अशासकीय शिक्षण संस्थानों में आये दिन वहाँ के शिक्षक प्रबंधन समिति, संस्थान प्रमुख (प्राचार्य/प्रधानाचार्य) की तानाशाही का शिकार होते रहते हैं. इस सम्बन्ध में कई बार शिक्षकों की ओर से अपनी समस्या को सरकार के समक्ष रखा भी गया. शिक्षकों के विरुद्ध कार्यवाही करने की मंशा को लेकर इस बार विधान परिषद् उत्तर प्रदेश सभापति कुँवर मानवेन्द्र सिंह द्वारा सकारात्मक पहल की गई है. उनके द्वारा निर्देशित किया गया है कि अब बिना अनुमति लिए शिक्षकों के विरुद्ध कार्यवाही नहीं की जा सकेगी. प्रबंध तंत्र द्वारा निलंबन, सेवा समाप्ति जैसे कदम उठाये जाने के पहले शिक्षा सेवा चयन आयोग से अनुमति लेनी होगी.
बात-बात पर उच्चाधिकारियों को कार्यवाही हेतु प्रेषित करने की धमकी देने वालों के दिमाग़ अब सन्तुलन की स्थिति में आ जाएँगे.
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अमर उजाला
22-02-2025

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