12 August 2017

मासूम न्याय चाहते हैं - योगी जी के नाम खुला ख़त

माननीय योगी जी,
सादर प्रणाम,
आपके अपने क्षेत्र गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज में दो दिन के भीतर तीस बच्चों की मृत्यु कोई सामान्य घटना नहीं है. यह उस समय और भी असामान्य हो जाती है जबकि आपका दौरा ऐसी ह्रदयविदारक घटना के ठीक पहले हुआ हो. ये सभी को भली-भांति विदित है कि उस दिन का आपका दौरा विशेष रूप से मेडिकल कॉलेज के लिए ही था. लगभग पूरा ही दिन आपने मेडिकल कॉलेज में इंसेफलाइटिस के मरीज बच्चों के बीच गुजारा था. आपने ICU और CCU में काफी देर तक इंसेफेलाइटिस से पीड़ित बच्चों और उनके परिजनों से मुलाकात भी की थी. इसके साथ ही आपने इसी सम्बन्ध में एक मीटिंग भी ली थी, जिसमें इस बीमारी से जुड़े चिकित्सकों, विशेषज्ञों आदि से सुरक्षा सम्बन्धी तमाम बिन्दुओं पर संतोषजनक जानकारी ली थी. इसके बाद ऐसा क्या हुआ कि बच्चों की एक-एक करके मृत्यु होने लगी.

प्रथम दृष्टया इसे ऑक्सीजन की सप्लाई बंद होना बताया गया वहीं इसके उलट बयान ये भी आया कि मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से किसी रोगी की मृत्यु नहीं हुई. चलिए एक बारगी मान भी लिया जाये कि मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की सप्लाई बाधित नहीं हुई थी पर क्या इससे इंकार किया जा सकता है कि वहां तीस बच्चों की म्रत्यु नहीं हुई? क्या इससे इंकार किया जा सकता है कि किसी न किसी स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही के चलते ये हादसा हुआ? क्या इससे इंकार किया जा सकता है कि बच्चों की सुरक्षा, उनके इलाज को लेकर किसी न किसी रूप में असंवेदनशीलता का परिचय दिया गया? आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? क्यों नहीं प्रशासन में सरकार का भय है? क्यों नहीं समाज के किसी भी क्षेत्र में प्रशासनिक सजगता देखने को मिल रही है? क्यों नहीं अपराधियों में, निष्क्रिय लोगों में, कर्तव्यहीन लोगों में, गैर-जिम्मेवार लोगों में सरकारी तंत्र का, उन पर सख्त कार्यवाही होने का डर दिख रहा है? आखिर क्यों? ये सवाल एक हमारे नहीं, बल्कि उन सबके हैं जिन्होंने बड़ी आशा-विश्वास से प्रदेश की अव्यवस्था को व्यवस्था में बदलना चाहा था. प्रदेश के बहुत बड़े तबके को अभी भी आपके सख्त कदम की अपेक्षा है क्योंकि विगत के तीन-चार माह में उन्हें सकारात्मक परिवर्तन देखने को नहीं मिला है. आज भी सड़क चलते अपराध हो रहे हैं. आज भी हत्याएं, डकैती, हिंसा पूर्व की भांति हो रही हैं. आज भी अराजक तत्त्वों से लोगों में भय बना हुआ है. आज भी प्रशासन पूरी तरह निष्क्रियता दिखा रहा है.

इतना सबकुछ होने के बाद भी प्रदेश के बहुतायत नागरिकों में आपके प्रति विश्वास, आस्था है कि आप यथाशीघ्र कोई ठोस कदम उठाकर प्रदेश को अराजकता से बाहर निकाल लेंगे. इस विश्वास के बीच गोरखपुर मेडिकल कॉलेज की ये घटना ठेस पहुँचाने का काम करती है. आपकी ईमानदारी, आपकी सत्यनिष्ठा, आपकी कार्यशैली, आपकी जीवनशैली, आपकी साफगोई की तरफ अब लोग निगाह लगाये बैठे हैं कि मासूमों को इंसाफ मिले. मृत्यु के अन्य कारणों की जाँच होती रहेगी किन्तु प्रथम दृष्टया बच्चों की मृत्यु होना सामने आया है. इससे सम्बंधित सभी जिम्मेवार लोगों को तत्काल सजा देने का काम करके आप निराश लोगों में आशा का संचार कर सकते हैं. इसके बाद आप सम्पुर्ण प्रदेश के प्रशासनिक ढाँचे में सख्ती लाने का कार्य करिए. प्रशासन को स्वतंत्रता से कार्य करने देना चाहिए पर इतना भी स्वतंत्र नहीं कर देना चाहिए कि उसमें सरकार के प्रति ही डर-भय न रह जाये.

यदि किसी मुख्यमंत्री के स्थल विशेष के दौरे और बीमारी विशेष से सम्बंधित मीटिंग लेने के बाद भी हीलाहवाली का ये आलम रहे कि तीस बच्चों की मृत्यु हो जाये तो समझा जा सकता है कि प्रशासनिक मशीनरी किस तरह से लापरवाह, अक्षम, असंवेदनशील है. ऐसे गैर-जिम्मेवार लोगों पर यथाशीघ्र सख्त कार्यवाही होनी चाहिए. कार्यवाही, सजा इस तरह की हो कि आने वाले समय में इस तरह की लापरवाही करने की, अपने दायित्व से खिलवाड़ करने की गलती कोई न करे.

आपसे आशा है कि आप इस संवेदनशील, ह्रदयविदारक घटना पर किसी भी तरह की राजनीति नहीं होने देंगे तथा सख्त और सकारात्मक कदम उठाते हुए प्रदेश की जनता को सार्थक सन्देश देने का कार्य करेंगे.


आपका ही.. 

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