सनातन के वास्तविक लोग, महाकुम्भ
के सजग नागरिक कथित मीडिया और इस कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के हमले से सावधान रहें.
पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा खम्भा माना जाता है. यहाँ ध्यान रहे कि 'माना' जाता है, वो चौथा खम्भा है नहीं. लोकतंत्र में मात्र तीन खम्भे ही सहज स्वीकार्य हैं-कार्यपालिका,
विधायिका, न्यायपालिका. पत्रकारिता को जबरिया एक खम्भा घोषित कर
दिया गया है. इस चौथे स्तम्भ की आड़ में उपजे कथित जबरिया, नियंत्रण-मुक्त, उच्छृंखल सोशल मीडिया खम्भे ने बहुत नुकसान पहुँचाया
है. इसे प्रयागराज के महाकुम्भ में देखा जा सकता है.
हर हाथ मोबाइल, हर हाथ इंटरनेट
ने सबको सोशल मीडिया चैनल बना दिया है. जहाँ मन हुआ मुँह उठाकर घुस पड़े. न सवाल पूछने
की अकल, न विषय की गम्भीरता,
न वातावरण-देशकाल का भान.... बस मोबाइल
का मोबाइल ओं और बन गए पत्रकार. सनातन संस्कृति के पवित्र, पावन, भव्य, संस्कारित आयोजन महाकुम्भ
पर ऐसे कथित मीडिया मंचों से बचने की आवश्यकता है. इन कथित मानसिकता वालों को पर्याप्त
मदद मिल रही है कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से.
सावधान रहें.

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