बीएसएनएल के अलावा बाक़ी कम्पनियों द्वारा रिचार्ज शुल्क बढ़ा देने के बाद सोशल
मीडिया पर सिम पोर्ट करवाने की क्रांति दिखने लगी. (व्यावहारिक रूप में ऐसा नहीं दिख
रहा)
बहरहाल, जुलाई 2003 से बीएसएनएल
का नम्बर हमारे पास नियमित रूप से बना हुआ है. इन 21 वर्षों में नेटवर्क ने जी भर कर
छकाया है, हड़ाया है. इंटरनेट के
आने के बाद भी इसके नेटवर्क में कोई सुधार नहीं आया. उरई हो या शहर से बाहर किसी भी
राज्य, किसी भी शहर में,
नेटवर्क की हालत ‘भगवान से न लगे’ वाली
रही. अनेक मित्रों ने इस नम्बर को दूसरी कम्पनी में पोर्ट करवाने की सलाह दी,
दबाव भी डाला पर हमने ऐसा नहीं किया. हाँ,
मोबाइल पर नेट चलाने के लिए अवश्य ही एयरटेल,
जियो आदि की सिम लेते रहे, बदलते रहे. बीएसएनएल को पोर्ट न करवाने के पीछे
बस एक भावनात्मक सोच ये है कि जब उरई में कोई और सर्विस न थी तब इसी बीएसएनएल ने हमें
हमारे अपनों से, ग़ैरों से जोड़े
रखा था.
आज सोशल मीडिया में सिम पोर्ट की जो क्रांति चल रही है, उसका तब तक कोई मतलब नहीं जब तक कि बीएसएनएल अपने नेटवर्क
को नहीं सुधारता है. नम्बर पोर्ट करवा लेना समस्या का समाधान नहीं है.
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