09 मार्च 2010

शर्मनाक! शर्मनाक!! शर्मनाक!!! शर्मनाक!!!! शर्मनाक!!!!!

शर्मनाक! महिला आरक्षण विधेयक संसद में पेश तो हुआ किन्तु पारित नहीं हो सका।

शर्मनाक! संसद के दोनों सदनों में हंगामा होता रहा और सरकार की ओर से किसी तरह की कठोर कार्यवाही नहीं की गई।

शर्मनाक! दलितों, पिछड़ों के लिए आरक्षण की माँग कर विधेयक का विरोध करने वाले टिकट वितरण के समय दलितों, पिछड़ों को विस्मृत कर जाते हैं।

शर्मनाक! सरकार स्वयं को बचाने की खातिर गिने-चुने सांसदों के हाथों की कठपुतली बनी हुई है।

शर्मनाक! सर्वसम्मति के बजाय स्वयं के सिर पर सेहरा सजवाने की लोलुपता में कांग्रेस ने चुपचाप सारा हंगामा होते देखा और अप्रत्यक्ष सहमति सी दी।

शर्मनाक! संसद में बहुमत पर बाहुबल की विजय हुई और संसद बिना किसी ठोस निर्णय के स्थगित होती रही।

शर्मनाक! सर्वदलीय बैठक की नौटंकी तब की गई जब यह विश्वास हो गया कि अब विधेयक पारित नहीं हो पायेगा। यही बैठक विधेयक के पेश होने के पूर्व क्यों नहीं हुई?


शर्मनाक! शर्मनाक!! शर्मनाक!!! शर्मनाक!!!! शर्मनाक!!!!!


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चित्र गूगल छवियों से साभार




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