17 May 2014

भाजपा, नमो के साथ चलें विकास की राह




भारतीय लोकतंत्र में तीन दशक बाद किसी दल को स्पष्ट बहुमत मिल सका है और यदि वो दल भारतीय जनता पार्टी हो तो विश्लेषण करना आवश्यक हो जाता है. वैसे वर्तमान लोकसभा चुनाव परिणामों ने जीत एवं हार दोनों के विश्लेषण को आवश्यक बना दिया है. सांप्रदायिक दल के रूप में व्यापकता के साथ प्रचारित दल स्पष्ट बहुमत प्राप्त कर ले और देश का सबसे पुराना तथा राष्ट्रव्यापी दल महज दो अंकों में सिमट जाये, ये किस तरह हुआ, विचारणीय है. महज कांग्रेस विरोध के चलते इतनी बड़ी सफलता प्राप्त करना संभव ही नहीं. जैसा कि आरम्भ से ही ‘मोदी-लहर’ को प्रचारित किया जा रहा था वो स्पष्ट चलती दिखी. नमो-लहर को दुष्प्रचारित करने वाले इस बात को क्यों भुला बैठते हैं कि यही व्यक्ति विगत १२ वर्षों से गुजरात में मुख्यमंत्री है, तीन बार चुनाव जीतकर इस पद पर आसीन हुआ है; वे क्यों भूल जाते हैं कि पिछले आठ-नौ माह में जिस तरह का तूफानी प्रचार-अभियान मोदी ने छेड़ रखा था, वो काबिले-तारीफ है.
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यह अपने आपमें सत्य है कि देश की बहुसंख्यक जनता केंद्र सरकार के विगत दस वर्षों के शासन से नहीं बल्कि उसके कारनामों से त्रस्त हो चुकी थी. जनहितकारी कार्यों के स्थान पर मंत्रियों-सांसदों आदि के द्वारा स्व-हितकारी कार्य किये जा रहे थे. भ्रष्टाचार, घोटाले, रिश्वतखोरी महंगाई आदि चरम पर थे और सबसे बड़ी बात कि केन्द्रीय नेतृत्व पूरी बेशर्मी से सारी बातों पर पर्दा डाले हुए था. ऐसे में जनता को व्यवस्था परिवर्तन से अधिक सत्ता परिवर्तन की चाह थी, जिसके लिए नरेन्द्र मोदी जनता को सबसे उपयुक्त व्यक्ति समझ आये. गुजरात के विकास-कार्य, सभी धर्मों, जाति के लोगों को साथ लेकर चलने की अवधारणा, जन-सुरक्षा के मामलों में स्पष्ट नीति ने जनता के सामने विकल्प स्पष्ट कर दिया था. कहा जाये कि जनता लोकतंत्र में केन्द्रीय सत्ता द्वारा फैलाई राजनैतिक बीमारी को दूर करने की दवा नरेन्द्र मोदी के रूप में देखने लगी थी. इस विश्वास को मोदी की रैलियों, उनकी सक्रियता, उनकी सोच, कार्य-प्रणाली ने और भी पुख्ता किया.
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संभव था कि हाल-फ़िलहाल में उभर कर सामने आई आम आदमी पार्टी केंद्र में सत्ता परिवर्तन का एक माध्यम बनती किन्तु उसके अत्यंत कम समय में अत्यधिक विवादित हो जाने ने उसकी साख को समाप्त कर दिया. कांग्रेस विरोध से उपजा ये दल लोकसभा चुनाव तक आते-आते भाजपा विरोध, मोदी विरोध तक सिमट गया था. ऐसे में जनता के सामने सिवाय भाजपा को, सिवाय मोदी को चुनने के कोई और विकल्प रह भी नहीं जाता था. शेष दलों की प्रमाणिकता को जनता पूर्व में देख चुकी थी, इस कारण उन दलों पर दोबारा दांव लगाना जनता को स्वीकार्य न हुआ. भले ही नमो-लहर सोशल मीडिया के द्वारा उत्पन्न हुई हो किन्तु उसकी तरंगों को जनमानस ने अपने दिल-दिमाग में, मन-मष्तिष्क में महसूस किया. नमो-लहर ने भारतीय जनमानस के विश्वास पर आसीन होकर देश को एक वास्तविक राष्ट्रवादी सरकार प्रदान की है जो किसी भी तुष्टिकरण से इतर जनहितकारी कार्यों को अंजाम देने में विश्वास करती है. पूर्व में किये गए इसके कार्य और वर्तमान में अनेक राज्यों में संचालित होते विकासपरक कार्य इसके उदाहरण हैं. बहुसंख्यक हों अथवा अल्पसंख्यक, सभी को पर्याप्त सम्मान, कार्य करने के अवसर, आजीविका के साधन, रोटी-कपड़ा-मकान आदि समुचित रूप में प्राप्त हुआ है. समवेत सकल विकास की यही सोच देश को नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नया पड़ाव प्रदान करवाएगी, ऐसा विश्वास किया जा सकता है. अब दुष्प्रचार की नहीं, सभी को सहयोग देने की आवश्यकता है.

1 comment:

ब्लॉग बुलेटिन said...

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन बड़ा धमाका - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !