29 May 2020

अभिभावक और शिक्षक करें बाल मनोविज्ञान का अध्ययन

वर्तमान परिदृश्य में अभिभावकों के लिए बच्चों के मनोविज्ञान को समझना एक जटिल कार्य होता जा रहा है. उनके लिए बच्चों का लालन-पालन, उनकी परवरिश को लेकर भी आये दिन समस्याजनक होता जा रहा है. अभिभावकों और बच्चों का एकदूसरे के प्रति व्यवहार भी रूखा और असंयत होता दिखता है. इसके लिए कहीं अप्रत्यक्ष तरीके से कोई काम भले ही चल रहा हो मगर प्रत्यक्ष में ऐसा होते नहीं दिखता है. बच्चों का उद्दंड होते जाना, अत्यधिक उग्रता धारण करना एक समस्या है तो अभिभावकों का व्यवहार भी चिंताजनक है. बात-बात पर आदेशनुमा कदम, किसी भी कार्य का टोकाटाकी भी बच्चों को उद्दंड बनाती जा रही है. इन सबको समझने की आवश्यकता है. इसके लिए बाल मनोविज्ञान को समझना-परखना अत्यंत आवश्यक है. इस मनोविज्ञान को न केवल विद्यालयों में पढ़ाया जाना चाहिए अपितु माता-पिता को भी इसके बारे में पढ़ना-समझना चाहिए.


असल में देखा जाये तो बाल मनोविज्ञान सामान्य मनोविज्ञान की एक विशेष शाखा भले हो मगर इसे सामान्य रूप से सभी अभिभावकों को इसलिए समझना चाहिए क्योंकि यह बच्चों के विकास और व्यवहार पर केंद्रित है. इसके द्वारा स्कूल जाने वाले बच्चों के शारीरिक, संवेगात्मक, संज्ञानात्मक और सामाजिक विकास का अध्ययन किया जाता है. आजकल देखने में आ रहा है कि बच्चे पढ़ाई से अधिक ध्यान कहीं दूसरी जगह लगाने लगे हैं. उनकी सक्रियता अधिक है किन्तु वह कई बार सकारात्मक दिशा में नहीं है. उनकी सक्रियता किसी न किसी रूप में ध्वंस कर रही है. ऐसी तमाम स्थितियों के बारे में बाल मनोविज्ञान समझाने का काम करता है.


यदि आज के माता-पिता बाल मनोविज्ञान का अध्ययन करते हैं तो उनको अपने बच्चे को समझने में मदद मिल सकती है. वे इसे विषय के रूप में कतई न स्वीकारें, वे यह धारणा भी न बनायें कि यह किसी तरह का शैक्षिक पाठ्यक्रम है, जिसे उत्तीर्ण करना है. वे इसे अपने बच्चे के साथ किये जाने वाले व्यवहार, बच्चे के द्वारा किये जाने वाले व्यवहार के बारे में जानने के लिए स्वीकार कर सकते हैं. कुछ सामान्य सी बातों को ध्यान में रखते हुए यदि अभिभावक आगे बढ़ें तो उनको अपने बच्चे को समझना आसान हो सकता है.


इसके लिए अपने बच्चों से उनके दैनिक अनुभवों के बारे में बात करें. उनके स्कूल, उनके साथियों, उनकी दिन भर की गतिविधियों के बारे में चर्चा करें. यहाँ एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि हर समय सिर्फ पढ़ाई की बातें बच्चे से नहीं करनी चाहिए. वर्तमान युग में कैरियर एक महत्त्वपूर्ण विषय हो सकता है मगर जिस भविष्य की इमारत की नींव को यदि आज कमजोर कर दिया जायेगा उस पर बुलंद इमारत बनाया जाना संभव नहीं होगा. ऐसे में बच्चों को पढ़ने की महत्ता समझानी चाहिए. उनको शिक्षा के द्वारा सफलता की प्राप्ति के बारे में बताया जाना चाहिए. यहाँ अभिभावकों को एक बात का स्मरण हमेशा रहना चाहिए कि आज के दौर में आपका बच्चा भी तकनीक से किसी न किसी रूप में परिचित हो रहा है. टीवी चैनलों से, धारावाहिकों से, कार्टून चैनलों से अथवा अन्य किसी माध्यम से वह भी आत्मसम्मान, व्यक्तित्व, इमेज आदि की बातें देख-समझ रहा है. ऐसे में उसके साथ किसी भी तरह से ऐसा व्यवहार न करें जो उसके आत्मसम्मान को चोट पहुँचाये. किसी भी काम को करने के लिए तेज आवाज़ में बोलना, बच्चे की छोटी से छोटी गलती के लिए उसको डाँटना, चिल्लाते हुए किसी काम को करने का आदेश देना आदि ऐसे कदम हैं जिनके द्वारा बच्चे में एक तरह का भय बैठ जाता है. उसके अन्दर कमजोरी के भाव पनपने लगते हैं. ऐसे में वह हीनभावना, असुरक्षा, अवसाद जैसी स्थिति का शिकार होने लगता है.  

अभिभावकों को अपने व्यवहार को नियंत्रित रखते हुए बच्चों के नैसर्गिक विकास की तरफ ध्यान देना चाहिए. बच्चे को पढ़ाई के साथ-साथ किसी न किसी नए कार्य के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए. समय-समय पर उसे उसके स्कूल में अथवा नगर में होने वाली प्रतियोगिताएं में सहभागिता करने के लिए भी प्रेरित करना चाहिए. उसे इसका आभास होना चाहिए कि ज़िन्दगी में हमेशा जीत ही नहीं मिलती है, कभी-कभी हार का भी सामना करना पड़ता है. तमाम प्रतियोगिताओं में उसकी सहभागिता उसमें समन्वय, सहयोग, सामूहिकता की भावना का विकास करती है.

बाल मनोविज्ञान इसी तरह के अनेक उपायों को सबके सामने रखता है. इसका अध्ययन तमाम समस्याओं का समाधान देने में मदद करता है. इसका अध्ययन न केवल शिक्षक के लिए बल्कि माता-पिता के लिए भी बेहद उपयोगी सिद्ध हो सकता  है. एक बात और मुख्य रूप से याद रखनी चाहिए, जब भी आप अपने बच्चे से किसी भी तरह का व्यवहार करें तो एक बार अपने बचपन को याद कर लें. क्या आपके माता-पिता द्वारा आपके साथ वैसा ही व्यवहार किया गया था? क्या आप ऐसे ही व्यवहार किये जाने से प्रसन्न रहते थे? ऐसे कई सवाल खुद से करिए, खुद से जवाब लीजिये और फिर अपने बच्चे के प्रति अपना व्यवहार करिए. आप स्वयं समझदार हैं.

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#हिन्दी_ब्लॉगिंग

7 comments:

  1. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा सोमवार (01जून 2020) को 'ख़बरों की भरमार' (चर्चा अंक 3719 ) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    *****
    रवीन्द्र सिंह यादव

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  2. बहुत सुन्दर, सार्थक आलेख।
    पत्रकारिता दिवस की बधाई हो।

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  3. असल में देखा जाये तो बाल मनोविज्ञान सामान्य मनोविज्ञान की एक विशेष शाखा भले हो मगर इसे सामान्य रूप से सभी अभिभावकों को इसलिए समझना चाहिए क्योंकि यह बच्चों के विकास और व्यवहार पर केंद्रित है. इसके द्वारा स्कूल जाने वाले बच्चों के शारीरिक, संवेगात्मक, संज्ञानात्मक और सामाजिक विकास का अध्ययन किया जाता है. आजकल देखने में आ रहा है कि बच्चे पढ़ाई से अधिक ध्यान कहीं दूसरी जगह लगाने लगे हैं. उनकी सक्रियता अधिक है किन्तु वह कई बार सकारात्मक दिशा में नहीं है. उनकी सक्रियता किसी न किसी रूप में ध्वंस कर रही है. ऐसी तमाम स्थितियों के बारे में बाल मनोविज्ञान समझाने का काम करता है.
    मै भी इस बात से सहमत हूँ ,आजकल के समय में मनोदशा को समझना जरूरी है ,बहुत ही बढ़िया पोस्ट ,आपका बहुत बहुत धन्यवाद

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  4. बहुत ज़रूरी विषय पर आपका आलेख है. आज के समय में बाल मनोविज्ञान पर बहुत विमर्श की ज़रुरत है. जिन बातों को हमारे समय के लिए सामान्य समझा जाता था, अब वह विशेष हो चुका है. काफी संभलकर विचार और व्यवहार करना आवश्यक है. विचारपूर्ण आलेख के लिए बधाई.

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  5. इस समय बाल मन की गुथ्थियों को समझने में बाल मनोविज्ञान हमारी काफी मदद कर सकता है। आपका यह लेख उचित डिश निर्देश देता है। हर बाल शिक्षक के साथ माता - पिता जो हैं और जो बनने वाले हैं, उन्हें भी बाल मनोविज्ञान की शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए। --ब्रजेन्द्र नाथ

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  6. नमस्कार सेंगर साहब, बहुत खूब ल‍िखा है बाल मनोव‍िज्ञान पर

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  7. सराहना से परे बेहतरीन लिखा है आदरणीय सर.
    सादर

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