18 May 2016

एकाकी होता इंसान विस्मृत होती कला

इन दिनों पार्श्व गायक सोनू निगम का एक वीडियो सोशल मीडिया में बुरी तरह से वायरल हुआ है. इसमें वे वृद्ध नजर आ रहे हैं. वे किसी शहर में कभी किसी नुक्कड़, कभी किसी चौराहे, कभी किसी फुटपाथ पर अपने हारमोनियम के साथ गीत गुनगुनाते दिख रहे हैं. ऐसा नहीं है कि वे सिर्फ अकेले गीतों को गुनगुना रहे हैं, हारमोनियम को बजा रहे हैं. उनके गुनगुनाने को सुनने वाले भी हैं. उनकी आवाज़ की मधुरता को रिकॉर्ड करने वाले युवक भी हैं. उनके गीत की समाप्ति पर तालियाँ बजाने वाले युवक-युवतियाँ भी हैं तो बच्चे भी हैं. ‘आपकी आवाज़ बहुत अच्छी है’ कहकर उनकी आवाज़ को मोबाइल पर रिकॉर्ड करने वाला युवा वर्ग भी है तो सोनू निगम की हथेली थाम ‘आपने नाश्ता किया या नहीं’ कहते हुए चंद रुपये चुपके से उनके हाथ में छिपा देने वाला संवेदनशील युवा भी है. आश्चर्य की बात ये है कि सोनू निगम ने अपने रूप को इस तरह से बदला है कि लोग उनके एकदम निकट होने के बाद भी उनको पहचान नहीं पाते हैं. इससे भी बड़ा आश्चर्य इसका कि वे अपने गानों को ही गा रहे हैं, अपनी ही स्टाइल में गा रहे हैं फिर भी उनके आसपास एकत्र भीड़ उनको पहचान नहीं पाती है. इसे पहचान का संकट कहा जाये या फिर इंसानों की अपने आपमें घिरे रहने की प्रवृत्ति. इसे सामान्यजन द्वारा सड़क के किनारे, फुटपाथ पर बैठे, चौराहों पर बैठे तृणमूल व्यक्ति को नकारने की मानसिकता समझी जाये अथवा नितांत एकाकीपन जिसमें अपने सिवाय सबकुछ समाप्त सा होता चला जा रहा है. कुछ तो ऐसा है जिसको इस वीडियो के द्वारा सहजता से समझा जाना चाहिए.


इस वीडियो के बनाये जाने के, सोनू निगम के वृद्ध के आवरण में आने के उनके अपने क्या निहितार्थ हैं ये तो वे ही बेहतर बता सकते हैं किन्तु इतना तो समझना ही होगा कि वे महज पब्लिसिटी स्टंट के लिए ऐसा करने नहीं आये हैं. जैसा कि इस वीडियो के बनाने वाली कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि का कहना है कि उनका उद्देश्य लोगों को घरों से बाहर निकाल कर संगीत तक लाना है, वो भी एकाएक समझ में नहीं आता है. एक साधारण सा व्यक्ति, जो साधारण से मैले-कुचेले कपड़े पहने है, साधारण सी चप्पलें पैरों में फँसाये है, घनी बेतरतीब दाढ़ी भरा चेहरा लिए, बोरे को काँधे पर लटकाए, एक सामान्य सा हारमोनियम लिए कुछ गीत गुनगुनाने में लगा है उसकी तरफ लोग संगीत प्रेम के कारण नहीं वरन दया, कौतूहल, संवेदना, सहानुभूति के नाम पर ही आकर्षित होंगे. ऐसे में घरों से लोगों को बाहर तो लाया जा सकता है मगर उँगलियों पर गिने जाने वाले लोगों को ही. ऐसे में लोगों को संगीत के प्रति आकर्षित तो किया जा सकता है मगर या तो रिकॉर्ड करने भर के लिए या फिर इंतजार कर रहे कुछ पलभर के लिए. 



वर्तमान में इन्सान अपने जीवन की आपाधापी में इस कदर खो गया है कि उसे सिर्फ अपना भविष्य दिखाई दे रहा है. वर्तमान को पूरी तरह नजरंदाज करके वो सिर्फ और सिर्फ भविष्य को सुखमय बनाने के लिए भागा जा रहा है. इस अंधी दौड़ का अंत कहाँ है, उसे पता नहीं है. इस भागमभाग के बाद भी उसका भविष्य सुखमय होगा या नहीं उसे पता नहीं. वर्तमान के उसके प्रयास उसके भविष्य को कितना सुरक्षित रख पा रहे हैं, वो स्वयं कुछ बता पाने की स्थिति में नहीं है. भविष्य को लेकर वो नितांत अनिश्चय में है. जिस वर्तमान में वो है, जिस वर्तमान की स्थिति को वो भली-भांति बयां कर सकता है, उससे बेखबर बना हुआ है. भविष्य की अंधी चाह में वर्तमान को विस्मृत कर देने ने ही अनेकानेक समस्याओं को जन्म दिया है. हर हाथ में सिमट चुकी तकनीक ने जीवन को जितना सरल बनाया है उतना ही जटिल भी बनाया है. दुनिया के साथ जितना जोड़ा है उससे कहीं ज्यादा अपनों से दूर किया है. ज्ञान के भंडार को जितना समृद्ध किया है उससे कहीं अधिक खोखले ज्ञान की तरफ भी धकेला है. घर-परिवार के बीच भी इन्सान अकेला महसूस करने लगा है. विश्वग्राम की परिभाषा रचने के बाद भी व्यक्ति एकाकी दिखने लगा है. भागता-दौड़ता आदमी भी संज्ञाशून्य सा समझ आने लगा है. नितांत अपने तक सिमट चुकी इस दुनिया में व्यक्ति के पास अब सिर्फ अपने लिए वक्त है. ऐसे में सड़क किनारे, किसी फुटपाथ पर, किसी चौराहे पर सुरीली आवाज़ में गाता कोई व्यक्ति पल दो पल को ही आकर्षित करता है. ऐसे में सोनू निगम का अथवा वीडियो बनाने वाली कंपनी किस हद तक अपने उद्देश्य में सफल होंगे ये भविष्य के गर्भ में छिपा है. इस वीडियो के द्वारा सोनू निगम का अथवा सम्बंधित कंपनी का सन्देश कुछ भी कहता हो किन्तु एक बात स्पष्ट हुई है कि कला के नाम पर आपाधापी भरी ज़िन्दगी में लगभग सभी इन्सान शून्यता की तरफ जा रहे हैं. इस शून्यता में उन्हें व्यक्ति की कला उसके बाहरी आवरण, बाहर चकाचौंध से प्रभावित करती है, शेष दशा में कला उनके लिए क्षणिक मनोरंजन का माध्यम मात्र होती है. 

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चित्र गूगल छवियों से साभार 

2 comments:

HARSHVARDHAN said...

आज की बुलेटिन भारत का पहला परमाणु परीक्षण और ब्लॉग बुलेटिन में आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है। सादर ... अभिनन्दन।।

Saif Mohammad Syad said...

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