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04 May 2012

ब्लॉग-लेखन में चार वर्ष की यात्रा



          बुजुर्गों को अकसर कहते सुना है कि समय की गति बहुत तेज है, कई बार इसे अनेक रूपों में देखा और महसूस किया है। हमारे देखते-देखते समय इतनी तेजी से आगे बढ़ जाता है कि कई बार तो हमें खुद पर ही विश्वास नहीं होता है। घर-परिवार में देख लीजिये; मोहल्ले में देख लीजिये; अपने यार-दोस्तों की मण्डली को याद कर लीजिये; स्कूल-कॉलेज के दिनों की याद करके देखिये, ऐसा लगेगा कि जैसे जो कुछ गुजरा वो अभी कल की ही बात हो।
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          कुछ इसी तरह का अनुभव हमें अपने ब्लॉग जगत में लेखन को लेकर हो रहा है। अपने ब्लॉग बनाने की स्थिति, अपनी पहली पोस्ट लिखने की स्थिति को आज जब भी याद करते हैं तो लगता है कि जैसे कल की ही बात हो। समय गुजरता रहा, कैलेण्डर पर तारीख बदलने के साथ-साथ महीने, वर्ष भी बदलते रहे। अपने बनाये ब्लॉग में कभी तेजी और सक्रियता के साथ तो कभी सुस्ती के साथ विभिन्न विषयों पर पोस्ट लिखते रहे। लेखन का यह सिलसिला आज 4 मई को चार वर्ष की अवधि को पूरा कर रहा है।
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          सोचकर खुद में ही आश्चर्य सा होता है कि आज से चार वर्ष पूर्व जब अप्रैल 2008 के अन्तिम दिनों में ब्लॉग को बनाया था तो मन में कैसे एक अजीब तरह का डर था। इंटरनेट कनेक्शन लेने के कुछ महीने बीत जाने के बाद भी इंटरनेट पर लेखन का कोई रास्ता सूझ नहीं रहा था और उरई जैसी छोटी सी जगह में भी किसी से कोई सहायता मिल नहीं पा रही थी। गूगल बाबा के सहारे से खोजबीन करके जैसे-तैसे ब्लॉग लेखन की जानकारी मिली जिसके सहारे डरते-डरते न जाने कितनी जगह अपने ब्लॉग बना लिये। इसके बाद भी डर कि कहीं कोई छिपी हुई शर्त न हो। अपने कुछ दोस्तों को फोन किया; कुछ कम्प्यूटर के जानकारों को परेशान किया और फिर डरते-डरते 4 मई 2008 को अपनी पहली पोस्ट लगा ही दी।
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          धीमे-धीमे हमारे ब्लॉग पाठकों की संख्या बढ़ने लगी, कुछ अच्छे और अनुभवी ब्लॉगरों का भी साथ मिला, उत्साहवर्द्धन मिला...बस लिखते-पढ़ते कैसे चार वर्ष गुजर गये पता ही नहीं चला। इस चार वर्ष की अवधि में बहुत से अनुभव हुए..कुछ खट्टे और कुछ मीठे। इन अनुभवों ने बहुत कुछ सीख भी दी। इंटरनेट पर लेखन का चस्का इस कदर बैठा कि बहुत से सामूहिक ब्लॉग की सदस्यता ले ली..बहुत सी वेबसाइट पर लिखना शुरू किया और इस चस्के का एक परिणाम अपनी वेबसाइट के रूप में भी सामने आया।
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          इंटरनेट पर लेखन की, पहचान पाने की भूख आज चार वर्ष के बाद भी उतनी ही तीव्र है जितनी कि पहले दिन, पहली पोस्ट लिखते समय थी। यही कारण है कि आज भी इंटरनेट पर लेखन का कोई भी अवसर न छोड़ने का प्रयास रहता है। फेसबुक से सक्रियता से जुड़ना भीइसी कारण से हुआ किन्तु अब लगता है कि फेसबुक ने ब्लॉग लेखन को अवरुद्ध ही किया है। फिलहाल, लेखन बदस्तूर जारी है....लेखन की भूख आज भी ज्यों की त्यों है....पढ़ने की ललक भी बरकरार है।
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          वैसे तो लेखन के क्षेत्र में सन् 1983-84 से हैं और उसी समय से प्रकाशन भी हो रहा है किन्तु इंटरनेट पर लेखन की अवधि 2008 से है। इतना समय गुजारने के बाद भी अभी भी सीखने की प्रक्रिया चल ही रही है। कई बार स्वयं को इंटरनेट के मामले में, ब्लॉग लेखन के मामले में अनाड़ी महसूस करते हैं। सीखने की प्रक्रिया अनवरत चलनी है, चलती रहनी है। एक निवेदन नये/युवा ब्लॉग लेखकों से, फेसबुक लेखकों से, इंटरनेट लेखकों से कि वे अधिक से अधिक पढ़ने का प्रयास करें...विचारों की धार को तेज करने के लिए लेखन से ज्यादा पठन-पाठन आवश्यक है।
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          एक निवेदन अपने वरिष्ठ-अनुभवी ब्लॉग सदस्यों से कि वे हमारा साथ न छोड़ें और हमारी मुश्किल में हमेशा की तरह से हमें अपना सहयोग देते रहें। हाँ, अन्य ब्लॉग सदस्यों के लेखन पर टिप्पणी न कर पाना हमारी एक कमजोरी हो सकती है पर हमारा भरसक प्रयास यही रहता है कि अधिक से अधिक लोगों को हम पढ़ सकें। कृपया टिप्पणी न कर पाने को अन्यथा न लिया जाया करे। अपनी चार वर्षीय ब्लॉग-लेखन यात्रा के विभिन्न अनुभवों के बारे में समय-समय पर आपको परिचित करवायेंगे।


7 comments:

शिवम् मिश्रा said...

हिन्दी ब्लॉग जगत मे 4 वर्ष पूरे करने पर आपको और आपके ब्लॉग को हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनायें !

रचना said...

अपने वरिष्ठ-अनुभवी ब्लॉग सदस्यों से
inmae kaun kaun haen :)
badhaii

नीरज गोस्वामी said...

ब्लॉग जगत में चार साल सफलतापूर्वक बिताने पर बधाई...लिखते रहें...

नीरज

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
बधाई हो!
आपकी प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर लगाई गई है!
चर्चा मंच सजा दिया, देख लीजिए आप।
टिप्पणियों से किसी को, देना मत सन्ताप।।
मित्रभाव से सभी को, देना सही सुझाव।
उद्गारों के साथ में, अंकित करना भाव।।

ZEAL said...

बधाई और शुभकामनायें..

अनूप शुक्ल said...

चार साल पूरे करने के लिये बधाई! आगे के लिये मंगलकामनायें।

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

आप सभी का आभार