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19 April 2011

उस ट्रेन में आग, इस ट्रेन में आग पर फर्क कितना है -- अब तो खुमारी तोडिये


कल राजधानी के दो कोच में आग लगी. आंकड़ों पर एक निगाह--
दो कोच में आग- ट्रेन चल रही थी- रात के दो बजे- सभी यात्री सोये हुए- कोई बचाने वाला नहीं- एक भी यात्री घायल नहीं

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गोधरा में भी ट्रेन के एक कोच में आग लगी थी--
एक कोच में आग- ट्रेन खड़ी थी- शाम का समय- सभी यात्री जाग रहे- बचाने वाले भी मौजूद- सभी 59 की मौत.
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कुछ अंदाज़ हुआ आपको या अभी भी किसी और खुमारी में हैं?



दोनों चित्र गूगल छवियों से साभार लेकर जोड़े गए हैं

2 comments:

सुशील बाकलीवाल said...

लगने व लगाने का फर्क...

दीपक 'मशाल' said...

षड़यंत्र और हादसे का फर्क, साथ ही यात्री-यात्री का भी..