26 January 2013

सोच सुधारो तभी देश पर गर्व कर सकोगे



            अभी-अभी गणतन्त्र दिवस पर पूरे गर्व से तिरंगा फहराया; पूरी शिद्दत के साथ उसे सलामी देते हुए आजादी की जंग में अपनी जान न्यौछावर करने वाले शहीदों को याद किया; सड़कों पर छोटे-छोटे बच्चों को तिरंगे के साथ मस्ती से झूमते हुए देखा है, लगा कि वाकई इस महान देश की महानता ऐसे ही नहीं है। इस महानता के पीछे पूरे दिन विभिन्न लोगों से मिलना हुआ और विभिन्न विचारों से रूबरू होने का मौका मिला। कोई गणतन्त्र दिवस का विरोध करता हुआ दिखाई दिया; किसी ने देश को गर्त में जाता हुआ बताया; कोई यहां की अव्यवस्था पर आंसू बहाता हुआ दिखा तो किसी ने किसी और तरीके से अपना विरोध प्रकट किया। यह सही भी है, आज हमारा देश तमाम सारी विसंगतियों के साये में जकड़ा दिखाई पड़ता है; तमाम सारी समस्याएं हमारे आसपास घूमती-टहलती दिखाई देती हैं। इन्हीं समस्याओं को देखकर हम सीधे-सीधे अपने देश पर, अपना स्वतन्त्रता पर, अपने लोकतन्त्र पर आरोप मढ़ना शुरू कर देते हैं।
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            इन आरोप-प्रत्यारोपों के बीच कभी समूचे परिदृश्य को देखने-समझने की कोशिश इन लोगों द्वारा कभी भी भी नहीं की गई। समस्याओं को, विसंगतियों को सुलझाना कठिन होता है और सबसे आसान होता है आरोप लगा देना। बुद्धिवादी बनने की होड़ में तमाम सारे नाटकबाज टाइप के लोग सड़कों पर उतर कर, टीवी पर अपना चेहरा दिखा कर, कुछ मंचों पर कब्जा जमाकर देश को कोसते दिखते हैं, देश की समस्याओं को, विसंगतियों को सामने लाते दिखते हैं। क्या वाकई आज हमारे देश में सिर्फ और सिर्फ विसंगतियां ही हैं? क्या सिर्फ अराजकता ही अराजकता है? क्या सिर्फ समस्याएं ही समस्याएं हैं? क्या सिर्फ अपराध ही अपराध हैं? हमें ऐसे लोगों के विविध आरोपों के बीच देश के विकास को, देश की वैश्विक उन्नति को, उसकी वैश्विक छवि को भी ध्यान में रखना होगा। हमारे देश ने पिछले कई वर्षों में तमाम सारे वैश्विक आयामों को न केवल छुआ है बल्कि कई नये-नये आयामों को स्थापित भी किया है।
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            सम्भव है कि देश की बुराई करने वालों को, देश की स्वतन्त्रता को, गणतन्त्र को, लोकतन्त्र को गरियाने वालों को देश की तमाम सारी विकसित स्थितियां न दिखाई देती हों। सम्भव है कि ऐसे लोगों को देश की वास्तविक महानता न दिखाई देती हो, ऐसे लोगों के पास सुझाव के लिए, समाधान के लिए किसी भी प्रकार का कोई रास्ता नहीं होता है। समाधान का, सुधार का रास्ता वाकई कठिन है और दो-चार कठिन से शब्दों को निकालकर बुराई कर देना सबसे आसान है। इस आसान से रास्ते पर चलते हुए हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इस देश की स्थिति को बिगाड़ने में इस देश के सत्ताधारी दलों का, सत्ताधारी लोगों का हाथ रहा है। देश का विरोध करने वाले ऐसे पथभ्रष्ट लोगों का विरोध करने के स्थान पर इन्हीं का साथ देते दिखते हैं, प्रत्येक चुनावों में इन्हीं को कुर्सी पर बिठाते हुए दिखते हैं। देश की महानता को, देश की स्वतन्त्रता को, देश के लोकतन्त्र को, देश के गणतन्त्र को, देश के शहीदों को गरियाने के स्थान पर ऐसे लोगों को देश की सत्ता चला रहे लोगों के विरुद्ध एकजुट होने का कार्य करना चाहिए। इस देश के लोगों को आपस में लड़वाने का काम भी चन्द फिरकापरस्त राजनीतिज्ञों ने किया है; देश की अस्मिता को खतरे में डालने का कार्य भी इन्हीं चन्द अवसरवादी राजनीतिज्ञों द्वारा किया गया है। ऐसे में बजाय देश को कोसने के, देश की व्यवस्था को कोसने के देश की व्यवस्था को सुचारू रूप देने का प्रयास करना चाहिए। हमें अपने एक-एक कदम के साथ यह ध्यान रखना चाहिए कि सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तान हमाराहम भारतवासियों के कारण ही है और हमारे ही कार्य इसे महानता प्रदान करते हैं। अपने देश की स्वतन्त्रता को, गणतन्त्र को, महानता को बनाये रखने के लिए आवश्यक है कि हम सभी एकजुट रहें और अवसरवादी राजनीतिज्ञों को सबक सिखायें। जयहिन्द....जय भारत।
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