समझ नहीं आ रहा कि
इसे बेशर्मी कहा जाये या कुछ और...??
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गांधी महाविद्यालय,
उरई के अनेक शिक्षकों एवं कर्मचारियों
के वेतन से NPS की नियमित कटौती
मई 2019 से हो रही है. इसके बाद
भी आजतक किसी भी शिक्षक अथवा कर्मचारी की धनराशि उसके NPS खाते में प्रदर्शित नहीं हो रही है. प्राचार्य से लगातार
इस बारे में निवेदन करते-करते थक जाने के बाद 12 अगस्त 2024 को इस बारे में SP जालौन,
DM जालौन, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी झाँसी, निदेशक उच्च शिक्षा प्रयागराज, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, राज्यपाल उत्तर प्रदेश, वित्त मंत्री भारत सरकार, गृह मंत्री भारत सरकार, प्रधानमंत्री भारत सरकार, विजिलेंस उत्तर प्रदेश को लिखित/ई-मेल से शिकायत
भेजी.
एक महीना से अधिक हो
जाने के बाद भी फोन सम्बन्धी कार्यवाही के अलावा प्रक्रिया की कोई जानकारी नहीं. प्राचार्य
की स्थिति ये है कि वह घनघोर बेशर्मी लादे हुए आज भी बायोमेट्रिक उपस्थिति,
बिना विद्यार्थियों के कक्षाओं की चेकिंग
में व्यस्त है. लगता है कि अपने वकील मित्र की सलाह मानते हुए सीधे अदालत की शरण में
जाना चाहिए था. जो बीती सो बीती.... अगले सप्ताह इस मामले को अदालत में लेकर जाना ही
होगा. आखिर मामला वित्तीय घोटाले का समझ आ रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि मई 2019 से रुके धन का ब्याज कौन देगा? विगत पाँच वर्षों की वित्तीय हानि का जिम्मेवार
कौन होगा?
लगता है कि प्राचार्य
सहित उसके अन्य सहायकों के जेल जाए बिना मामला अब सुलझने वाला नहीं. यथोचित सलाह,
जानकारी अपेक्षित है.
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