17 April 2011

सपनों के मनोविज्ञान में हमारी भटकन


हम सभी सपनों को अवश्य ही देखते हैं। वैसे तो सभी सोते हुए ही सपने देखता है पर बहुत से ऐसे हैं जो जागते हुए सपनों को देखा करते हैं। बहरहाल हम यहां उन्हीं सपनों की बात करने आये हैं जो सोते समय ही हमारी नींद में आकर हमसे कुछ कहना चाहते हैं। अब पता नहीं कुछ कहना भी चाहते हैं अथवा यूं ही आते हैं।



चित्र गूगल छवियों से साभार

वैसे हम भी कभी-कभी जागते हुए सपनों को देख लेते हैं पर ज्यादातर सपने हमें सोते में ही आते हैं। इधर सपने आते हैं और उधर बहुत से सवालों को हमारे साथ छोड़ जाते हैं। बहुत सारे सवाल उमड़ते-घुमड़ते हैं पर सभी निरुत्तर रह जाते हैं।

हमारे सपनों में कई बार एक ही सपना लगातार आता है। हर बार एक जैसा और कई बार जहां पहले समाप्त हुआ था, वहीं से शुरू होता हुआ। ऐसे भी सपने आते हैं जो हमारे जीवन से कहीं से भी मेल नहीं खाते हैं पर मानकर कि दिमाग की भटकन है, चुपचाप उसे भूल भी जाते हैं।

ऐसे सपनों का भी आना होता है जिनसे कभी सम्पर्क नहीं है, जिन स्थानों पर कभी जाना नहीं हुआ, सपनों में हम वहां की सैर करते हैं। ऐसे सपने भी हमें अकसर आते हैं जिनको हमने भविष्य में सत्य होते देखा है और घटनाओं को ज्यों का त्यों सपने की भांति गुजरते देखा है।

इसके अलावा कुछ सपने ऐसे होते हैं कि उनमें जो लोग, जो स्थान दिखता है उससे वर्षों पहले ही साथ छूट चुका होता है। यह भी है कि साथ छूटने के बाद तो उस स्थान पर जाना हुआ और ही उन लोगों से मिलना हुआ। इसके बाद भी हर दो-चार दिन में उस स्थान का, उन लोगों का सपने में आना क्या दर्शाता है, यह समझ में नहीं आता है।

  1. ऐसे सपने हमें क्यों लगातार आते हैं जिन स्थानों, घटनाओं, व्यक्तियों का हमसे सम्पर्क छूटे 15-20 वर्ष से ज्यादाहो गये हों और उनसे हम फिर कभी मिले भी नहीं हैं?
  2. इसी सबको लेकर सवाल उठते हैं कि क्या सपनों की अपनी कोई भाषा होती है?
  3. क्या सपने हमें कुछ दिखाना-कुछ बताना चाहते हैं?
  4. क्या सपनों का हमारे जीवन से, पूर्वजन्म से कुछ जुड़ाव होता है?
  5. सपनों का मनोविज्ञान क्या है?
  6. क्या सपने सिर्फ हमारे अचेतन मन की कल्पना है अथवा हमारे वास्तविक जीवन से इनका कोईसरोकार है?

सवाल तो बहुत हैं पर जितनों का जवाब मिल जाये वही बहुत है।


4 comments:

Shah Nawaz said...

सवाल वाजिब हैं आपके...

वन्दना said...

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (18-4-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

http://charchamanch.blogspot.com/

Udan Tashtari said...

यही भटकन लिए हम भी भटक रहे हैं, मित्र.

Sunil Kumar said...

प्रश्न भी आपके और उत्तर भी आपके ....