26 फ़रवरी 2026

अनावश्यक ज्ञान बाँटते अज्ञानी-जन

 ऐसे बहुत से लोग होते हैं जिनसे अपना घर न सँभलता है; घर की किसी योजना में उनकी कोई राय नहीं ली जाती है; जिनका काम न केवल घर में बल्कि आस-पड़ोस में भी सिर्फ बकैती करना हो, वे लोग भी विदेश-नीति पर, वैश्विक सम्बन्धों पर, दक्षिण-एशिया के विविध बिन्दुओं पर अपनी राय दे रहे हैं. कई लोग विदेश नीति को असफल बताने में लगे हैं. हास्यास्पद ये भी है कि जो व्यक्ति विगत दो दशक से अधिक समय से संवैधानिक पद पर है, उसके निर्णयों पर, उसके कार्यों पर वे लोग सलाह दे रहे हैं, जिनके हिस्से में किसी तरह का सम्मान आज तक नहीं आया है.

 



यहाँ एक बात स्पष्ट कर दें कि जिस UGC का विनियम 2026 का सहारा लेकर अपने लोग ही अब पीठ में छुरा भोंकने की स्थिति में आ गए हैं, आस्तीन का साँप बने बैठे हैं, वे सहज भाव में UGC के विनियम 2012 को पढ़ लें. ध्यान देने की आवश्यकता है कि अमित शाह के द्वारा अर्बन नक्सलवाद का सफाया करने वाले कदम उठाये जाने के बाद से ही क्यों इस तरह के मुद्दे उभर कर सामने आने लगे? इसका एक सीधा सा उत्तर है कि नक्सलवाद से, वामपंथ से जुड़े लोगों को भली-भांति मालूम है कि मोदी की टीम में ऐसे बकबकी करने वालों की संख्या ज्यादा ही है. वे एक बार में ही बहकने वाली मुद्रा में आ जाते हैं, उनको बहकाया जाना आसान है.

 

बहरहाल, बहेलिया (वामपंथ, अर्बन नक्सलवाद) ने जाल बिछाया और बकवास करने वाले कबूतर उसमें फँस गए. अब उन फँसे कबूतरों को सरकार के, मोदी के और तो और और योगी के भी हर कदम, हर निर्णय गलत लग रहे हैं. अब क्या ही कहा जाये, जो इन लोगों के बापों के समय में नहीं हुआ, वो सब हो गया, इनको देखने को मिल गया तो बकबकी निकल रही जुबान से, नहीं तो छिलवा दिए गए थे किसी समय में.


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