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17 July 2016

प्रातःस्मरणीय आतंकियों से एक निवेदन

सम्मानित, महान और प्रातःस्मरणीय आतंकवादियो,
सादर नमन

आपके द्वारा आतंक फ़ैलाने के लिए, लोगों को मारने के लिए, समाज में दहशत फ़ैलाने के लिए किये जा रहे नित नए प्रयोग को देखते हुए मन हो उठा आपको सम्मानित कहने का, महान कहने का. आपने बम, बंदूकों, राकेट लोंचर आदि का प्रयोग करने के साथ-साथ आत्मघाती दस्तों का भी बड़ी सुन्दरता से प्रयोग किया है. आपके द्वारा कारों, साईकिलों, टिफिन बॉक्स आदि का धमाकेदार उपयोग पूर्व में लगातार किया जाता रहा है किन्तु जिस तरह से आपने हवाई जहाज का और हाल ही में ट्रक का इस्तेमाल किया वो अतुलनीय है, वन्दनीय है. आपकी इसी अद्भुतधर्मिता ने हमें आपका कायल बना दिया. आतंक फ़ैलाने के लिए नए-नए तरीकों की खोज करने में, ऐसे-ऐसे तरीकों को अपनाने में जिनके बारे में सुरक्षा एजेंसियां सोच भी न पायें, आम आदमी समझ भी न पाए, आपका जवाब नहीं. आपके इसी अंदाज़ से प्रभावित होकर, आपकी आत्मघाती जीवटता के चलते ही आपको सम्मानित, महान और प्रातःस्मरणीय से संबोधित किया जा रहा है. इसमें आप या आपके समर्थक कहीं कोई कनेक्शन न ढूंड़ने लगिएगा क्योंकि आप लोग भले ही कोई कनेक्शन न सोचें पर आपके प्रति घनघोर श्रद्धा-भक्ति रखने वाले आपके पैरोकार और किसी के परम चाटुकार अवश्य ही कोई कनेक्शन खोज निकालेंगे.

बहरहाल, आपको अवगत कराना है कि आप सम्पूर्ण विश्व में आतंक का अत्याधुनिक प्रयोग अमल में ला रहे हैं किन्तु हमारे देश में वही सदियों पुराने तरीके. ये भेदभाव हमारे देश में रह रहे आपके समर्थकों को कतई मंजूर नहीं. यही कारण है कि आपके एक गुर्गे को हमारी सेना द्वारा हूरों के पास भेजे जाने के बाद से आपके कथित समर्थक बौराए घूम रहे हैं. आपसे कुछ निवेदन है कि आप बेधड़क होकर अपना धमाकेदार कार्यक्रम देश में कहीं भी अंजाम दें किन्तु उसमें अत्याधुनिक शैली का प्रयोग हो. वैसे तो आप लोगों के पास सम्पूर्ण विश्व में घूमने और पटाखे फोड़ने की आज़ादी है पर हमारे भारत देश में अब ये और भी सहज-सुलभ हो गया है. नाहक ही आप लोग इतनी सुबह, कभी देर रात काम करते हैं; कभी इतनी हड़बड़ी में होते हैं कि कई-कई बम बिना फूटे ही रह जाते हैं; कभी महीनों हो जाते हैं और आप लोग पटाखों की आवाज़ हम लोगों को नहीं सुनवाते हैं. हम आपको अब विश्वास दिलाना चाहते हैं कि आपके रास्ते यहाँ बहुत आसान हैं.

१ - यहाँ आपके संगठन के अलावा और भी बहुत से लोग हैं जो आपके लिए पलक-पाँवड़े बिछाए रहते हैं. किसी के लिए आप माननीय होते हैं, तो किसी के लिए आप लोग बेटी-भाई होते हैं, किसी की आँखें आपके एनकाउंटर पर जार-जार रोती हैं.

हमारे देश के राष्ट्रीय स्तर के बहुत से नेता ऐसे हैं, जिनकी आँखों में आपके प्रति विशेष स्नेह है. वे आपके रूप में हमारे देश के नागरिकों को वोट-बैंक के रूप में स्थापित कर अपना उल्लू सीधा करते रहते हैं. अपने वोट-बैंक को साधने के लिए वे कभी भी खुलकर आपके खिलाफ बोलने की जहमत ही नहीं उठा सकते, कार्यवाही क्या खाक करेंगे.

अब हमारे नेतागण एक कदम और आगे आ गए हैं. वे चाटुकारिता की हद से आगे निकल कर बजाय कोई ठोस कार्यवाही करने के आतंकियों के कनेक्शन निकालने लगे हैं; रिश्तेदारी बताने लगे हैं. कोई बेटी हो जाती है, कोई शांतिदूत बन जाता है, कोई मासूम नजर आता है. अब ऐसे में काहे का डरना, आओ आराम से और निपटा कर चले जाओ.

एक बात और, अब बेधड़क, खुलेआम घूमो, अब कोई आपके बारे में एलर्ट जारी करने की, पूर्व-सूचना देने की हिम्मत ही नहीं करेगा. अब यहाँ की राजनीति के चपेटे में सुरक्षा एजेंसियां भी आ गईं हैं. कोई एक के ऊपर हाथ रखे है, कोई दूसरी को अपने पिंजरे में पाले है, कोई खुद को लावारिस सा समझ रही है. अब जब पूर्व-सूचना को गलत बताया जाता है, किसी भी तरह की पकड़ा-धकड़ी पर उसे जबरन हस्तक्षेप बताया जाता है तो कोई काहे को सूचनाओं को एकत्र करेगा.

हाँ, अब यहाँ मरने का खौफ लेकर तो बिलकुल न आना. पहली बात तो कोई पकड़ने वाला या मारने वाला ही नहीं क्योंकि यहाँ सुरक्षा तंत्र तभी प्रभावी होता है जब उसे आलाकमान से आदेश मिलता है और आज के दौर में आलाकमान अपना वोट-बैंक देखती है. अब मान लो मुठभेड़ हो भी गई तो पहले तो ये पकड़ने का काम करते हैं, सबूतों को एकत्र करने के लिए (पता नहीं आचार रखते हैं क्या?) यदि पकड़ गए तो दस-पंद्रह वर्ष आराम से बिरयानी खाना, मौका लग जाए तो कहीं से चुनाव लड़ने का भी जुगाड़ भिड़ा लेना. कहीं धोखे में यदि मार डाला गया तो संभव है कि आपके घर-परिवार वालों को आर्थिक मदद मिल जाए क्योंकि यहाँ ये साबित करने वाले भी बहुत हैं कि आपको फ़र्ज़ी एनकाउंटर में मारा गया.

हम जानते हैं कि आप लोग तो मजहब के नाम पर अपने आपको कुर्बान कर रहे हो; जिहाद कर रहे हो. वैसे ये सही किया, अभी तक इधर-उधर छुटपुट बम फोड़ने से, हिन्दू धर्म-स्थलों पर धमाके करने से आप लोगों की कोई पहचान थोड़े बन रही थी बल्कि यहाँ के चाटुकार नेताओं ने आप लोगों का प्रतिद्वंद्वी भगवा आतंकवादऔर खड़ा कर दिया था. आपके धमाके से लोगों को, चाटुकारों को भी लगना चाहिए कि आपने धर्म पर हमला किया है, संस्कृति पर हमला किया है. ये आपके लिए गौरव की बात है.

७ – आप लोगों की पहचान अब वैश्विक स्तर पर भी बन चुकी है. पहले तो आपके इतने मेहनतकश प्रयासों को भारत-पाकिस्तान का अंदरूनी मामला बता दिया जाता था. अब जैसे-जैसे वैश्विक स्तर पर आपने अपने कार्यक्रमों को आयोजित करना शुरू किया, जैसे-जैसे विभिन्न तरीकों से लोगों को मौत देना शुरू की, उनको भी समझ आने लगा कि आप किसी एक-दो देश की परिधि में नहीं वरन सम्पूर्ण विश्व में छा जाने वाला प्रभाव रखते हैं.

तो फिर आप सब निसंकोच, बेधड़क, निर्द्वंद्व होकर अपने पटाखे बनाओ और फोड़ते रहो. ट्रक, कर, हवाईजहाज का भी प्रयोग करो. चिंता न करो, यहाँ क्या है, अत्यधिक जनसँख्या है..कुछ सैकड़े मर भी गए तो कौन सा तूफ़ान आ जायेगा. बस नेताओं को न मार डालना क्योंकि वे तो देश चलाते हैं, वे मर गए तो देश कौन चलाएगा?


आपको नमन करता आपका शुभचिंतक

4 comments:

SUBHASH BHARAT said...

Explained hard

SUBHASH BHARAT said...

Explained hard

ब्लॉग बुलेटिन said...

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " दिल धड़कने दो ... " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

GathaEditor Onlinegatha said...

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