16 August 2019

स्वतंत्रता और सुरक्षा का संयोग

स्वतंत्रता दिवस की और पावन पर्व रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ.

इस वर्ष का सावन माह अपने आपमें अभूतपूर्व घटनाओं का गवाह रहा है. इस अभूतपूर्व स्थिति में इए सुखद और पावन संयोग ही कहा जायेगा कि स्वतंत्रता का महोत्सव और भाई-बहिनों के स्नेह का पर्व एक दिन ही मनाया जा रहा है. इसी को किसी न किसी रूप में हम सभी संयोग कहते हैं, सितारों की चाल कहते हैं, सौभाग्य कहते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि यदि हम सावन माह की गतिविधियों को देखें तो देशहित में कई सारे निर्णय संपन्न हुए.


देश के वैज्ञानिकों की सफल यात्रा चंद्रयान के रूप में आरम्भ हुई. इस यात्रा की कमान देश की मातृशक्ति के हाथ में थी, यह भी अपने आपमें गौरवशाली क्षण था. इस अभियान के द्वारा जो कदम अन्तरिक्ष क्षेत्र में भारतीय वैज्ञानिकता रखने जा रही है, वैसा आज तक किसी भी देश द्वारा उठाया नहीं गया है.


चंद्रयान से शुरू वैज्ञानिक सफलता यात्रा अभी आरम्भ ही  हुई थी, देशवासी अभी इस उमंग की सराबोर से उबरे भी न थे कि एक कदम सामाजिक भेदभाव दूर करने के लिए उठाया गया. तीन तलाक की समाप्ति भले ही एक समुदाय विशेष से संदर्भित हो मगर इसके समाप्त होने से देश की मातृशक्ति को समानता का अधिकार प्रदान किया गया, उनके व्यक्तित्त्व को एक इन्सान समझने की परिभाषा से अलंकृत किया गया.


इसके ठीक एक सप्ताह बाद ही एक देश, एक संविधान के विधान को स्पष्ट स्वरूप प्रदान किया गया. किसी समय राजनैतिक प्रतिस्थितियों के चलते उठाया गया कदम कालांतर में न केवल राजनैतिक विभेद का कारक बना बल्कि देश के भूभाग को भी एक तरह से अलग-थलग किये रहा. धारा 370 की समाप्ति के साथ ही दो राज्यों का निर्माण होने ने राजनैतिक सजगता की दिशा में कदम बढ़ाया तो देश को वास्तविक रूप में कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक होने का सन्देश दिया. यह भी देश की स्वतंत्रता के प्रति सार्थकता कही जा सकती है.


इन घटनाओं का होना शायद पूर्व-निर्धारित रहा होगा, शायद एक संयोग रहा होगा कि स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन एकसाथ, एक दिन मनाने का अवसर मिला. इसको एक सन्देश के रूप में देखने की आवश्यकता है. रक्षाबंधन को महज भाई-बहिन के पवित्र प्रेम के रूप में, सुरक्षा के रूप में देखने से इतर अब व्यापकता में देखने की आवश्यकता है. सरकारी स्तर पर स्वतंत्रता के सच्चे अर्थ स्पष्ट करते हुए वैज्ञानिकता को स्थापित किया, सामाजिकता को मान्यता दी और राष्ट्रीयता को एकता प्रदान की. अब हम सभी नागरिकों की जिम्मेवारी बनती है कि इस स्वतंत्रता को सुरक्षा प्रदान करें. अपने कार्यों से, अपनी जिम्मेवारियों से, अपने कर्तव्यों से देश को, समाज को, नागरिकों को सफलता की राह प्रदान करें, सुरक्षा की भावना का विकास करें, उनको आज़ादी का भान बना रहने दें.


आशा है कि हम सभी स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन के एकसाथ मनाये जाने के सन्देश को समझेंगे, इसमें अन्तर्निहित भावना को आपस में मिलकर और पुष्ट करेंगे. यदि हम ऐसा कर पाते हैं तो निश्चित ही हम सभी स्वतंत्रता का महोत्सव को सही आयाम प्रदान करेंगे, रक्षाबंधन की पवित्रता को अक्षुण्य रख सकेंगे. इसी पावन भावना के साथ आइये एक कदम समानता, भाईचारे, स्नेह, सुरक्षित स्वतंत्रता की ओर बढ़ाएं.

जय हिन्द

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