14 March 2016

कुंठित मानसिकता से जन्मी आतंकी समानता



आरएसएस और आईएसआईएस को एकसमान बताने जैसा बयान कोई पहली बार सामने नहीं आया है. इससे पहले भी एकाधिक अवसरों पर आरएसएस को आतंकी संगठन के समान बताया जाता रहा है. आश्चर्य की बात ये है कि ऐसा बिना किसी सबूत के महज विरोध करने के लिए ही किया जाता है. गैर-भाजपाई दलों के सामने जब कोई और मुद्दा नहीं रह जाता है तो उनके द्वारा भाजपा-विरोध के नाम पर संघ को आतंकी संगठन जैसा बताया जाने लगता है. दरअसल ये एक तरह की मानसिक कुंठा है जो समय-समय पर सामने आती रहती है. इस मानसिक कुंठा में भाजपा के सत्तासीन होने के बाद और भी वृद्धि हुई है. आज के सूचना, तकनीकी, दूरसंचार और सोशल मीडिया के तीव्रतम दौर में देशवासी आईएसआईएस के क्रियाकलापों से भी परिचित हैं, साथ ही संघ की क्रियाविधि से भी परिचित हैं. ऐसे में ऐसे इसकी सम्भावना न्यूनतम ही है कि ऐसे किसी भी बयान से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता में कमी आएगी. बिना किसी कारण, बिना किसी सन्दर्भ के अचानक ही किसी का खड़े होकर संघ के खिलाफ बोल देने का कारण अपने आपकी राजनीति को ही जीवित बनाये रखना है. कुछ ऐसा ही हाल ही में हुआ. संघ की तुलना एक ऐसे आतंकी संगठन से करना जिसे संयुक्त राष्ट्र संघ से सबसे क्रूर आतंकी संगठन घोषित कर रखा है, निश्चित रूप से सम्बंधित नेता जी की हताशा को प्रदर्शित करता है. यहाँ विशेष बात ये है कि इस तरह की समानता यदि किसी नवोन्मेषी राजनीतिज्ञ ने की होती, किसी हाशिये पर खड़े नेता ने की होती, किसी शहर-गली के छुटभैये नेता ने की होती तो ऐसे बयान को नजरंदाज किया जा सकता था, किन्तु राष्ट्रीय राजनीति के कद्दावर, सक्रिय राजनीतिज्ञ द्वारा ऐसी समानता करना यकीनन नजरंदाज करने वाली नहीं है.
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अब जबकि राज्यसभा में विपक्ष के नेता द्वारा इस तरह की समानता व्यक्त की गई है तो उन्हें कम से कम एक-दो उदाहरण ऐसे देने चाहिए जो संघ को आईएसआईएस जैसा सिद्ध करते हों. ऐसा कोई प्रमाण न तो सम्बंधित नेता जी के पास है और न ही उनके दल के साथ-साथ अन्य गैर-भाजपाई दलों के पास जो संघ के आतंकी संगठन सिद्ध कर सके. इसे राजनीति की विकृति ही कही जाएगी कि जिम्मेवार पद पर बैठा एक व्यक्ति बिना किसी प्रमाण, बिना किसी तथ्य के ऐसे बयान देने लगता है. सामान्य रूप से संघ और अन्य आतंकी संगठनों के क्रियाकलापों को देखा जाये तो जमीन-आसमान का अंतर समझ आता है. आतंकी संगठन जहाँ अपहरण, हत्याएँ, बलात्कार आदि में लिप्त है उसके उलट संघ की सक्रियता देशहित में है. संघ की क्रियाविधि को देखा जाये तो विभिन्न महोत्सवों, सांस्कृतिक आयोजनों के साथ-साथ राष्ट्रीय आपदाओं के समय, दुर्घटनाओं के समय, आपातकालीन स्थितियों में संघ के स्वयंसेवकों को तत्परता से सहायता कार्य में संलिप्त देखा जा सकता है. संघ को आतंकी संगठन बताये जाने का समाज में संघ-विरोधी छवि का निर्माण न होते देखकर संघ-विरोधी लोग, दल इतिहास में जाकर गड़े मुर्दे उखाड़ने का काम करने लगते हैं. किसी समय संघ पर लगा अल्पकालिक प्रतिबन्ध हो, गाँधी की हत्या से संघ का जोड़ना हो, रामजन्मभूमि मुद्दे को संघ की देन बताना हो, सरकार का सञ्चालन संघ द्वारा करने का आरोप हो, संघ कार्यालय में तिरंगा फहराने का विवाद हो, देश को भगवाकरण करने का आरोप लगाया जाना हो, इन सबमें विपक्षियों की हताशा ही सामने आती है.
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विगत कई-कई वर्षों से लगातार आरोपों की मार सहने के बाद, विवादों में जबरन घेरने के कुचक्र से निकलने के साथ ही संघ दिन-प्रतिदिन अपनी देशहित, राष्ट्रप्रेमी, सामाजिक छवि को और तेजी से निखारता रहा है. अपने आपको किसी एक क्षेत्र-विशेष के दायरे में न समेटकर संघ ने अपना विस्तार सम्पूर्ण देश में किया है. देश के किसी भी भाग ने जब भी आपातकालीन स्थिति को देखा है तो वहाँ संघ के स्वयंसेवक देखे जाते रहे हैं. ऐसे में आरोप लगाने वालों को सोचना चाहिए कि इस तरह के निरर्थक बयानों से, विवादों से वे संघ को नहीं वरन देश को, यहाँ के समाज को बदनाम करने का काम कर रहे हैं. किसी भी आतंकी संगठन के बारे में न केवल ये देश वरन सम्पूर्ण विश्व भली-भांति जानता है, उसके क्रियाकलापों को देखता है, पढ़ता है ऐसे में इस तरह के बयानों से राष्ट्रीय राजनीति के बदनुमा होते जाने का सन्देश सम्पूर्ण विश्व में जाता है. विरोध के लिए विरोध की राजनीति इस निचले पायदान तक आ चुकी है जहाँ बिना किसी तर्क के, बिना किसी प्रमाण के आरोप-प्रत्यारोप का काम करते रहते हैं. बिना आगा-पीछा सोचे, अनर्गल बयानबाजी करने की इस मानसिकता से नुकसान संघ का नहीं, भाजपा का नहीं, स्वयंसेवकों का नहीं वरन भारतीय राजनीति का होता है, देश का होता, देश की वैश्विक छवि का होता है.
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2 comments:

ब्लॉग बुलेटिन said...

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " बाजीगर - ब्लॉग बुलेटिन " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

kuldeep thakur said...

आपने लिखा...
कुछ लोगों ने ही पढ़ा...
हम चाहते हैं कि इसे सभी पढ़ें...
इस लिये आप की ये खूबसूरत रचना दिनांक 15/03/2016 को पांच लिंकों का आनंद के
अंक 242 पर लिंक की गयी है.... आप भी आयेगा.... प्रस्तुति पर टिप्पणियों का इंतजार रहेगा।