीख में श्वेता की अनुपस्थिति का आभास नहीं होता. आज की तारीख में उसके जाने का नहीं बल्कि इस दुनिया में आने का एहसास दिखाई देता है. उसके खोने की पीड़ा से बहुत अधिक उसके होने की ख़ुशी समाहित दिखती है.

 

श्वेता, जन्मदिन पर तुमको आशीर्वाद, तुम जिस रूप में जहाँ हो हमेशा सुखी रहो, हँसती रहो. लोगों को उसी तरह अपना बनाती रहो जैसे हम सबके बीच रहते हुए सबको अपना बनाती रही.






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