05 November 2020

ई-कंटेंट कोई राकेट साइंस नहीं

कोरोनाकाल के कारण ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था बहुत प्रभावी समझ आ रही है. ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था के बारे में इधर नई शिक्षा नीति में भी जोर दिया गया है. इसके साथ-साथ बहुत सी जगहों पर ऑनलाइन सामग्री को अपलोड किये जाने की नीति बनने लगी है. इस तरफ राज्य सरकार ने भी कदम बढाए और महाविद्यालयीन शिक्षकों के द्वारा बनाये गए कंटेंट को अपलोड करवाए जाने की कवायद शुरू करवा दी गई. इंटरनेट, तकनीक भरे इस दौर में बहुत से लोगों के लिए ई-कंटेंट का बहुत विशिष्ट अर्थ निकाल लिया जाता है. असल में ये कोई राकेट साइंस नहीं है बल्कि हम सबके बीच उपयोग होने वाली शब्दावली ही है. बस जैसे ही किसी भी आम शब्द में, आम कार्य में तकनीक जुड़ जाए, इंटरनेट जुड़ जाए तो उसे एकदम से हौआ समझ लिया जाता है अथवा बना दिया जाता है. इसी तरह से ई-कंटेंट के साथ हुआ है. देखा जाये तो ई-कंटेंट किसी भी रूप में कोई बहुत बड़ी अथवा क्लिष्ट शब्दावली नहीं है, बस उसे समझने की आवश्यकता है.



पहले बात तो हम इसे ऐसे समझें कि हमारे आसपास जो भी सामग्री है, जिस भी तरह से हम जानकारी एकत्र कर रहे हैं वह सब कंटेंट है. इस शब्द को यदि हम हिन्दी में जानने का प्रयास करें तो सामग्री शब्द इसी को कहते हैं. अब संभव है कि आपको कंटेंट शब्द कुछ अपना सा लगा हो. सामान्य बोलचाल में कहें तो वे सभी चीजें कंटेंट हैं जिन्हें हम किसी भी तरह के माध्यम से देखते
, सुनते, पढ़ते या समझते हैं. इसी तरह के कंटेंट से हम जानकारी प्राप्त भी करते हैं और दूसरों तक जानकारी पहुँचाते भी हैं. टीवी पर कोई कार्यक्रम देखना,किसी भी सोशल मीडिया पर कोई वीडियो देखना,कुछ पढ़ना आदि सबकुछ कंटेंट के रूप में ही समाहित है. बस समझने वाली बात इतनी है कि जो जानकारी हम इंटरनेट के द्वारा प्राप्त कर रहे हैं वह कंटेंट तो है मगर इंटरनेट से जुड़ी होने के कारण उसे हम लोग ई-कंटेंट पुकारने लगते हैं. यह सामग्री लिखित, वीडियो, चित्र अथवा ऑडियो के रूप में हो सकती है. मूलरूप से कंटेंट इसी रूप में हमारे आसपास रहता है.


अब सवाल उठता है कि क्या ई-कंटेंट के लिए कुछ ख़ास प्रयास करने होते हैं? क्या ई-कंटेंट में कुछ अलग तरह की विशेषता समाहित रहती है? कुछ लोगों की जिज्ञासा रहती है कि ई-कंटेंट को कितना बड़ा अथवा छोटा होना चाहिए? ऐसा सवाल मुख्यतया लिखित कंटेंट के लिए होता है. यहाँ प्रमुख बात तो ये है कि कंटेंट अच्छा होना चाहिए. वह लोगों द्वारा पढ़ा जाये तो उसका आनंद लिया जाये, दूसरों को भी पढ़ने को प्रेरित किया जाये. कंटेंट चाहे वह टेक्स्ट के रूप में हो, वीडियो के रूप में या फिर ऑडियो के रूप में एक बात विशेष रूप से याद रखनी चाहिए कि वह बहुत लम्बा न हो या फिर बहुत छोटा न हो. पहले पहल कंटेंट के अपलोड करने के लिए ब्लॉग का प्रयोग किया जा सकता है. सीखने की प्रक्रिया से गुजरने के दौरान स्वतः समझ आने लगता है कि किस तरह के कंटेंट की माँग अधिक है. फिलहाल तो किसी भी ई-कंटेंट को लिखते समय, उसे ब्लॉग पर अपलोड करते समय याद रखना चाहिये कि ब्लॉग पर कंटेन्ट इस तरह से लिखा जाए कि लोग उसे पढ़ने को प्रेरित हों तथा अन्य लोगों को भी पढ़ने को प्रेरित करने के साथ-साथ उससे कुछ नया सीखने का प्रयास करें.



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