27 April 2018

सीखना चाहिए ऐसे निस्वार्थ कार्यों से

कल रात हॉस्टल के हमारे भाइयों ने एक नेक और पुनीत कार्य किया. उनके इस कार्य को आप सबके सामने लाने का उद्देश्य उन भाइयों को प्रोत्साहित करना तथा समाज को इंसानियत के संदेश से परिचित करवाना है. 
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रात लगभग आठ बजे के आसपास छोटे भाई ललित को उसके दोस्त के द्वारा ख़बर मिली कि एक व्यक्ति अपने पुत्र के साथ अहमदाबाद स्टेशन से गोरखपुर की यात्रा कर रहा था. गुना स्टेशन के पास उसके पिता का ह्रदयघात से निधन हो गया. ट्रेन के स्टाफ़ ने मृतक को नियमों का हवाला देकर यात्री डिब्बे में पार्थिव शव ले जाने से रोका और बेटे को पिता का शव ब्रेकवेन में ले जाने के लिये उतार दिया. तभी ट्रेन चल दी और दुःखी पुत्र अपने पिता की मृत देह को ब्रेकडिब्बे में नहीं पहुँचा पाया.

युवक ने जब गुना स्टेशन पर अपने पिता की मृत देह के साथ बदहवास अवस्था में मदद की गुहार लगाई तब रेल्वे के कर्मचारियों ने मृत देह को उसके पुत्र के साथ ग्वालियर जाने वाली पैसेन्जर में चढ़ा दिया. मृतक का पुत्र इस स्थिति में नहीं था कि वह अपने पिता की मृत देह को अपने परिजनों के पास गोरखपुर तक ले जा सकता. 

ख़बर मिलते ही ग्वालियर में रह रहे ललित सहित कई बड़े-छोटे भाई उस युवक की मदद को सक्रिय हो गए. रेलवे की तरफ़ से प्रयास भी जब सकारात्मक स्थिति में नहीं पहुँच सके तो हॉस्टल के भाइयों ने तथा ग्वालियर की जीवन रक्षक संजीवनी संस्था (ललित इससे जुड़े हैं) ने एक एम्बुलेंस की व्यवस्था की. इसके साथ ही उनके द्वारा आर्थिक मदद और भोजन आदि का इंतज़ाम कर युवक को उसके पिता के पार्थिव शरीर सहित रात ग्यारह बजे के आसपास गोरखपुर को रवाना किया. 

अभी-अभी ललित से जानकारी मिली कि युवक अपने परिजनों तक पहुँच गया है. मृतक को श्रद्धांजलि, युवक और उसके परिवार को ईश्वर दुःख सहने की शक्ति दे. 

हॉस्टल के सभी सक्रिय छोटे भाइयों को आशीर्वाद... बड़े भाइयों को उनके प्रयासों के लिए नमन.
    

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